The Hindu Editorial Today in Hindi 18 September 2026
UPSC & State PSC | The Hindu दैनिक संपादकीय विश्लेषण (18 September 2026)
GS Paper II अंतर्राष्ट्रीय संबंध द्विपक्षीय व बहुपक्षीय समूह

विमर्श: क्या ब्रिक्स सम्मेलन भारतीय विदेश नीति में बदलाव का संकेत है? ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता

Prelims: नई दिल्ली घोषणापत्र, स्थानीय मुद्रा निपटान, UNSCR 2803 Mains: सामरिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण & ग्लोबल साउथ State PSC: अंतर्राष्ट्रीय समसामयिकी
1 सामरिक परिप्रेक्ष्य: गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण तक

अजय बिसारिया एवं हैपीमोन जैकब के प्रमुख विचार

  • व्यावहारिक बहु-संरेखण (Multi-alignment): अजय बिसारिया के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता यह प्रमाणित करती है कि भारत पश्चिमी गठबंधनों को प्रभावित किए बिना गैर-पश्चिमी मंचों पर अपनी स्वतंत्र भूमिका निभा रहा है।
  • पुरानी गुटनिरपेक्षता से भिन्न: हैपीमोन जैकब का तर्क है कि द्विध्रुवीय विश्व में गुटनिरपेक्षता कमजोर देशों की रक्षात्मक रणनीति थी, जबकि वर्तमान बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत स्वयं एक स्वतंत्र ध्रुव (Pole) के रूप में उभर रहा है।
  • प्रतीकात्मकता बनाम यथार्थ: मोदी-शी-पुतिन की मुलाकातें वैश्विक संदेश देती हैं, लेकिन भारत के हित द्विपक्षीय यथार्थ और राष्ट्रीय सुरक्षा में गहराई से निहित हैं।
  • डी-डॉलरीकरण की सीमाएं: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन करते हुए भी भारत एकल ब्रिक्स मुद्रा का विरोध करता है ताकि चीनी युआन के प्रभुत्व को रोका जा सके।
40%
वैश्विक अर्थव्यवस्था हिस्सा (BRICS+)
25%
वैश्विक व्यापार हिस्सेदारी
D10 सेतु
G7 और ग्लोबल साउथ का समन्वय
2 नई दिल्ली घोषणापत्र के प्रमुख कूटनीतिक संतुलन
मुद्दा / आयाम घोषणापत्र का रुख भारत का सामरिक दृष्टिकोण
यूक्रेन संघर्ष आम सहमति न बनने / रूस की संवेदनशीलता के कारण प्रत्यक्ष उल्लेख से परहेज। बहुपक्षीय गतिरोध को टालना और द्विपक्षीय तटस्थता एवं शांति वार्ता का समर्थन।
पश्चिम एशिया व गाजा नागरिक सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 के तहत प्रतिबद्धता। इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग और अरब जगत के साथ पारंपरिक द्वि-राष्ट्र समाधान का संतुलन।
वित्तीय निपटान तंत्र एकल मुद्रा के स्थान पर स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का समर्थन। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता के माध्यम से द्वितीयक प्रतिबंधों से बचना और युआन निर्भरता रोकना।
3 G7 एवं ग्लोबल साउथ के मध्य सेतु के रूप में भारत

G7 के विकल्प के रूप में ब्रिक्स

ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है। भारत G7 (संभावित D10) और विकासशील देशों के मध्य एक पुल के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करता है।

चयनात्मक बहुपक्षवाद

अमूर्त वैचारिक बहसों के बजाय भारत एआई मानक, अंतरिक्ष शासन और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन जैसे व्यावहारिक विषयों को प्राथमिकता देता है।

इस शिखर सम्मेलन का सार यह है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता भारत की सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ एक साथ संवाद करने की विशिष्ट क्षमता को दर्शाती है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q1. ब्रिक्स (BRICS) समूह एवं इसकी वित्तीय पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में इसके संस्थापक सदस्यों के बीच वीटो शक्ति के बिना समान मताधिकार प्रणाली लागू है।
2. आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (CRA) अल्पकालिक वैश्विक भुगतान संतुलन (BoP) दबावों के विरुद्ध तरलता सहायता प्रदान करती है।
3. ब्रिक्स सदस्य देशों ने अमेरिकी डॉलर के स्थान पर सभी आपसी व्यापार हेतु एक अनिवार्य साझा मुद्रा (Single Currency) आधिकारिक रूप से लागू कर दी है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि ब्रिक्स देशों ने एकल मुद्रा जारी नहीं की है, बल्कि स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का समर्थन किया है। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2015 (वास्तविक प्रश्न)
Q. समाचारों में आने वाला 'फोर्टालेजा घोषणापत्र' (Fortaleza Declaration) निम्नलिखित में से किस संगठन के मामलों से संबंधित है?

