🗒 UPSC संपादकीय नोट्स — दैनिक करंट अफेयर्स
त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका | हंता वायरस | भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर | प्रीलिम्स + मेन्स तैयार
📅 संस्करण: मई 2026 | स्रोत: The Hindu Editorial | 3 संपादकीय कवर
📋 आज के संपादकीय — एक नज़र में
THE HINDU | भारतीय राजव्यवस्था + संवैधानिक कानून + शासन
⚖️ त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका क्या है?
लेखक: Krishnadas Rajagopal | संदर्भ: तमिलनाडु — 2026 विधानसभा चुनावों के बाद राज्यपाल ने TVK के C. Joseph Vijay को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से इनकार किया
📋 पाठ्यक्रम:
GS-2: भारतीय संविधान
GS-2: राज्य कार्यपालिका
GS-2: राज्यपाल की शक्तियाँ
प्रीलिम्स: संवैधानिक अनुच्छेद + SC निर्णय
🎯 इसे क्यों पढ़ें? त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका = UPSC GS-2 का बार-बार आने वाला थीम। तमिलनाडु का ताज़ा संदर्भ = नई प्रासंगिकता। फ्लोर टेस्ट, Sarkaria Commission, SR Bommai, BK Kapur, Rameshwar Prasad = केस-लॉ का खज़ाना। Article 164, 174(2)(b), 356 = प्रीलिम्स के लिए अनुच्छेद-रीकॉल। UPSC को “संवैधानिक परंपराएँ बनाम संवैधानिक पाठ” वाले प्रश्न पसंद हैं।
⚡ सार
तमिलनाडु के 2026 विधानसभा चुनावों में TVK के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद, राज्यपाल Rajendra Arlekar ने C. Joseph Vijay को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया। संविधान राज्यपाल से संयम/सावधानी (sobriety) के साथ कार्य करने की अपेक्षा करता है — राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ने से पहले स्थिर सरकार बनाने की सभी संभावनाओं को टटोलना चाहिए। बहुमत जानने का एकमात्र वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीका फ्लोर टेस्ट है, राज्यपाल की “व्यक्तिगत संतुष्टि” नहीं। “लोक भवन नहीं, सदन ही वह स्थान है जहाँ लोकतंत्र क्रियाशील होता है।”
🔍 अब तक की कहानी — तमिलनाडु संदर्भ
- TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनी
- राज्यपाल Rajendra Arlekar ने TVK अध्यक्ष C. Joseph Vijay को नए CM के रूप में कई दिनों तक शपथ दिलाने से इनकार किया
- लोक भवन ने जोर दिया कि विजय को 234 सीटों वाली विधानसभा में कम-से-कम 118 विधायकों के “समर्थन-पत्र” (physical letters) सौंपकर बहुमत सिद्ध करना होगा
- विजय ने राज्यपाल से चार बार मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया; रविवार सुबह 10 बजे शपथ का कार्यक्रम तय था
- SC में रिट याचिका दाखिल — तर्क: राज्यपाल “कर्तव्यबद्ध” हैं कि वे श्री विजय को सरकार बनाने हेतु आमंत्रित करें, शपथ दिलाएँ और तुरंत विश्वास मत से बहुमत जाँचें
📜 नई सरकार गठन में राज्यपाल की भूमिका — अनुच्छेद 164
- संविधान का अनुच्छेद 164 — राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है
- त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में CM चुनने के लिए संविधान कोई स्थिर/निश्चित प्रक्रिया नहीं बताता
- संवैधानिक परंपराएँ (conventions) कहती हैं कि राज्यपाल के कदम संयम/सावधानी (sobriety) से निर्देशित हों
- मुख्य उद्देश्य: स्थिर सरकार का गठन सुनिश्चित करना
- इस हेतु: Sarkaria Commission (1988); राज्यपालों की पाँच-सदस्यीय समिति (राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त, Conference of Governors, नई दिल्ली, नवंबर 1970); तथा SC के क्रमागत निर्णयों से विकसित परंपराएँ
- राज्यपाल को कानूनी ढंग से आगे बढ़ते हुए, राजनीतिक दलों/समूहों/निर्दलीय विधायकों के साथ उचित समय के भीतर सभी संभावनाएँ तलाशनी चाहिए
📋 प्राथमिकता क्रम — Sarkaria Commission (1988)
⭐ सरकार बनाने हेतु आमंत्रण का प्राथमिकता क्रम
- 1st: चुनाव-पूर्व गठबंधन (pre-poll alliance) जिसने बहुमत जीता हो — उसके नेता को आमंत्रित करें
- 2nd: सबसे बड़ी एकल पार्टी, जो बहुमत समर्थन दिखा सके
- 3rd: चुनाव-उपरांत गठबंधन (post-poll alliance) जो विधानसभा में बहुमत दिखा सके
- यदि कोई विकल्प सफल न हो: Article 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश — केवल अंतिम विकल्प
- SC ने क्रमागत निर्णयों के माध्यम से इस क्रम का समर्थन किया
- तमिलनाडु में कोई चुनाव-पूर्व गठबंधन स्पष्ट बहुमत में नहीं था → अगला विकल्प = सबसे बड़ी पार्टी (TVK)
🗳 फ्लोर टेस्ट कब आवश्यक है?
