The Hindu Editorial Today in Hindi 28 August 2026
UPSC सिविल सेवा & State PCS | The Hindu संपादकीय विश्लेषण (28 August 2026)
GS Paper II भारतीय राजव्यवस्था व संविधान संघवाद व परिसीमन

543 को 543 ही क्यों रहना चाहिए? लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद और संघीय संतुलन का विश्लेषण

Prelims: अनुच्छेद 81 व 82 Mains: संघीय संतुलन व परिसीमन State PCS: संवैधानिक संशोधन
1 संवैधानिक विकास: जनसंख्या गणना बनाम संघीय अनुबंध

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी के मुख्य संवैधानिक तर्क

  • अंकगणित से परे संविधान: यद्यपि अनुच्छेद 81 जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व का निर्देश देता है, लेकिन संसद ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन लक्ष्यों की रक्षा हेतु दो बार इस अंकगणितीय नियम को निलंबित किया है।
  • ऐतिहासिक फ्रीज: 42वें संशोधन (1976) ने 1971 की जनगणना के आधार पर अंतर-राज्यीय सीटों के आवंटन को फ्रीज किया था। 84वें संशोधन (2001) ने इसे 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ा दिया ताकि दक्षिणी राज्यों को नुकसान न हो।
  • अनुपात का भ्रम: वर्तमान लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद में यदि सीटों को 50% बढ़ाया जाए (उदा. यूपी 80 से 120, तमिलनाडु 39 से 59), तो गणितीय अनुपात समान रहने पर भी अधिक जनसंख्या वाले राज्यों का कुल वर्चस्व बढ़ जाएगा (सीटों का अंतर 40 से बढ़कर 61 हो जाएगा)।
  • महिला आरक्षण का संदर्भ: महिलाओं के लिए 1/3 संवैधानिक आरक्षण (~181 सीटें) को लागू करने के लिए सदन का विस्तार करना आवश्यक नहीं है; इसे 543 सीटों की वर्तमान संरचना में ही आसानी से समायोजित किया जा सकता है।
1976: 42वां संविधान संशोधन

परिवार नियोजन नीतियों को सफल बनाने वाले राज्यों के संरक्षण हेतु 1971 की जनगणना पर 543 सीटों को फ्रीज किया गया।

2001: 84वां और 87वां संशोधन

राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की अनुमति दी गई, लेकिन कुल 543 सीटों के फ्रीज को 2026 तक बढ़ाया गया।

2026 के बाद का मार्ग:

राज्यों की सीटों को बदले बिना 2027 की जनगणना के आधार पर केवल राज्य के भीतर आंतरिक परिसीमन करना।

2 अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण और संसदीय विचार-विमर्श की गुणवत्ता में गिरावट

वैश्विक संसदों में सदस्य सीमा

जनसंख्या वृद्धि के साथ संसद का विस्तार करना अनिवार्य लोकतांत्रिक नियम नहीं है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा 1911 से 435 सदस्यों पर स्थिर है; स्विट्जरलैंड 1963 से 200 सदस्यों पर है। इटली ने अपने चैंबर को 630 से घटाकर 400 और हंगरी ने 386 से घटाकर 199 कर दिया है।

संसदीय विमर्श का ह्रास

संसद का समय असीमित नहीं है। 800+ सांसदों वाले सदन में सांसदों को बोलने का समय, प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछने का अवसर और कार्यपालिका की जवाबदेही तय करने की क्षमता अत्यधिक घट जाएगी।

3 कुरैशी का सुधार फॉर्मूला: 543 सीटें बरकरार रखें और विधानसभाओं का विस्तार करें

1. 543 सीटें बरकरार रखें

लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद में राज्यों के बीच संघीय विश्वास को बनाए रखने के लिए 543 सीटों की सीमा को अपरिवर्तित रखें।

2. आंतरिक पुनर्गठन

2027 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके केवल राज्य के भीतर शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों के असंतुलन को दूर करें।