A) ब्रिक्स (BRICS)
B) आसियान (ASEAN)
C) ओईसीडी (OECD)
D) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
  • A) ब्रिक्स (BRICS)
  • B) आसियान (ASEAN)
  • C) ओईसीडी (OECD)
  • D) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
सही उत्तर: A — ब्रिक्स (BRICS)

2014 में ब्राजील में आयोजित फोर्टालेजा शिखर सम्मेलन में NDB और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (CRA) की स्थापना की गई थी।

UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper II (वास्तविक प्रश्न)

“ब्रिक्स समूह का विस्तार बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए ग्लोबल साउथ की खोज को दर्शाता है। परस्पर विरोधी भू-राजनीतिक हितों के बीच भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता को कैसे संतुलित करता है?” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“क्या ब्रिक्स में भारत की सक्रिय सहभागिता पुरानी गुटनिरपेक्षता की ओर वापसी का संकेत देती है या यह बहु-संरेखण की सामरिक स्वायत्तता की परिपक्व अभिव्यक्ति है? समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।”
प्रमुख उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता भारत के गतिशील बहु-संरेखण को कैसे प्रदर्शित करती है, इसका उल्लेख।
  • गुटनिरपेक्षता से अंतर: वैश्विक नियम निर्माता (Rule-maker) के रूप में भागीदारी, क्वाड, ब्रिक्स, एससीओ तथा I2U2 में एक साथ सक्रिय संतुलन।
  • सामरिक चुनौतियाँ: पश्चिम-विरोधी बयानबाजी से दूरी, चीनी युआन के वर्चस्व का प्रतिकार और सीमा सुरक्षा हित।
  • निष्कर्ष: G7 एवं ग्लोबल साउथ के मध्य सेतु के रूप में 'विश्व मित्र' की भूमिका को रेखांकित करना।
ब्रिक्स 2026 सामरिक स्वायत्तता बहु-संरेखण ग्लोबल साउथ
GS Paper III भारतीय अर्थव्यवस्था व बैंकिंग डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

जटिल प्राथमिकताएं: यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था

Prelims: MDR शुल्क, NPCI, जीरो-MDR नीति Mains: डिजिटल पब्लिक गुड्स, फिनटेक & मर्चेंट लागत State PSC: बैंकिंग सुधार & वित्तीय समावेशन
1 नया UPI MDR टैरिफ ढांचा

NPCI के नए स्तरीय शुल्क पर संपादकीय विश्लेषण

  • लागू होने की तिथि एवं सीमा: 15 अक्टूबर से लागू होने वाले NPCI के नए नियमों के तहत व्यापारियों को किए जाने वाले केवल ₹2,000 और उससे अधिक के UPI भुगतानों पर MDR शुल्क लागू होगा (जो कुल UPI लेनदेन मात्रा का केवल लगभग 2.5% है)।
  • बहु-स्तरीय दरें: ₹1 लाख प्रति माह से कम टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को पूर्ण छूट; आवश्यक सेवाओं हेतु न्यूनतम निश्चित शुल्क; अन्य व्यापारियों हेतु 0.4% MDR; पूंजी बाजार हेतु अलग दर के तहत यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित किया गया है।
  • राजस्व अनुमान: बैंकों और भुगतान प्रदाताओं को इस कदम से प्रति माह अधिकतम ₹2,400 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।
  • अधिभार पर प्रतिबंध: सरकार ने व्यापारियों द्वारा उपभोक्ताओं पर सरचार्ज लगाने पर सख्त रोक लगाई है, यद्यपि खुदरा कीमतों में वृद्धि को रोकना कठिन होगा।
> ₹2,000
लागू होने की सीमा
2.5%
प्रभावित लेनदेन मात्रा
₹2,400 करोड़
मासिक अधिकतम राजस्व
2 संरचनात्मक कमियां एवं परिचालन संबंधी जोखिम