- SR Bommai (1994): नौ-न्यायाधीश पीठ — संविधान यह अनिवार्यता नहीं बनाता कि शपथ के समय सरकार बनाने वाली पार्टी के पास विधानसभा में आवश्यक बहुमत ही हो
- “अल्पमत सरकारें भी असामान्य नहीं हैं। आवश्यक यह है कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त हो” — सुप्रीम कोर्ट
- बहुमत जानने का सबसे वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीका = फ्लोर टेस्ट
- राज्यपाल बहुमत का निर्णायक नहीं हो सकता — लोक भवन नहीं, सदन ही वह स्थान है जहाँ लोकतंत्र क्रियाशील होता है
- राज्यपाल अनिश्चितता (limbo) में नहीं रह सकता — न सरकार नियुक्त कर पाए, न विधानसभा भंग करने की शक्ति प्रयोग कर पाए
- BK Kapur (2001) और Rameshwar Prasad (2006) में SC व्याख्या: राज्यपाल Article 174(2)(b) के तहत राज्य विधान सभा को पहली बैठक से पहले भी भंग कर सकता है — पर केवल तब, जब दल आवश्यक शक्ति वाली सरकार बनाने में असमर्थ हों और संवैधानिक मशीनरी के ठप होने का खतरा हो
🏛 क्या फ्लोर टेस्ट एक वस्तुनिष्ठ उपाय रहा है?
- राज्यपाल Arlekar का भौतिक समर्थन-पत्रों पर जोर = गतिरोध का मुख्य कारण — व्यापक आलोचना
- SC लगातार फ्लोर टेस्ट को बहुमत जानने का सबसे वस्तुनिष्ठ व पारदर्शी तरीका मानता आया है
- मतदाताओं के जनादेश का भाग्य राज्यपाल की व्यक्तिगत विवेकाधीन शक्ति पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए
- विश्वास परीक्षण सामान्यतः विधानसभा में मतदान पर छोड़ा जाना चाहिए
- 2017: कोर्ट ने गोवा में Manohar Parrikar के शपथग्रहण पर रोक से इनकार किया; कांग्रेस पर 15 दिन की अवधि घटाकर 48 घंटे में बहुमत सिद्ध करने का निर्देश दिया
- कर्नाटक: राज्यपाल ने Yediyurappa को बुलाया; 15 दिन का समय; SC ने 24 घंटे (लाइव कैमरे पर, गुप्त मतदान नहीं) किया; Yediyurappa ने विश्वास मत से पहले इस्तीफा दिया
🔍 प्रीलिम्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- Article 164: राज्यपाल CM नियुक्त करता है; मंत्री “राज्यपाल के प्रसादपर्यंत” पद पर रहते हैं
- Article 174(2)(b): राज्यपाल राज्य विधान सभा भंग कर सकता है — SC: संवैधानिक टूटन रोकने हेतु यह शक्ति पहली बैठक से पहले भी प्रयोग हो सकती है
- Article 356: राष्ट्रपति शासन — जब संवैधानिक मशीनरी विफल; न्यायिक समीक्षा के अधीन (SR Bommai)
- फ्लोर टेस्ट: बहुमत जाँचने का एकमात्र वस्तुनिष्ठ व पारदर्शी तरीका — निर्णायक सदन है, राज्यपाल नहीं
- Sarkaria Commission (1988): केंद्र-राज्य संबंधों पर 3-सदस्यीय आयोग; SC द्वारा समर्थित; सरकार गठन हेतु प्राथमिकता क्रम
- SR Bommai (1994): 9-न्यायाधीश पीठ; फ्लोर टेस्ट = गोल्ड स्टैंडर्ड; Article 356 न्यायिक समीक्षा योग्य
- BK Kapur (2001): संवैधानिक टूटन से बचने हेतु पहली बैठक से पहले भी विधानसभा भंग की शक्ति (सीमित शर्तों में)
- Rameshwar Prasad (2006): BK Kapur की पुष्टि; राज्यपाल के विवेकाधिकार की सीमाएँ स्पष्ट
- TVK: Tamilaga Vettri Kazhagam — अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी; 2026 TN चुनाव जीते
📝 मेन्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- परंपरा बनाम पाठ: Article 164 त्रिशंकु विधानसभा की प्रक्रिया नहीं बताता — परंपराएँ व SC निर्णय रिक्तता भरते हैं; राज्यपाल की भूमिका सीमित और संयम-आधारित
- भौतिक पत्रों की मांग: Arlekar का जोर संवैधानिक रूप से संदिग्ध; SC: बहुमत सदन के पटल पर तय होता है, राज्यपाल को पत्र देकर नहीं
- संघवाद की चिंता: विपक्ष-शासित राज्यों में राज्यपाल की पक्षपातपूर्ण भूमिका = संघीय भावना के लिए चुनौती; SC ने ओवररीच को सीमित किया
- चुनाव-उपरांत गठबंधन की वैधता: SR Bommai (1994) — SC ने वैचारिक रूप से समान दलों के “golden majority” तक पहुँचने के लिए चुनाव-उपरांत गठबंधन को गलत नहीं माना
- Punchhi Commission (2010): सरकार गठन में राज्यपाल की भूमिका का संहिताकरण; Article 356 के दुरुपयोग के प्रति सावधानी
🇮🇳 भारत परिप्रेक्ष्य
तमिलनाडु प्रकरण भारतीय संघवाद में एक बार-बार उभरने वाले तनाव को रेखांकित करता है — राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका बनाम विवेकाधीन शक्ति का राजनीतिक उपयोग। सुप्रीम कोर्ट ने लगातार कहा है कि लोक भवन नहीं, सदन ही “वह स्थान है जहाँ लोकतंत्र क्रियाशील होता है।” बहुमत का वैध परीक्षण = फ्लोर टेस्ट — न कि समर्थन-पत्र, न ही राज्यपाल की व्यक्तिगत संतुष्टि।
🔑 प्रमुख शब्द
Article 164
Article 174(2)(b)
Article 356
Floor Test
Hung Assembly
Sarkaria Commission 1988
SR Bommai 1994
