परोपकार विशेषज्ञ पुष्पा सुंदर (Pushpa Sundar) द्वारा आधिकारिक विश्लेषण
- परिसंपत्ति निहित करने का आदेश: प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के तहत, यदि किसी एनजीओ का एफसीआरए प्रमाणपत्र रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अंशदान से अर्जित सभी परिसंपत्तियां सरकारी नामित प्राधिकरण (Designated Authority) में निहित हो जाएंगी।
- स्थायी जब्तीकरण: यदि निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण बहाल नहीं होता है, तो संपत्तियां स्थायी रूप से सरकार में निहित हो जाएंगी या उन्हें बेचकर राशि भारत की संचित निधि (CFI) में जमा कर दी जाएगी।
- अपील तंत्र: विधेयक में संशोधन के लिए वैधानिक मार्ग और जिला न्यायाधीश के समक्ष अपील का प्रावधान किया गया है।
- पंजीकृत आधार में भारी गिरावट: 2015 से अब तक 22,496 गैर-सरकारी संगठनों के एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं, जिससे सितंबर 2026 तक केवल 14,466 सक्रिय संस्थाएं ही शेष बची हैं।
| वित्तपोषण स्रोत | वर्तमान स्थिति एवं पैमाना | संरचनात्मक सीमाएं एवं क्षेत्रीय प्रभाव |
|---|---|---|
| विदेशी अंशदान (FCRA) | घरेलू आर्थिक संकट और भारत के उभरती वैश्विक शक्ति बनने की धारणा के कारण वैश्विक दानदाताओं की वापसी। | विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के तहत जमीनी स्तर की नवाचारी विकास परियोजनाओं के लचीले वित्तपोषण का नुकसान। |
| अति-धनाढ्य व्यक्ति (UHNWIs) | भारत 229 अरबपतियों के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर; निजी परोपकार FY25 में ₹1.43 लाख करोड़ पहुंचा। | दानदाताओं का ध्यान उच्च शिक्षा और जलवायु तकनीक की ओर अधिक है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण की उपेक्षा हो रही है। |
| कॉर्पोरेट सीएसआर (कंपनी अधिनियम 2013) | FY25 में सीएसआर खर्च 17.5% बढ़कर ₹22,563 करोड़ हो गया (क्रिसिल रिपोर्ट)। | कंपनियां दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग के बजाय अल्पकालिक प्रचार-उन्मुख परियोजनाओं को प्राथमिकता देती हैं। |
₹18 लाख करोड़ का संभावित घाटा
बेन एंड कंपनी के अनुसार 2030 तक भारत के सामाजिक क्षेत्र में ₹18 लाख करोड़ ($210B) का फंडिंग अंतर आ सकता है, जिसके लिए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन में सहयोगात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
स्वदेशी दान का पुनर्गठन
घरेलू परोपकार को अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशनों की तरह पेशेवर लचीलापन अपनाना चाहिए और लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने हेतु गैर-शर्त बहुवर्षीय अनुदान देना चाहिए।
भारतीय लोकतंत्र के लिए एक जीवंत और स्वायत्त नागरिक समाज अपरिहार्य है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के संतुलित क्रियान्वयन की मांग करता है।
1. गृह मंत्रालय (MHA) एफसीआरए पंजीकरण और नवीनीकरण का प्रबंधन करने वाला नोडल मंत्रालय है।
2. एफसीआरए संशोधनों के तहत, गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी धन अन्य पंजीकृत एनजीओ को हस्तांतरित (Sub-grant) करने की पूर्ण मनाही है।
3. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत भारतीय कंपनियों द्वारा दिया गया सीएसआर फंड कानूनी रूप से एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि भारतीय पंजीकृत कंपनियों द्वारा घरेलू सीएसआर योगदान को घरेलू गैर-लाभकारी दान माना जाता है और यह एफसीआरए के दायरे में नहीं आता (जब तक कि वह विदेशी स्वामित्व वाली संस्था न हो)। कथन 1 और 2 सही हैं।
1. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत निर्दिष्ट निवल मूल्य, टर्नओवर या लाभ वाली कंपनियों के लिए अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य है।
2. भारत में सीएसआर नियम कंपनियों को आगामी वित्तीय वर्षों में अतिरिक्त सीएसआर खर्च को आगे ले जाने (Set-off) की अनुमति देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों कथन सही हैं। कंपनी (संशोधन) अधिनियम अनिवार्य 2% से अधिक किए गए सीएसआर खर्च को अगले तीन वित्तीय वर्षों तक समायोजित करने की अनुमति देता है।
UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper II (आधिकारिक प्रश्न)
मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)
मुख्य उत्तर संरचना (Answer Framework)
- प्रस्तावना: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के संदर्भ में सक्रिय लाइसेंस की संख्या 14,466 तक घटने का उल्लेख करें।
- राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम नागरिक स्वायत्तता: अनियंत्रित विदेशी प्रभाव को रोकने के सरकारी तर्क बनाम जमीनी स्तर के ग्रामीण स्वास्थ्य, शिक्षा व मानवाधिकार समूहों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विश्लेषण।
- घरेलू परोपकार का परिदृश्य: UHNWI दान (₹1.43L Cr) और CSR (₹22,563 Cr) की वृद्धि, किंतु उच्च शिक्षा के प्रति झुकाव और जमीनी स्तर के कल्याण की उपेक्षा।
- आगे की राह: पारदर्शी विनियामक प्रक्रिया, संपत्ति अधिग्रहण के लिए न्यायिक सुरक्षा उपाय और दीर्घकालिक सामाजिक बंदोबस्ती अनुदान को प्रोत्साहन।