टर्नओवर सत्यापन का बोझ

₹1 लाख मासिक टर्नओवर सीमा की निगरानी करना छोटे व्यापारियों के लिए प्रशासनिक जटिलता पैदा करेगा; इससे छोटे व्यापारी UPI स्वीकार करने से बच सकते हैं, जो यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।

बहु-स्तरीय दरों की जटिलता

प्रारंभिक जीएसटी की तरह विभिन्न श्रेणियों के लिए भिन्न दरों से केवल बड़े निजी बैंकों और विदेशी तकनीकी कंपनियों को लाभ होगा, जबकि छोटे व्यापार प्रभावित होंगे।

3 नीतिगत विकल्प: डिजिटल पब्लिक गुड्स का वित्तपोषण

1. आरबीआई अधिशेष निधि

आरबीआई के वार्षिक अधिशेष भंडार का उपयोग करके डिजिटल भुगतान अवसंरचना को पूरी तरह से सब्सिडी प्रदान करना।

2. सरल एकल दर

जटिल छूटों के स्थान पर एक अत्यंत अल्प और पारदर्शी एकल MDR दर निर्धारित करना।

3. जनहितकारी दृष्टिकोण

व्यावसायिक लाभ के स्थान पर नेटवर्क स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था का संचालन।

4. स्वचालित सत्यापन

व्यापारियों पर प्रमाणन का बोझ डाले बिना बैंकों द्वारा स्वचालित आईटी सत्यापन प्रणाली विकसित करना।

फिनटेक उद्योग की वित्तीय स्थिरता और वित्तीय समावेशन के बीच संतुलन बनाने के लिए यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q2. भारत में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) एवं डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. MDR वह शुल्क है जो बैंक द्वारा किसी व्यापारी से ग्राहकों से डिजिटल माध्यमों से भुगतान स्वीकार करने के लिए लिया जाता है।
2. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ (IBA) की एक संयुक्त पहल है।
3. वर्तमान नियमों के अनुसार, ₹2,000 से कम के सभी UPI भुगतानों पर अनिवार्य रूप से 2% MDR काटा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि ₹2,000 से कम के छोटे UPI लेनदेन पर शून्य-MDR नीति लागू है और वे पूरी तरह निःशुल्क हैं। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2018 (वास्तविक प्रश्न)
Q. निम्नलिखित में से कौन-सा पद 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?

A) पूंजीगत सामान खरीदने के लिए व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला कर।
B) डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान प्राप्त करने के लिए किसी बैंक द्वारा व्यापारी पर लगाया जाने वाला शुल्क।
C) ₹1,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर व्यापारी को बैंक द्वारा दिया जाने वाला प्रोत्साहन।
D) डिजिटल वॉलेट का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट।
  • A) पूंजीगत सामान खरीदने के लिए व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला कर
  • B) डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान प्राप्त करने के लिए किसी बैंक द्वारा व्यापारी पर लगाया जाने वाला शुल्क
  • C) ₹1,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर व्यापारी को बैंक द्वारा दिया जाने वाला प्रोत्साहन
  • D) डिजिटल वॉलेट का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट
सही उत्तर: B

MDR वह शुल्क है जो व्यापारी अपनी बैंक को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले चुकाता है।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper III (वास्तविक प्रश्न)

“डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक रही है। डिजिटल भुगतान नेटवर्क की वित्तीय स्थिरता में निहित चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“भुगतान सेवा प्रदाताओं की वाणिज्यिक स्थिरता तथा UPI की बाधा-रहित निःशुल्क प्रकृति के बीच द्वंद्व का परीक्षण कीजिए।”
प्रमुख उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: प्रति माह 1,400 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन और यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर ढांचा एवं डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था का वर्तमान संदर्भ।
  • MDR के पक्ष में तर्क: सर्वर, सुरक्षा अवसंरचना और साइबर सुरक्षा लागत की भरपाई तथा नवाचार को प्रोत्साहन।
  • जटिल दरों के जोखिम: छोटे व्यापारियों द्वारा UPI अस्वीकार करना, नकदी की ओर वापसी और प्रशासनिक जटिलता।
  • आगे की राह: आरबीआई अधिशेष द्वारा सार्वजनिक उपयोगिता मॉडल, न्यूनतम पारदर्शी स्लैब और सरचार्ज पर सख्त निगरानी।
UPI MDR NPCI डिजिटल पब्लिक गुड्स फिनटेक अर्थव्यवस्था
GS Paper II भारतीय राज्यव्यवस्था व संविधान मौलिक अधिकार एवं सामाजिक न्याय