BK Kapur 2001
Rameshwar Prasad 2006
TVK — Tamil Nadu 2026
Governor Rajendra Arlekar
Punchhi Commission 2010
✏ संभावित मेन्स प्रश्न
- “त्रिशंकु विधानसभा में सरकार गठन के दौरान राज्यपाल की भूमिका व्यक्तिगत विवेक पर नहीं, बल्कि संवैधानिक परंपराओं और सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक व्याख्याओं पर आधारित होती है।” समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (GS-2, 250 शब्द)
- “संसदीय लोकतंत्र में बहुमत का एकमात्र वैध परीक्षण फ्लोर टेस्ट है, राज्यपाल की संतुष्टि नहीं।” प्रासंगिक SC निर्णयों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (GS-2, 150 शब्द)
- Sarkaria Commission द्वारा सरकार गठन हेतु प्रस्तावित प्राथमिकता क्रम तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसके समर्थन का परीक्षण कीजिए। (GS-2, 150 शब्द)
🎯 अभ्यास MCQ
प्रीलिम्स Q
त्रिशंकु विधानसभा में सरकार गठन के दौरान राज्यपाल की भूमिका के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. Sarkaria Commission (1988) ने सिफारिश की कि राज्यपाल पहले उस चुनाव-पूर्व गठबंधन को आमंत्रित करे जिसने बहुमत जीता हो; यदि न हो, तो सबसे बड़ी एकल पार्टी; उसके बाद चुनाव-उपरांत गठबंधन।
2. SR Bommai (1994) में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संविधान शपथ के समय सरकार बनाने वाली पार्टी के लिए विधानसभा में बहुमत होना अनिवार्य बनाता है।
3. सुप्रीम कोर्ट ने लगातार माना है कि बहुमत जानने का सबसे वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीका फ्लोर टेस्ट है, राज्यपाल की व्यक्तिगत संतुष्टि नहीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
व्याख्या देखें
कथन 1 ✓ — Sarkaria Commission का क्रम: चुनाव-पूर्व गठबंधन → सबसे बड़ी पार्टी → चुनाव-उपरांत गठबंधन → अंतिम विकल्प के रूप में राष्ट्रपति शासन; SC ने समर्थन किया।
कथन 2 ✗ — SR Bommai (1994) ने इसके विपरीत कहा: “संविधान यह बाध्यता नहीं बनाता कि सरकार बनाने वाली पार्टी के पास शपथ के समय विधानसभा में बहुमत ही हो।” आवश्यक यह है कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त हो — जिसका परीक्षण फ्लोर टेस्ट से होता है।
कथन 3 ✓ — SC लगातार फ्लोर टेस्ट को बहुमत जाँचने का सबसे वस्तुनिष्ठ व पारदर्शी तरीका मानता है। राज्यपाल निर्णायक नहीं — “लोक भवन नहीं, सदन ही लोकतंत्र का कार्य-क्षेत्र है।”
उत्तर: (b)
मेन्स Q
“त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका व्यक्तिगत विवेक पर नहीं, बल्कि संवैधानिक परंपराओं और न्यायिक घोषणाओं पर आधारित होती है।” तमिलनाडु प्रकरण और प्रासंगिक SC निर्णयों के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (GS-2, 250 शब्द)
📝 उत्तर-रूपरेखा
भूमिका: तमिलनाडु 2026 — TVK सबसे बड़ी पार्टी; राज्यपाल Arlekar ने Vijay को CM पद की शपथ नहीं दिलाई; भौतिक समर्थन-पत्रों की मांग की। यह प्रकरण त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की भूमिका पर पुरानी बहस को फिर जीवंत करता है।
संवैधानिक स्थिति:
• Article 164 — राज्यपाल CM नियुक्त करता है; त्रिशंकु विधानसभा हेतु निश्चित प्रक्रिया नहीं
• परंपराएँ + SC निर्णय रिक्तता भरते हैं
• राज्यपाल “sobriety” से संचालित; प्राथमिक लक्ष्य = स्थिर सरकार
Sarkaria Commission क्रम (1988):
• चुनाव-पूर्व गठबंधन (बहुमत) → सबसे बड़ी पार्टी → चुनाव-उपरांत गठबंधन → राष्ट्रपति शासन (अंतिम विकल्प)
• SC ने क्रमागत निर्णयों में समर्थन किया
SC न्यायशास्त्र:
• SR Bommai (1994): शपथ के समय बहुमत अनिवार्य नहीं; फ्लोर टेस्ट = गोल्ड स्टैंडर्ड; Article 356 न्यायिक समीक्षा योग्य
• BK Kapur (2001) + Rameshwar Prasad (2006): पहली बैठक से पहले भंग करने की शक्ति केवल संवैधानिक टूटन रोकने हेतु, सीमित परिस्थितियों में
• निरंतर सिद्धांत: बहुमत की कसौटी सदन में तय होगी, राज्यपाल के कक्ष में नहीं
तमिलनाडु प्रकरण — समस्या:
• भौतिक पत्रों की मांग असंवैधानिक; बहुमत सदन में, फ्लोर पर तय होता है
• व्यक्तिगत विवेक का स्थान परंपरा/न्यायिक निर्देश ले — अन्यथा संघवाद को चोट
निष्कर्ष: राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक सीमाओं में बंधी है। लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा = फ्लोर टेस्ट; “लोक भवन” की संतुष्टि नहीं।
THE HINDU | स्वास्थ्य + विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी + अंतरराष्ट्रीय
🦠 हंता वायरस वैश्विक ध्यान क्यों आकर्षित कर रहा है?