3. विधानसभाओं का विस्तार

जनता तक जनप्रतिनिधियों की सुलभता बढ़ाने के लिए संसद के बजाय राज्य विधानसभाओं (Vidhan Sabhas) की सीटें बढ़ाएं।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q1. परिसीमन और लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद के संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत संसद प्रत्येक जनगणना के बाद एक परिसीमन अधिनियम पारित करती है।
2. 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने वर्ष 2026 के बाद की जाने वाली पहली जनगणना तक लोकसभा में सीटों के आवंटन को फ्रीज कर दिया।
3. भारतीय संविधान यह अनिवार्य करता है कि जनसंख्या वृद्धि होने पर लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटों में स्वतः वृद्धि होनी चाहिए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि संसद के पास व्यापक राष्ट्रीय हित में सीटों के पुनर्समायोजन को फ्रीज करने का पूर्ण अधिकार है (जैसा कि 42वें और 84वें संशोधनों में किया गया)। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2012 (वास्तविक PYQ)
Q. परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. जब परिसीमन आयोग के आदेश लोकसभा या राज्य विधानसभा के समक्ष रखे जाते हैं, तो वे उनमें कोई संशोधन नहीं कर सकते।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1    B) केवल 2    C) 1 और 2 दोनों    D) न तो 1, न ही 2
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2
  • C) 1 और 2 दोनों
  • D) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों

अनुच्छेद 329 के तहत परिसीमन आयोग के आदेशों को कानून का दर्जा प्राप्त होता है; इन्हें न तो अदालत में चुनौती दी जा सकती है और न ही विधायिकाओं द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

🏆 UPPSC PCS Prelims 2021 (वास्तविक PYQ)
Q. किस संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन को वर्ष 2026 तक फ्रीज किया गया था?

A) 84वां संशोधन    B) 86वां संशोधन    C) 91वां संशोधन    D) 92वां संशोधन
  • A) 84वां संशोधन
  • B) 86वां संशोधन
  • C) 91वां संशोधन
  • D) 92वां संशोधन
सही उत्तर: A — 84वां संशोधन

84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा तथा विधानसभा सीटों के आवंटन को वर्ष 2026 तक फ्रीज कर दिया था।

UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper II (वास्तविक PYQ)

“वर्ष 2026 के बाद परिसीमन की कवायद भारतीय संघवाद के लिए बुनियादी चुनौतियां खड़ी करती है। लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संघीय न्याय के बीच अंतर्विरोधों की विवेचना कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“संवैधानिक प्रतिनिधित्व को केवल अंकगणित तक सीमित नहीं किया जा सकता। लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद के आलोक में संघीय सामंजस्य पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद 'एक व्यक्ति, एक मत' (अनुच्छेद 81) और जनसंख्या स्थिरीकरण करने वाले राज्यों के संघीय न्याय के बीच संतुलन का परीक्षण है।
  • विस्तार की विसंगतियां: 543 से अधिक सीटें बढ़ाने से उत्तरी राज्यों का पूर्ण राजनीतिक दबदबा बढ़ेगा, जिससे जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक शक्ति घटेगी।
  • संसदीय दक्षता: 800 से अधिक सांसदों वाले सदन में विमर्श का समय घटेगा और संसदीय समितियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी।
  • समाधान: 543 सीटों की सीमा बनाए रखें, 2027 की जनगणना पर राज्यों के भीतर आंतरिक परिसीमन करें और स्थानीय प्रतिनिधित्व हेतु विधानसभाओं का विस्तार करें।
परिसीमन आयोग अनुच्छेद 81 व 82 संघीय ढांचा 84वां संशोधन
GS Paper I & III भौतिक भूगोल आपदा प्रबंधन व जलवायु परिवर्तन

ऊंचाई से खतरा: हिमालयी हिमनद झील विस्फोट बाढ़ के जोखिम और आपदा पूर्व-तैयारी का समग्र विश्लेषण

Prelims: हिमनद भू-आकृतियां Mains: GLOF पूर्व चेतावनी प्रणाली State PCS: हिमालयी पारिस्थितिकी
1 सीमा-पार कारक: तिब्बत हिमस्खलन और नेपाल गलियारे में तबाही