व्याख्या: समान नागरिक संहिता विमर्श क्या है? समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय

Prelims: अनुच्छेद 44, अनुच्छेद 25, 29, 21वां विधि आयोग Mains: लैंगिक न्याय, व्यक्तिगत कानून & पंथनिरपेक्षता State PSC: नीति निदेशक तत्व
1 संवैधानिक ढांचा और व्यक्तिगत कानूनों की स्थिति

रंगराजन आर. (पूर्व IAS) द्वारा प्रस्तुत विस्तृत विश्लेषण

  • संवैधानिक अधिदेश: भाग IV में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा।
  • समानता का दायरा: आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता) और सामान्य नागरिक कानून (संविदा, संपत्ति हस्तांतरण) पूरे देश में समान हैं, जबकि विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, गोद लेने और उत्तराधिकार के व्यक्तिगत कानून धर्म-आधारित हैं।
  • लैंगिक न्याय की अनिवार्यता: समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में निहित पितृसत्तात्मक असमानताओं को समाप्त कर महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है।
  • राज्यों की पहल: उत्तराखंड ने जनवरी 2025 में UCC लागू किया; असम, गुजरात और मध्य प्रदेश के विधेयक राष्ट्रपति की सहमति हेतु अनुच्छेद 254(2) के तहत लंबित हैं।
2 UCC के पक्ष एवं विपक्ष में प्रमुख तर्क
संवैधानिक आयाम UCC के पक्ष में तर्क चिंताएं एवं विपक्ष के तर्क
पंथनिरपेक्षता व समानता धार्मिक भेदभाव के बिना सभी नागरिकों के लिए समान दीवानी कानून (अनुच्छेद 14, 15)। बहुसंख्यकवादी सांस्कृतिक प्रभुत्व और धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) पर संभावित आघात का भय।
लैंगिक न्याय सभी महिलाओं के लिए समान संपत्ति, तलाक अधिकार और बहुविवाह की पूर्ण समाप्ति। पारंपरिक पितृसत्तात्मक संरचनाओं और रूढ़िवादी समूहों द्वारा विरोध।
जनजातीय छूट का विरोधाभास पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण हेतु राज्य UCC में जनजातियों को छूट। एक वर्ग को छूट देकर अल्पसंख्यकों पर लागू करने से समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय की समानता के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न।
3 21वां विधि आयोग बनाम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय

1. 21वां विधि आयोग (2018)

UCC को 'वर्तमान में अनावश्यक' बताते हुए व्यक्तिगत कानूनों के आंतरिक लैंगिक सुधार की सिफारिश की।

2. संवैधानिक नैतिकता

2024 के सुप्रीम कोर्ट निर्णय के अनुसार, महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव अनुच्छेद 29 के तहत सांस्कृतिक सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।

3. डॉ. अंबेडकर का दृष्टिकोण

संविधान सभा में अंबेडकर ने UCC का समर्थन किया, किंतु प्रारंभिक चरण में इसे स्वैच्छिक रखने की सलाह दी थी।

4. सामंजस्यपूर्ण व्याख्या

धार्मिक विविधता और महिलाओं के मौलिक अधिकारों को समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय के तहत संतुलित करना।

दीवानी अधिकारों को धार्मिक पहचान से अलग कर लैंगिक समानता स्थापित करना ही समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय का वास्तविक उद्देश्य है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 एवं व्यक्तिगत कानून न्यायशास्त्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. अनुच्छेद 44 अनुच्छेद 32 के तहत न्यायालयों द्वारा सीधे लागू किया जाने वाला एक प्रवर्तनीय मौलिक अधिकार है।
2. भारत के 21वें विधि आयोग (2018) ने तत्काल पूरे देश में एकल UCC अनिवार्य रूप से लागू करने की सिफारिश की थी।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो और सरला मुद्गल मामलों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल दिया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 3
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 3

कथन 1 गलत है (अनुच्छेद 44 भाग IV में एक गैर-न्यायोचित निदेशक तत्व है)। कथन 2 गलत है (21वें विधि आयोग ने कहा था कि UCC फिलहाल आवश्यक नहीं है)। कथन 3 सही है।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (वास्तविक प्रश्न)
Q. भारत के संविधान का कौन-सा भाग 'कल्याणकारी राज्य' (Welfare State) के आदर्श की घोषणा करता है?