लेखक: Athira Elssa Johnson | संदर्भ: MV Hondius अभियान-क्रूज़ जहाज़ पर प्रकोप — मई 2026 की शुरुआत; तीन मौतें रिपोर्ट
📋 पाठ्यक्रम:
GS-2: स्वास्थ्य — अंतरराष्ट्रीय संगठन
GS-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
GS-3: जूनोटिक (Zoonotic) रोग
प्रीलिम्स: रोग + WHO
🎯 इसे क्यों पढ़ें? हंता वायरस = जूनोटिक रोग जो नए सिरे से वैश्विक ध्यान खींच रहा है। MV Hondius प्रकोप = ताज़ा ट्रिगर। WHO की भूमिका, वैक्सीन/एंटीवायरल का अभाव = नीति-आयाम। HPS बनाम HFRS = प्रीलिम्स में रोग-भेद। “अगला COVID-19 नहीं” = मेन्स में संतुलित/न्यूएंस्ड उत्तर का अवसर।
⚡ सार
मई 2026 की शुरुआत में MV Hondius अभियान-क्रूज़ जहाज़ पर हंता वायरस का प्रकोप — 3 मौतें, 5 अन्य संक्रमित — ने चूहे/कृंतक-जनित वायरसों के एक समूह की ओर वैश्विक ध्यान खींचा है। हंता वायरस मानव-से-मानव आसानी से नहीं फैलता (COVID-19 या इन्फ्लुएंज़ा के विपरीत)। WHO के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य COVID-19 जैसी महामारी की संभावना नहीं दर्शाते। फिर भी, यह घटना जूनोटिक रोग निगरानी और वैश्विक यात्रा-जोखिम की अहमियत दिखाती है।
🔍 जहाज़ पर क्या हुआ?
- MV Hondius — डच अभियान-क्रूज़ जहाज़ — Ushuaia (Argentina) से दक्षिण अटलांटिक पार करते हुए Cape Verde और Canary Islands की ओर जा रहा था
- WHO के अनुसार 147 यात्री और क्रू सवार थे; 34 पहले ही उतर चुके थे
- 8 मई तक — 8 मामले (6 पुष्टि, 2 संभावित); 3 की मृत्यु Andes strain of hantavirus से संक्रमण के बाद
- कई लोगों को बुखार और साँस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया
- पुष्टि/संदिग्ध मामलों के बाद — Singapore, Switzerland, South Africa, Spain, USA की स्वास्थ्य एजेंसियाँ यात्रियों की ट्रैकिंग/मॉनिटरिंग में लगीं
🐀 हंता वायरस क्या है?
- Hantaviruses = वायरसों का एक समूह, जो मुख्यतः चूहों/कृंतकों (rats, mice) में पाया जाता है
- मानव संक्रमण: संक्रमित कृंतकों के मूत्र, लार या मल के संपर्क से — विशेषकर सफाई या दूषित जगह को छेड़ने पर, जब वायरस कण हवा में जा सकते हैं
- यह फेफड़ों या गुर्दों को प्रभावित कर सकता है
- कुछ स्ट्रेन Hantavirus Pulmonary Syndrome (HPS) — गंभीर श्वसन रोग — पैदा करते हैं
- अन्य स्ट्रेन Haemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS) — गुर्दों और रक्तवाहिकाओं को प्रभावित — पैदा करते हैं
- WHO: अधिकांश हंता वायरस मानव-से-मानव नहीं फैलते, लेकिन Andes virus strain (South America) में कुछ मानव-से-मानव संचरण (अकसर निकट संपर्कों में) देखा गया है
⚠️ स्वास्थ्य एजेंसियाँ चिंतित क्यों हैं?
- MV Hondius इसलिए चर्चा में आया क्योंकि मामला पहचानने से पहले यात्रियों ने कई देशों में यात्रा की — सीमा-पार ट्रैकिंग चुनौती
- WHO: मामलों में बुखार, जठरांत्र लक्षण, निमोनिया, श्वसन संकट, शॉक जैसे लक्षण
- WHO और CDC अधिकारियों का जोर: हंता वायरस का प्रसार COVID-19 से अलग — बहुत कम संक्रामक
- WHO: हंता वायरस इन्फ्लुएंज़ा या SARS‑CoV‑2 जैसे एयरबोर्न वायरसों की तरह मानव-से-मानव आसानी से नहीं फैलता
💊 उपचार और जोखिम
- लक्षण एक से आठ सप्ताह बाद उभर सकते हैं — शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे: बुखार, मांसपेशियों में दर्द, थकान, सिरदर्द, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पेट दर्द, चक्कर
- गंभीर मामलों में: संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित — खाँसी, छाती में जकड़न, साँस में तकलीफ, फेफड़ों में तरल
- हंता वायरस के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज या स्वीकृत वैक्सीन नहीं
- उपचार = समर्थनात्मक चिकित्सा: ऑक्सीजन, फ्लूड मैनेजमेंट, ICU; कुछ को वेंटिलेशन की जरूरत
- उच्च जोखिम समूह: किसान, वानिकी कर्मी, कैंपर, निर्माण कर्मी, खराब वेंटिलेशन/परित्यक्त भवनों की सफाई करने वाले
- रोकथाम: कृंतक नियंत्रण, स्वच्छता, संभावित दूषित क्षेत्रों में सुरक्षित सफाई-प्रक्रिया
🌍 क्या यह एक और महामारी बन सकता है?