अगस्त 2026 नेपाल आपदा का भूवैज्ञानिक विश्लेषण

  • आपदा: तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में भीषण हिमालयी हिमनद झील विस्फोट बाढ़ की घटना में 359 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई और 300+ भारतीय लापता हो गए।
  • कारण श्रृंखला: इसरो (ISRO) के उपग्रह आंकड़ों से पुष्टि हुई कि तिब्बत में हिमनद-चट्टान हिमस्खलन ने नदी को अस्थायी रूप से अवरुद्ध कर दिया था, जिसके अचानक टूटने से विनाशकारी बाढ़ आई।
  • बुनियादी ढांचे की क्षति: भोटे कोशी और त्रिशूली गलियारों में 35 मोटर वाहन पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर से अधिक राजमार्ग बह गए।
  • जटिल खतरा: तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) और मानसूनी हवाओं के आपस में टकराने से हुई मूसलाधार बारिश ने बाढ़ की तीव्रता को कई गुना बढ़ा दिया।
7,500 झीलें
भारतीय हिमालय में हिमनद झीलें
15,000
हिमालय में स्थित हिमनद
जुलाई–सितंबर
प्रत्यक्ष जमीनी अभियान की अवधि
2 सिक्किम ल्होनक झील (2023) से 2026: अनसुलझी कमजोरियाँ
आपदा पैरामीटर सिक्किम दक्षिण ल्होनक झील (अक्टूबर 2023) नेपाल भोटे कोशी आपदा (अगस्त 2026)
प्राथमिक कारण हिमस्खलन से मोरेन (हिमोढ़) तटबंध का टूटना तिब्बत में बर्फ-चट्टान का गिरना व मलबे के बांध का टूटना
प्रमुख क्षति तीस्ता-III बांध नष्ट; चुंगथांग जलमग्न त्रिशूली जलविद्युत परियोजनाएं व सड़कें ध्वस्त
निगरानी अंतर खराब मौसम के कारण रिमोट सेंसर बंद सीमा-पार जलविज्ञानीय डेटा साझाकरण में देरी
3 हिमालयी सुरक्षा हेतु 4-स्तरीय कार्ययोजना

1. स्वचालित रडार सेंसर

हिमालयी हिमनद झील विस्फोट बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील उच्च-जोखिम वाली झीलों पर स्वचालित जल स्तर सेंसर लगाना।

2. नियंत्रित जल निकासी

मानसून से पहले साइफन पाइपों और सुरंगों के माध्यम से खतरनाक झीलों के जल स्तर को नियंत्रित रूप से घटाना।

3. बांध सुरक्षा कानून

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत निचले इलाकों में स्वचालित अलार्म और स्पिलवे सुरक्षा मानकों को लागू करना।

4. सीमा-पार डेटा विनिमय

भारत, नेपाल, भूटान और चीन के बीच वास्तविक समय (Real-time) में हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने की व्यवस्था बनाना।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q2. हिमालयी हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) और हिमालयी भू-आकृति विज्ञान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. पिघलते हिमनदों द्वारा छोड़े गए हिमोढ़ (Moraine) के मलबे द्वारा जल रुकने से हिमनद झीलों का निर्माण होता है।
2. दक्षिण ल्होनक झील, जिसने 2023 में विनाशकारी GLOF आपदा उत्पन्न की थी, उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
3. बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 भारत में निर्दिष्ट बांधों के नियमित निरीक्षण और रखरखाव का प्रावधान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 1 और 3
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

कथन 2 गलत है क्योंकि दक्षिण ल्होनक झील सिक्किम में स्थित है (उत्तराखंड में नहीं)। कथन 1 और 3 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (वास्तविक PYQ)
Q. सियाचिन हिमनद कहाँ स्थित है?

A) अक्साई चिन के पूर्व में    B) लेह के पूर्व में
C) गिलगित के उत्तर में    D) नुब्रा घाटी के उत्तर में
  • A) अक्साई चिन के पूर्व में
  • B) लेह के पूर्व में
  • C) गिलगित के उत्तर में
  • D) नुब्रा घाटी के उत्तर में
सही उत्तर: D — नुब्रा घाटी के उत्तर में

सियाचिन हिमनद पूर्वी काराकोरम श्रेणी में लद्दाख की नुब्रा घाटी के ठीक उत्तर में स्थित है।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)

“हिमालयी क्षेत्र में हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOFs) के कारणों और परिणामों को स्पष्ट कीजिए। इसके शमन के उपाय सुझाइए।” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“जलवायु परिवर्तन हिंदू कुश हिमालय की क्रायोस्फेरिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को तीव्र कर रहा है। चर्चा कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: तापमान वृद्धि से हिमनद तेजी से पीछे हट रहे हैं, जिससे हिमालयी हिमनद झील विस्फोट बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं।
  • कारण: बर्फ-चट्टान हिमस्खलन, पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना, तीव्र पश्चिमी विक्षोभ और भूकंपीय गतिविधियाँ।
  • प्रभाव: जलविद्युत बांधों, सीमावर्ती बुनियादी ढांचे, राजमार्गों और मानव बस्तियों का व्यापक विनाश।
  • शमन रणनीतियाँ: स्वचालित सेंसर नेटवर्क, पूर्व-मानसून जल स्तर में कमी, सख्त ज़ोनिंग नियम और सीमा-पार सूचना तंत्र।
GLOF गतिशीलता हिमालयी हिमनद बांध सुरक्षा कानून पूर्व चेतावनी प्रणाली
GS Paper III आर्थिक बुनियादी ढांचा ऊर्जा सुरक्षा

