उत्पत्ति, संदर्भ और वैश्विक पहचान
- ऐतिहासिक मील का पत्थर: 23 अगस्त 2026 को बाल्टिक वे और गांधीवादी अहिंसक आंदोलन की 37वीं वर्षगांठ मनाई गई, जिसमें 20 लाख लोगों ने हाथ से हाथ मिलाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज किया था।
- 675 किमी लंबी मानव श्रृंखला: तेलिन (एस्तोनिया), रीगा (लातविया) और विलनियस (लिथुआनिया) को जोड़ने वाली इस श्रृंखला का आयोजन 1939 के मोलोटोव-रिबनट्रॉप पैक्ट (नाजी-सोवियत गुप्त समझौता जिसके तहत 1940 में सोवियत संघ ने बाल्टिक देशों को हड़प लिया था) के 50 वर्ष पूरे होने पर किया गया था।
- सिंगिंग रेवोल्यूशन (1986–91): मिखाइल गोर्बाचेव के पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त के दौर में सांस्कृतिक गायन परंपरा और सत्याग्रह के दम पर 1990-91 में बाल्टिक देशों ने शांतिपूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की।
- यूनेस्को मान्यता: यह विशाल मानव श्रृंखला यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड' रजिस्टर में शामिल है और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
नैतिक शक्ति की विजय
सोवियत सेना का सामना करते समय लिथुआनियाई राष्ट्रीय टीवी पर रिचर्ड एटनबरो की 1982 की फिल्म गांधी का 24 घंटे प्रसारण किया गया। प्रसिद्ध विचारिका प्रो. ग्राज़िना मिनियोताइट ने स्वीकार किया कि गांधीजी ने सिद्ध किया कि नैतिक शक्ति सैन्य बल से अधिक शक्तिशाली है।
दार्शनिक सेतु
गांधीजी के दक्षिण अफ्रीकी साथी हरमन कालेनबाख (लिथुआनियाई मूल के), दार्शनिक विदुनास, यात्री अंतानास पोश्का और अनुवादक लिनार्ट मॉल ने भारत और बाल्टिक देशों के बीच स्थायी बौद्धिक संबंध स्थापित किए।
1. व्यापारिक वृद्धि
वर्ष 2025-26 में भारत का द्विपक्षीय व्यापार लिथुआनिया ($490.61M), लातविया ($475.66M) और एस्तोनिया ($219.69M) के साथ उच्च स्तर पर पहुंचा।
2. सांस्कृतिक कूटनीति
लातविया (2019) और एस्तोनिया (2025) में स्थापित गांधी प्रतिमाएं बाल्टिक वे और गांधीवादी अहिंसक आंदोलन के साझा इतिहास को जीवंत रखती हैं।
3. नियम आधारित विश्व व्यवस्था
अधिनायकवाद के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष की साझा विरासत आज भारत-बाल्टिक रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग का आधार बन चुकी है।
बाल्टिक वे और गांधीवादी अहिंसक आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति आज भी वैश्विक लोकतांत्रिक आंदोलनों को प्रेरित कर रही है।
1. बाल्टिक वे (1989) का आयोजन मोलोटोव-रिबनट्रॉप पैक्ट की 50वीं वर्षगांठ पर किया गया था।
2. मोलोटोव-रिबनट्रॉप पैक्ट नाजी जर्मनी और सोवियत संघ के बीच एक गैर-आक्रमण समझौता था, जिसमें पूर्वी यूरोप को बांटने का गुप्त प्रोटोकॉल शामिल था।
3. एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद 1945 में अपनी पहली स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि बाल्टिक देशों ने अपनी प्रारंभिक स्वतंत्रता 1918 में प्राप्त की थी (1945 में नहीं), जिसके बाद 1940 में सोवियत संघ ने उन पर कब्जा कर लिया था। कथन 1 और 2 सही हैं।
A) राष्ट्रीय आंदोलन में वकीलों, छात्रों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
B) राष्ट्रीय आंदोलन में दलित और जनजातीय समुदायों का सक्रिय जुड़ाव
C) भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में किसान असंतोष का प्रत्यक्ष समावेश
D) रोपण फसलों और वाणिज्यिक फसलों की खेती में भारी कमी
सही उत्तर: C — किसान असंतोष का राष्ट्रीय आंदोलन में समावेश
1917 का चंपारण सत्याग्रह भारत में गांधीवादी सत्याग्रह का पहला सफल प्रयोग था, जिसने किसान समस्याओं को सीधे स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper IV / Ethics (वास्तविक PYQ)
Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)
मुख्य उत्तर बिंदु
- प्रस्तावना: बाल्टिक वे और गांधीवादी अहिंसक आंदोलन यह प्रमाणित करता है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नैतिक मूल्य सीमाओं को पार कर अधिनायकवाद के विरुद्ध प्रभावी अस्त्र बने।
- अहिंसक शक्ति के तत्व: सिंगिंग रेवोल्यूशन, 675 किमी मानव श्रृंखला, सोवियत शासन से असहयोग और सैन्य ताकत के स्थान पर नैतिक औचित्य का उपयोग।
- बौद्धिक प्रसार: हरमन कालेनबाख की मित्रता, गांधीवादी ग्रंथों के अनुवाद और जनसंचार के जरिए गांधीवादी सिद्धांतों का प्रचार।
- समकालीन प्रासंगिकता: लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, शांतिपूर्ण जन प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सॉफ्ट पावर के रूप में गांधीवाद का महत्व।