- स्वास्थ्य एजेंसियाँ: उपलब्ध साक्ष्य COVID-19 जैसी वैश्विक महामारी की स्थिति नहीं दिखाते
- WHO: व्यापक जनता के लिए कुल जोखिम कम; हंता वायरस मानव-से-मानव आसानी से नहीं फैलता
- यह प्रकोप जूनोटिक रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रमण) और बढ़ती यात्रा/मानव-पशु संपर्क के दौर में तैयारी की अहमियत रेखांकित करता है
- WHO और अन्य एजेंसियाँ: मजबूत निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग, परीक्षण प्रणाली, देशों के बीच समन्वय प्रतिक्रिया को प्रभावी बनाते हैं
🔍 प्रीलिम्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- Hantavirus: कृंतक-जनित वायरस समूह; संक्रमित कृंतक के मूत्र/लार/मल से संक्रमण; इन्फ्लुएंज़ा या SARS‑CoV‑2 की तरह “एयरबोर्न” नहीं
- HPS: Hantavirus Pulmonary Syndrome — गंभीर श्वसन रोग; फेफड़ों को प्रभावित
- HFRS: Haemorrhagic Fever with Renal Syndrome — गुर्दों व रक्तवाहिकाओं को प्रभावित
- Andes Virus: दक्षिण अमेरिका का स्ट्रेन; कुछ मानव-से-मानव संचरण — हंता वायरसों में असामान्य
- MV Hondius: डच अभियान-क्रूज़ जहाज़; 2026 हंता वायरस प्रकोप; 3 मौतें, 8 मामले
- जूनोटिक रोग: पशु → मानव संक्रमण — जैसे हंता वायरस, निपाह, इबोला, COVID-19
- WHO: World Health Organisation — HQ जिनेवा; वैश्विक रोग प्रकोप निगरानी
- CDC: Centers for Disease Control and Prevention (USA); MV Hondius प्रकरण की निगरानी में शामिल
- Incubation Period: हंता वायरस में 1–8 सप्ताह
📝 मेन्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- जूनोटिक खतरा: ज्ञात संक्रामक रोगों के ~60% और उभरते रोगों के ~75% जूनोटिक — हंता वायरस इसी व्यापक खतरे का हिस्सा
- One Health Approach: मानव-स्वास्थ्य, पशु-स्वास्थ्य और पर्यावरण-स्वास्थ्य का एकीकृत दृष्टिकोण — WHO, FAO, OIE इसे बढ़ावा देते हैं
- वैश्विक यात्रा जोखिम: MV Hondius— यात्रियों का Singapore, Switzerland, South Africa, Spain, USA में फैलाव— दिखाता है कि यात्रा प्रकोप जोखिम बढ़ाती है
- वैक्सीन/एंटीवायरल का अभाव: वैश्विक स्वास्थ्य तैयारी की कमी; COVID-विशिष्ट टूल से आगे निवेश की जरूरत
- Surveillance Systems: रियल-टाइम सीमा-पार निगरानी का महत्व; IHR (International Health Regulations) की भूमिका
- भारत की प्रासंगिकता: केरल, तमिलनाडु में हंता वायरस के मामले; निपाह के बाद निगरानी मजबूत; One Health फ्रेमवर्क लागू
🇮🇳 भारत परिप्रेक्ष्य
भारत में केरल और तमिलनाडु में हंता वायरस के मामले रिपोर्ट हुए हैं। बड़े कृषि/वानिकी कार्यबल और कृंतक-आवासों के संपर्क को देखते हुए, भारत को One Health framework के तहत जूनोटिक रोग निगरानी मजबूत करनी होगी। MV Hondius प्रकरण International Health Regulations (IHR) के अंतर्गत त्वरित सीमा-पार सूचना-साझा करने की जरूरत को रेखांकित करता है।
🔑 प्रमुख शब्द
Hantavirus
HPS — Hantavirus Pulmonary Syndrome
HFRS — Haemorrhagic Fever Renal Syndrome
Andes Virus Strain
MV Hondius
Zoonotic Disease
One Health Approach
WHO / CDC
IHR — International Health Regulations
No Vaccine / Antiviral
Rodent-Borne Transmission
✏ संभावित मेन्स प्रश्न
- “जूनोटिक रोग 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य खतरों में से एक हैं।” हंता वायरस और भारत की तैयारी के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (GS-2/GS-3, 250 शब्द)
- One Health approach क्या है? हंता वायरस जैसे उभरते जूनोटिक रोगों के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए। (GS-2, 150 शब्द)
🎯 अभ्यास MCQ
प्रीलिम्स Q
हंता वायरस के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हंता वायरस मुख्यतः कृंतकों में पाए जाते हैं और मनुष्य संक्रमित कृंतक के मूत्र, लार या मल के संपर्क से संक्रमित होता है।
2. हंता वायरस के सभी स्ट्रेन इन्फ्लुएंज़ा या SARS‑CoV‑2 जैसे एयरबोर्न वायरसों की तरह मानव-से-मानव आसानी से फैलते हैं।
3. दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला Andes virus strain कुछ मानव-से-मानव संचरण दिखाता है, जो हंता वायरसों में असामान्य है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
व्याख्या देखें
कथन 1 ✓ — हंता वायरस कृंतक-जनित; संक्रमित कृंतक के मूत्र/लार/मल के संपर्क से संक्रमण, विशेषकर सफाई के दौरान।
कथन 2 ✗ — गलत। WHO ने स्पष्ट कहा है कि हंता वायरस मानव-से-मानव COVID-19/इन्फ्लुएंज़ा की तरह आसानी से नहीं फैलता; इसकी संक्रामकता काफी कम है।
कथन 3 ✓ — Andes strain (South America) में कुछ मानव-से-मानव संचरण (अकसर निकट संपर्क) देखा गया है; MV Hondius प्रकरण इसी स्ट्रेन से जुड़ा था।
उत्तर: (c)
मेन्स Q
“हंता वायरस जैसे जूनोटिक रोग वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए One Health approach की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करते हैं।” परीक्षण कीजिए। (GS-2, 150 शब्द)
📝 उत्तर-रूपरेखा
भूमिका: MV Hondius प्रकोप (मई 2026) — हंता वायरस; 3 मौतें; पहचान से पहले यात्रियों का 5 देशों में फैलाव। सीमा-पार जोखिम का उदाहरण।
जूनोटिक खतरा: ज्ञात रोगों के ~60% जूनोटिक | उभरते रोगों के ~75% जूनोटिक | हंता वायरस, निपाह, इबोला, COVID-19 — सभी जूनोटिक | यात्रा प्रकोप जोखिम बढ़ाती है
One Health: मानव+पशु+पर्यावरण स्वास्थ्य का एकीकरण | WHO, FAO, OIE समर्थन | कृंतक नियंत्रण + स्वच्छता + निगरानी = हंता वायरस रोकथाम
खामियाँ: वैक्सीन/एंटीवायरल का अभाव | सीमा-पार निगरानी चुनौतियाँ | IHR को मजबूत करना होगा
भारत: केरल/तमिलनाडु में मामले | कृषि कार्यबल जोखिम में | One Health लागू | निपाह से सीख उपयोगी
निष्कर्ष: जूनोटिक रोगों के लिए समग्र One Health दृष्टिकोण अनिवार्य; खंडित/साइलो-आधारित प्रतिक्रिया अपर्याप्त।
THE HINDU | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी + अंतरिक्ष + अर्थव्यवस्था
🛰️ भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर क्या है?