क्या भारत एक रणनीतिक ईंधन प्रणाली बना सकता है? भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली और भविष्य की दिशा

Prelims: ISPRL भंडारण स्थल Mains: समुद्री व भू-राजनीतिक सुरक्षा State PCS: ढांचागत योजनाएं
1 वर्तमान स्थिति: कच्चे तेल का SPR बनाम गैस व LPG भंडारण की कमी

भारत की सामरिक ईंधन भंडारण स्थिति (2026)

  • कच्चा तेल प्रथम चरण: विशाखापत्तनम (1.33 MMT), मंगलुरु (1.5 MMT) और पादुर (2.5 MMT) में 5.33 MMT की भूमिगत रॉक कैवर्न क्षमता है (~64% उपयोग में है)।
  • द्वितीय चरण विस्तार: चांदीखोल (ओडिशा - 4 MMT) और पादुर (कर्नाटक - 2.5 MMT) में 6.5 MMT की अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक क्षमता को मंजूरी दी गई है।
  • गैस भंडारण में भारी कमी: कच्चे तेल के बावजूद, भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली में भूमिगत प्राकृतिक गैस (LNG) का परिचालन भंडारण शून्य है और केवल 2 भूमिगत LPG कैवर्न मौजूद हैं।
  • प्रस्तावित 10-वर्षीय योजना: 28 MMT कच्चा तेल, 9 MMT LNG और 4 MMT LPG जोड़कर लगभग 2 महीने के तेल/गैस और 6 सप्ताह के रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित करने का लक्ष्य है।
ईंधन श्रेणी वर्तमान सामरिक भंडार प्रस्तावित विस्तार लक्ष्य प्रमुख परिचालन चुनौती
कच्चा तेल (Crude) 5.33 MMT (चरण I) + 6.5 MMT (चरण II स्वीकृत) +28 MMT (~2 माह की मांग) उच्च वाणिज्यिक लागत और इन्वेंटरी होल्डिंग का वित्तीय भार।
प्राकृतिक गैस (LNG) भूमिगत भंडार शून्य; केवल आयात टर्मिनल टैंक +9 MMT (~20 दिन की मांग) खाली गैस क्षेत्रों में कैप-रॉक स्थिरता और कुशन गैस की आवश्यकता।
रसोई गैस (LPG) 2 भूमिगत कैवर्न (विशाखापत्तनम व मंगलुरु) +4 MMT (~6 सप्ताह की मांग) आंतरिक बॉटलिंग संयंत्रों तक पाइपलाइन कनेक्टिविटी का अभाव।
2 समुद्री चोकपॉइंट्स, शिपिंग जेवी और पाइपलाइन नेटवर्क

$2B का शिपिंग संयुक्त उद्यम

होर्मुज और लाल सागर संकट के समय विदेशी जहाजों पर निर्भरता घटाने के लिए सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL) और भारतीय नौवहन निगम (SCI) 59 तेल व गैस टैंकर खरीदने हेतु $1.5B–$2B का निवेश कर रहे हैं।

PNGRB 1,800 किमी LPG पाइपलाइन

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) ने 6 राज्यों में $700 मिलियन की लागत से 1,800 किमी नई LPG पाइपलाइनों को मंजूरी दी है ताकि सड़क मार्ग के बजाय सुरक्षित पाइपलाइन से आपूर्ति हो सके।

3 भूवैज्ञानिक संभावनाएं और वित्तीय संरचना

1. भूवैज्ञानिक अध्ययन

कृष्णा-गोदावरी, कैम्बे और राजस्थान बेसिन के खाली तेल-गैस क्षेत्रों का मूल्यांकन करके भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली का निर्माण करना।

2. पीपीपी मॉडल

अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) जैसी वैश्विक कंपनियों को भंडारण स्थान पट्टे पर देकर लागत कम करने वाला हाइब्रिड मॉडल अपनाना।

3. निकासी नीति

अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव और वास्तविक युद्धकालीन आपूर्ति संकट में अंतर करने वाले स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करना।