A) राज्य के नीति के निदेशक तत्व (DPSP)
B) मूल अधिकार
C) उद्देशिका
D) सातवीं अनुसूची
  • A) राज्य के नीति के निदेशक तत्व (DPSP)
  • B) मूल अधिकार
  • C) उद्देशिका
  • D) सातवीं अनुसूची
सही उत्तर: A — राज्य के नीति के निदेशक तत्व (DPSP)

संविधान का भाग IV (अनुच्छेद 36-51) एक सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र और कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper II (वास्तविक प्रश्न)

“भारत में समान नागरिक संहिता को लागू करने में आने वाली संवैधानिक और सामाजिक चुनौतियों की विवेचना कीजिए। लैंगिक न्याय को धार्मिक स्वतंत्रता के साथ कैसे सामंजस्यपूर्ण बनाया जा सकता है?” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“संवैधानिक नैतिकता की मांग है कि व्यक्तिगत कानून लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा के अनुरूप हों। भारत में समान नागरिक संहिता की दिशा में व्यावहारिक मार्ग का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।”
प्रमुख उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: समान नागरिक संहिता अनुच्छेद 44 संवैधानिक नैतिकता एवं लैंगिक न्याय के संवैधानिक महत्व और पृष्ठभूमि का उल्लेख।
  • संवैधानिक सामंजस्य: धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) तथा लैंगिक समानता (अनुच्छेद 14, 15, 21) के बीच संवैधानिक नैतिकता के आधार पर संतुलन।
  • सुधार रणनीतियाँ: उत्तराखंड मॉडल बनाम 21वें विधि आयोग द्वारा समर्थित आंतरिक व्यक्तिगत कानून सुधार दृष्टिकोण की तुलना।
  • आगे की राह: व्यापक आम सहमति निर्माण, महिलाओं के अधिकारों की प्राथमिकता और चरणबद्ध स्वैच्छिक क्रियान्वयन।
अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता लैंगिक न्याय संवैधानिक नैतिकता

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (18 September 2026 FAQs)

1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की विदेश नीति को कैसे दर्शाता है?
यह घोषणापत्र भारत की सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को प्रमाणित करता है, जिसमें भारत गैर-पश्चिमी बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय भागीदारी करते हुए पश्चिमी गठबंधनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है।
2. ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतानों पर NPCI के नए MDR शुल्क की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
प्रति माह ₹1 लाख से कम टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को छूट देने में सत्यापन की कठिनाई, व्यापारियों द्वारा UPI अस्वीकार करने का जोखिम और जटिल बहु-स्तरीय दरें प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
3. समान नागरिक संहिता (UCC) पर 21वें विधि आयोग की क्या सिफारिश थी?
2018 के परामर्श पत्र में 21वें विधि आयोग ने कहा था कि समान नागरिक संहिता 'इस स्तर पर न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय', बल्कि व्यक्तिगत कानूनों के भीतर लैंगिक असमानताओं को समाप्त करने हेतु सुधार किए जाने चाहिए।
4. भारत एकल ब्रिक्स मुद्रा (BRICS Currency) का समर्थन क्यों नहीं करता?
एकल ब्रिक्स मुद्रा से चीनी युआन (Yuan) के प्रभुत्व का खतरा पैदा हो सकता है, इसलिए भारत स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार निपटान को प्राथमिकता देता है।
5. व्यक्तिगत कानूनों में सुधार के संदर्भ में 'संवैधानिक नैतिकता' का क्या महत्व है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) लैंगिक समानता (अनुच्छेद 14 व 15) तथा मानवीय गरिमा (अनुच्छेद 21) के अधीन है, अतः संवैधानिक नैतिकता सर्वोपरि है।
प्रस्तुति: Todays Current Affairs | UPSC & State PSC संपादकीय विश्लेषण (18 September 2026)
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