लेखक: Jacob Koshy | संदर्भ: Pixxel-Sarvam साझेदारी — भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर “Pathfinder” उपग्रह घोषित, 4 मई 2026
📋 पाठ्यक्रम:
GS-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
GS-3: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था — स्टार्टअप्स
प्रीलिम्स: स्पेस टेक + AI + डेटा
🎯 इसे क्यों पढ़ें? भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर = बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट — प्रीलिम्स में प्रश्न संभावित। Pixxel + Sarvam = भारतीय AI + स्पेस स्टार्टअप सहयोग। स्पेस में एज कंप्यूटिंग, ऑर्बिट में GPU, हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग = टेक टर्म्स। LEO + data gravity + स्पेस में सौर ऊर्जा = GS-3 मेन्स में गहराई। SpaceX, Blue Origin, Microsoft Azure = वैश्विक संदर्भ।
⚡ सार
4 मई 2026 को, बेंगलुरु की इमेजिंग सैटेलाइट कंपनी Pixxel ने भारतीय AI फर्म Sarvam के साथ साझेदारी की घोषणा की — जिसे भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर उपग्रह “Pathfinder” कहा जा रहा है। यह 200 किग्रा श्रेणी का उपग्रह — Q4 2025 तक कक्षा में — ऑर्बिट में GPUs लेकर AI मॉडल को स्पेस में ही ट्रेन/रन करेगा, जिससे Earth observation डेटा को पृथ्वी पर “डाउनलिंक” करने की महँगी समस्या (data gravity) कम होगी।
🔍 ऑर्बिटल डेटा सेंटर क्या है?
- ऐसे उपग्रहों/समूह (constellation) का विचार, जिनमें वही प्रकार के GPUs लगे हों जो धरती के डेटा सेंटर्स में होते हैं
- AI मॉडल का प्रशिक्षण (training) और संचालन (inference) कक्षा में ही संभव, केवल डेटा रिले करना नहीं
- पारंपरिक उपग्रहों के कम-शक्ति “edge” processors की तुलना में अधिक भारी गणना कार्य
- Earth पर edge computing = डेटा जनरेशन के पास ही कंप्यूटिंग; इसी तर्क का अंतरिक्ष में विस्तार = space-based compute
- Earth observation उपग्रह भारी/विस्तृत इमेज फाइलें बनाते हैं — इन्हें डाउनलिंक करना महँगा होता है
- ऑर्बिटल डेटा सेंटर = डेटा को कक्षा में प्रोसेस करें; पृथ्वी पर केवल निष्कर्ष/इंसाइट भेजें — “data gravity” bottleneck हल
🌏 वैश्विक कंपनियाँ अचानक रुचि क्यों दिखा रही हैं?
- पिछले दो वर्षों में 3 कारक साथ आए:
- 1. डेटा सेंटर सीमाएँ: धरती के डेटा सेंटर्स ऊर्जा, भूमि, पानी, और स्थानीय नियमों से सीमित — AI मांग ने दबाव बढ़ाया
- 2. सौर ऊर्जा लाभ: सही कक्षा में सौर ऊर्जा लगभग निरंतर; “मुफ्त बिजली” — स्पेस में कंप्यूटिंग शिफ्ट करने का मजबूत तर्क
- 3. प्रतिस्पर्धी रणनीति: SpaceX CEO Elon Musk ने X (2025) पर कहा — हाई-स्पीड लेज़र लिंक वाले Starlink V3 “काम करेंगे”; SpaceX यह करेगा
- Amazon संस्थापक Jeff Bezos: “अगर हम समीकरण के अन्य हिस्से हल कर लें तो हम चार-पाँच गुना कर सकते हैं” — ऑर्बिटल डेटा सेंटर को समाधान माना
- Blue Origin, Microsoft Azure, Lonestar Data Holdings ने पायलट तैनातियाँ शुरू कीं — पर अभी तक किसी ने व्यावसायिक-स्तर का ऑर्बिटल डेटा सेंटर नहीं बनाया
⚡ चुनौतियाँ क्या हैं?
- Heat management: सौर पैनल से चलने वाले GPU चिप्स गरम होते हैं; स्पेस ठंडा है पर वैक्यूम में convection नहीं — GPUs ऐसे ओवन जैसे हैं जो फैन से गर्मी नहीं निकाल सकते
- समाधान: गर्मी को ammonia-filled loops से deployable radiator panels तक पंप करना — बेहद कठोर वातावरण
- Radiation damage: लंबे मिशनों में “bit flips” — कंप्यूटर डेटा के बिट/बाइट अचानक बदलना; cosmic rays के कारण semiconductor degradation; radiation-hardened chips की जरूरत
- Eclipse अवधि में पावर; रखरखाव लगभग असंभव — शुरुआत से ही redundancy डिज़ाइन करनी होगी
🤝 Pixxel-Sarvam साझेदारी में क्या शामिल है?