मजबूत भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली वैश्विक अस्थिरता के समय देश की आर्थिक संप्रभुता की ढाल बनेगी।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q3. भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली और भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (ISPRL) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. ISPRL पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेष प्रयोजन संस्था (SPV) है।
2. प्रथम चरण के तहत कच्चे तेल के भूमिगत भंडारण केंद्र विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थापित किए गए हैं।
3. भारत वर्तमान में भूमिगत खाली गैस क्षेत्रों में 30 दिनों से अधिक की रणनीतिक प्राकृतिक गैस का भंडार बनाए हुए है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि भारत के पास वर्तमान में शून्य परिचालन भूमिगत रणनीतिक प्राकृतिक गैस भंडारण है। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2016 (वास्तविक PYQ)
Q. सरकार की 'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना' और 'स्वर्ण मुद्रीकरण योजना' का/के क्या उद्देश्य है/हैं?

1. निष्क्रिय पड़े स्वर्ण को अर्थव्यवस्था में लाना।
2. स्वर्ण आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1    B) केवल 2    C) 1 और 2 दोनों    D) न तो 1, न ही 2
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2
  • C) 1 और 2 दोनों
  • D) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों

दोनों योजनाओं का उद्देश्य घरेलू सोने को वित्तीय प्रणाली में शामिल कर आयात बिल को कम करना है।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)

“वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPRs) की महत्वपूर्ण भूमिका का परीक्षण कीजिए।” (10 अंक | 150 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“एक रणनीतिक ईंधन प्रणाली का निर्माण केवल भंडारण गुहाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल रसद और वित्तीय संरचना है। विवेचना कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री चोकपॉइंट्स के जोखिम के कारण भारत की रणनीतिक ईंधन भंडार प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में है।
  • गैस व रसोई गैस की महत्ता: उज्ज्वला योजना और स्वच्छ ईंधन के बढ़ते उपयोग के कारण केवल कच्चे तेल के बजाय LNG और LPG भंडारण को बढ़ाना अनिवार्य है।
  • रसद की चुनौतियाँ: बिना पर्याप्त पाइपलाइन, समर्पित जहाजों और पुनर्गैसीकरण संयंत्रों के आपातकाल में भंडार का त्वरित उपयोग असंभव है।
  • आगे की राह: SPR चरण-II को गति देना, खाली गैस क्षेत्रों को भंडारण के रूप में विकसित करना और घरेलू शिपिंग बेड़े का विस्तार करना।
ऊर्जा सुरक्षा ISPRL सामरिक गैस भंडारण भू-राजनीतिक जोखिम

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (28 August 2026 FAQs)

1. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी लोकसभा सीटों को 543 पर स्थिर रखने का समर्थन क्यों करते हैं?
सीटें बढ़ाना परिवार नियोजन में सफल दक्षिणी राज्यों को दंडित करता है, संघवाद को असंतुलित करता है और संसद की विधायी गुणवत्ता को कमजोर करता है।
2. अगस्त 2026 में नेपाल-हिमालयी गलियारों में आई अचानक बाढ़ का प्राथमिक भूवैज्ञानिक कारण क्या था?
तिब्बत में हिमनद-चट्टान हिमस्खलन ने मलबे का कृत्रिम बांध बनाया, जो भारी मानसूनी वर्षा के कारण अचानक टूट गया और विनाशकारी बाढ़ आई।
3. भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) चरण-I की कुल भंडारण क्षमता कितनी है?
विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में भूमिगत रॉक कैवर्न में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की भंडारण क्षमता स्थापित है।
4. लोकसभा में अंतर-राज्यीय सीट आवंटन को किन संवैधानिक संशोधनों द्वारा फ्रीज किया गया था?
42वें संशोधन (1976) ने 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को फ्रीज किया, और 84वें संशोधन (2001) ने इसे 2026 के बाद तक बढ़ा दिया।
5. भारत के रणनीतिक प्राकृतिक गैस भंडारण में मुख्य ढांचागत कमी क्या है?
कच्चे तेल के भंडार मौजूद हैं, लेकिन भारत में भूमिगत प्राकृतिक गैस (LNG) का कोई भी परिचालन सामरिक भंडारण केंद्र वर्तमान में नहीं है।
प्रस्तुति: Todays Current Affairs | UPSC सिविल सेवा एवं State PCS संपादकीय विश्लेषण (28 August 2026)
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