- Pathfinder उपग्रह — Pixxel डिज़ाइन/निर्माण/लॉन्च/ऑपरेट करेगा; Sarvam AI backbone देगा (फुल-स्टैक भाषा मॉडल)
- Pixxel का hyperspectral camera उसी प्लेटफ़ॉर्म पर — कक्षा में इमेजरी का विश्लेषण कक्षा में; पृथ्वी पर केवल निष्कर्ष ट्रांसमिट
- Pixxel = 200 kg-class उपग्रह; Q4 2025 में कक्षा के लिए निर्धारित
- सिंगल-सैटेलाइट डेमो — लक्ष्य: ग्राउंड-लेवल हार्डवेयर को LEO के कठोर वातावरण में विश्वसनीय रूप से चलाना
- Pixxel के पास ISRO के साथ काम कर चुके विशेषज्ञ; थर्मल मैनेजमेंट अनुभव
- Sarvam — भारतीय AI फर्म; training + inference दोनों के लिए GPU layer/मॉडल
🔍 प्रीलिम्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- Orbital Data Centre: GPUs वाले उपग्रह जो AI मॉडल कक्षा में train/run करें; भारत का पहला = Pixxel का “Pathfinder”
- Pixxel: बेंगलुरु की इमेजिंग सैटेलाइट स्टार्टअप; hyperspectral इमेजिंग; संस्थापक Awais Ahmed
- Sarvam: भारतीय AI फर्म; फुल-स्टैक भाषा मॉडल; Pathfinder परियोजना में भागीदार
- Pathfinder: भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर उपग्रह; 200 kg-class; Q4 2025; सिंगल-सैटेलाइट डेमो
- Hyperspectral Imaging: कई तरंगदैर्घ्य (wavelengths) में डेटा कैप्चर; कृषि, खनिज मानचित्रण, रक्षा, पर्यावरण निगरानी
- Edge Computing: डेटा-उत्पत्ति के पास कंप्यूटिंग; इसका “स्पेस” संस्करण = ऑर्बिटल डेटा सेंटर
- GPU: AI/ML वर्कलोड के लिए विशेष प्रोसेसर; अब कक्षा में तैनाती
- Data Gravity: कक्षा से पृथ्वी पर भारी डेटा डाउनलिंक करना महँगा; स्पेस प्रोसेसिंग से समाधान
- LEO: Low Earth Orbit ~200–2000 किमी; अधिकतर EO और प्रस्तावित ऑर्बिटल कंप्यूट नोड्स
- Starlink V3: SpaceX की अगली पीढ़ी; हाई-स्पीड लेज़र लिंक; orbital compute नोड के रूप में संभावित
📝 मेन्स हेतु वैल्यू ऐडिशन
- भारत की स्पेस अर्थव्यवस्था: IN-SPACe सुधार (2020) से निजी क्षेत्र के लिए स्पेस खुला; Pixxel उसी का परिणाम; ऑर्बिटल डेटा सेंटर अगली सीमा
- AI + Space का संगम: AI को विशाल compute चाहिए; धरती की बाधाएँ (भूमि/पानी/ऊर्जा/नियम) कंप्यूट को स्पेस की ओर धकेल रहीं; भारत जल्दी पोज़िशनिंग
- Data Sovereignty: भारतीय उपग्रहों में प्रोसेसिंग = डेटा पर भारत का नियंत्रण; रणनीतिक आयाम
- Space Startup Ecosystem: Pixxel (स्पेस) + Sarvam (AI) = उभरता India-first टेक स्टैक
- ISRO-Private Synergy: ISRO अनुभव का निजी क्षेत्र में ट्रांसफर; साझेदारी से संकेत
- प्रतिस्पर्धा: SpaceX, Blue Origin, Azure, Lonestar पहले से सक्रिय; भारत का डेमो = रणनीतिक प्रवेश
- Viksit Bharat + Digital India: स्पेस+AI का मेल; Viksit Bharat 2047 कथा के अनुकूल
🇮🇳 भारत परिप्रेक्ष्य
भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर — Pixxel का Pathfinder (Sarvam के साथ) — भारत के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम (IN-SPACe सुधारों से सक्षम) और AI क्षमताओं के संगम को दर्शाता है। Earth observation डेटा को डाउनलिंक करने के बजाय कक्षा में प्रोसेस कर “data gravity” घटाना, data sovereignty बढ़ाना, और नई स्पेस अर्थव्यवस्था में अग्रिम पोज़िशनिंग — ये सभी Viksit Bharat 2047 दृष्टि के अनुरूप हैं।
🔑 प्रमुख शब्द
Orbital Data Centre
Pixxel
Sarvam
Pathfinder Satellite
Hyperspectral Imaging
Edge Computing in Space
GPU in Orbit
Data Gravity
LEO
IN-SPACe
Starlink V3
Data Sovereignty
Space Startup Ecosystem
✏ संभावित मेन्स प्रश्न
- “भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ऐसा संगम है जिसके रणनीतिक और आर्थिक निहितार्थ हैं।” परीक्षण कीजिए। (GS-3, 250 शब्द)
- भारत का IN-SPACe ढांचा Pixxel जैसे निजी स्पेस स्टार्टअप्स की वृद्धि को कैसे सक्षम बनाता है? भारत की स्पेस अर्थव्यवस्था के लिए इसके महत्व की चर्चा कीजिए। (GS-3, 150 शब्द)
🎯 अभ्यास MCQ
प्रीलिम्स Q
भारत के पहले ऑर्बिटल डेटा सेंटर पहल (2026) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर उपग्रह “Pathfinder” Pixxel (बेंगलुरु की इमेजिंग सैटेलाइट कंपनी) और Sarvam (भारतीय AI फर्म) का सहयोग है।
2. ऑर्बिटल डेटा सेंटर GPUs का उपयोग करके डेटा को कक्षा में प्रोसेस करता है, केवल कच्चा डेटा (raw data) ग्राउंड स्टेशन पर रिले नहीं करता — इससे “data gravity” समस्या हल होती है।
3. ऑर्बिटल डेटा सेंटर की मुख्य ऊर्जा चुनौती यह है कि अंतरिक्ष GPU संचालन के लिए बहुत ठंडा है, इसलिए हीटिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग बाधा है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 1 और 2
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
व्याख्या देखें
कथन 1 ✓ — Pathfinder वास्तव में Pixxel-Sarvam सहयोग है; Pixxel उपग्रह का निर्माण/लॉन्च/ऑपरेशन करेगा; Sarvam AI backbone देगा।
कथन 2 ✓ — ऑर्बिटल डेटा सेंटर GPUs से कक्षा में AI मॉडल run/train कर, EO डेटा का कक्षा में ही विश्लेषण करता है और पृथ्वी पर केवल निष्कर्ष भेजता है — raw भारी डेटा डाउनलिंक की “data gravity” समस्या घटती है।
कथन 3 ✗ — यह गलत और क्लासिक distractor है। चुनौती उलटी है: स्पेस ठंडा है लेकिन वैक्यूम में convection नहीं, इसलिए GPUs की गर्मी निकल नहीं पाती। समस्या heating नहीं, cooling/heat dissipation है — ammonia loops और radiator panels से समाधान।
उत्तर: (b)
मेन्स Q
“भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि उभरती स्पेस अर्थव्यवस्था में रणनीतिक पोज़िशनिंग भी है।” परीक्षण कीजिए। (GS-3, 250 शब्द)
📝 उत्तर-रूपरेखा
भूमिका: 4 मई 2026 — Pixxel-Sarvam ने “Pathfinder” की घोषणा — भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर उपग्रह। यह स्पेस-बेस्ड कंप्यूट में भारत की एंट्री है।
ऑर्बिटल डेटा सेंटर क्या?
• GPUs वाले उपग्रह; AI मॉडल कक्षा में train/run
• “data gravity” हल — भारी EO डेटा का डाउनलिंक महँगा
• स्पेस में प्रोसेसिंग; पृथ्वी पर निष्कर्ष
• सही कक्षा में लगभग निरंतर सौर ऊर्जा = संभावित “मुफ्त बिजली” लाभ
तकनीकी महत्व:
• Hyperspectral imagery + ऑन-ऑर्बिट AI = रियल-टाइम actionable intelligence
• स्पेस+AI का संगम; पहले डेमो, फिर constellations की संभावना
रणनीतिक महत्व:
• Data sovereignty — भारतीय उपग्रहों में प्रोसेसिंग से नियंत्रण
• Early mover advantage — SpaceX/Blue Origin/Azure रुचि; अभी commercial-scale नहीं
• IN-SPACe (2020) सुधारों से निजी क्षेत्र सक्षम; India-first stack का निर्माण
• ISRO ज्ञान का निजी क्षेत्र में प्रभावी उपयोग
आर्थिक महत्व:
• भारत की स्पेस अर्थव्यवस्था लक्ष्य: $44B by 2033
• ऑर्बिटल डेटा सेंटर = नए सर्विस/कंप्यूट लेयर का बाजार
• Viksit Bharat 2047 में स्पेस+AI संगति
निष्कर्ष: Pathfinder केवल एक उपग्रह नहीं; यह उभरती स्पेस-कंप्यूट अर्थव्यवस्था में भारत का रणनीतिक संकेत है।
⚡ त्वरित पुनरावृत्ति — सभी 3 संपादकीय
| विषय | मूल मुद्दा | मुख्य शब्द | पाठ्यक्रम |
| ⚖️ त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल |
तमिलनाडु 2026 — राज्यपाल Arlekar ने TVK के Vijay को शपथ से रोका; Sarkaria प्राथमिकता क्रम; फ्लोर टेस्ट = एकमात्र वस्तुनिष्ठ परीक्षण; SR Bommai; “लोक भवन नहीं, सदन ही लोकतंत्र का कार्य-क्षेत्र” |
Article 164, 174(2)(b), 356; Floor Test; Sarkaria Commission; SR Bommai 1994; BK Kapur 2001; Rameshwar Prasad 2006; Punchhi Commission |
GS-2 राजव्यवस्था + संवैधानिक कानून |
| 🦠 हंता वायरस |
MV Hondius प्रकोप — 3 मौतें; कृंतक-जनित; COVID-19 की तरह एयरबोर्न नहीं; Andes स्ट्रेन में सीमित मानव-से-मानव; वैक्सीन/एंटीवायरल नहीं; सपोर्टिव केयर; महामारी-जोखिम कम |
Hantavirus, HPS, HFRS, Andes Virus, MV Hondius, Zoonotic Disease, One Health, WHO, IHR, No Vaccine |
GS-2 स्वास्थ्य + GS-3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी |
| 🛰️ ऑर्बिटल डेटा सेंटर |
Pixxel-Sarvam “Pathfinder” — भारत का पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर; ऑर्बिट में GPUs; स्पेस में EO डेटा प्रोसेस; data gravity हल; सौर ऊर्जा लाभ; heat management चुनौती; IN-SPACe से सक्षम |
Orbital Data Centre, Pixxel, Sarvam, Pathfinder, GPU in Orbit, Data Gravity, Hyperspectral Imaging, Edge Computing, LEO, IN-SPACe, Data Sovereignty |
GS-3 स्पेस टेक + AI + अर्थव्यवस्था |