The Hindu Editorial Today in Hindi 24 September 2026
UPSC CSE & राज्य PSC दैनिक संपादकीय मास्टर नोट्स (हिंदी संस्करण)
GS पेपर II भारत निर्वाचन आयोग एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 चुनावी शासन एवं संस्थागत जवाबदेही

गहराती संस्थागत दरार: आंतरिक असहमति, ईआरओनेट केंद्रीकरण एवं मतदाता सूची की विश्वसनीयता

प्रारंभिक: RPA 1950, ERO अधिकार, फॉर्म 6 मुख्य: चुनाव आयोग की स्वायत्तता व बहु-सदस्यीय निर्णय राज्य PSC: चुनाव सुधार
1 संदर्भ एवं संपादकीय पृष्ठभूमि

संस्थागत कार्यप्रणाली पर गंभीर खोजी खुलासे

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर हुए हालिया खोजी खुलासे ने भारत निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता विलोपन एवं ईआरओनेट केंद्रीकरण के तहत संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) द्वारा बिना पूर्ण आयोग की सहमति के लिए गए निर्णयों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक रूप से लिखित असहमति दर्ज कराई।

2 मुख्य आयाम: अनधिकृत नियम परिवर्तन एवं केंद्रीकृत नियंत्रण
14 बार
चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज औपचारिक आपत्ति
27 लाख
पश्चिम बंगाल SIR में हटाए गए मतदाता
> 90%
अपीलों में मतदाताओं की बहाली दर

फॉर्म 6 में अवैध संशोधन

मई 2026 में आयुक्त जोशी ने चेतावनी दी थी कि निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में सरकार द्वारा संशोधन किए बिना फॉर्म 6 में बदलाव नहीं हो सकता। इसके बावजूद जुलाई में फॉर्म में यह शर्त जोड़ी गई कि आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी पिछली SIR सूची में थे या नहीं, जिसे आयुक्त संधू ने "अनधिकृत और अवैध" करार दिया।

वैधानिक EROs के अधिकारों का हनन

RPA 1950 की धारा 13B के तहत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) एकमात्र वैधानिक अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी हैं। ईआरओनेट के केंद्रीकरण ने स्थानीय अधिकारियों से डेटा ऑडिट पहुंच छीन ली और केंद्रीय सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम द्वारा "तार्किक विसंगतियों" के नाम पर नाम हटाए गए।

3 मतदाता वंचना के प्रतिरूप एवं चुनावी परिणाम
  • पश्चिम बंगाल में व्यापक विलोपन: 60 लाख मतदाताओं को संदिग्ध सॉफ्टवेयर अलर्ट के आधार पर चिह्नित किया गया और 27 लाख नाम हटा दिए गए। ट्रिब्यूनल अपीलों में से 90% से अधिक मामलों में मतदाताओं को पुनः बहाल किया गया, जो मनमाने विलोपन का प्रमाण है।
  • दिल्ली में मतदाता संख्या संकुचन: स्वतंत्र विश्लेषण में पाया गया कि दिल्ली की 70 में से 24 विधानसभा सीटों में प्रारूप मतदाता सूची में उन मतदाताओं से भी कम नाम थे जिन्होंने 1.5 वर्ष पूर्व वास्तविक मतदान किया था।
  • संस्थागत सामूहिकता का उल्लंघन: सर्वोच्च न्यायालय ने टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) मामले में तय किया था कि CEC केवल 'समानों में प्रथम' (primus inter pares) है और सभी निर्णय बहु-सदस्यीय आम सहमति से होने चाहिए, जिसका भारत निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता विलोपन एवं ईआरओनेट केंद्रीकरण में हनन हुआ।
  • अनधिकृत मुकदमेबाजी: ट्रिब्यूनल के समक्ष 38 लाख अपीलों में से 16.1 लाख अपीलें न्यायिक अधिकारियों द्वारा बहाल किए गए मतदाताओं को हटाने हेतु आयोग के नाम पर दायर की गईं, जिसकी अधिकृत मंजूरी पर संशय है।
4 SIR प्रक्रिया की विधिक बनाम व्यावहारिक स्थिति
शासन का स्तर वैधानिक आवश्यकता (RPA 1950) SIR 2025–26 की व्यावहारिक स्थिति
फॉर्म 6 पात्रता सामान्य निवास + 18 वर्ष आयु; वैधानिक नियम प्रक्रिया। बिना नियम संशोधन के पूर्वजों के सत्यापन की अनिवार्यता।
मतदाता विलोपन प्राधिकारी स्थानीय ERO द्वारा व्यक्तिगत जांच, नोटिस व सत्यापन। ईआरओनेट द्वारा स्वचालित केंद्रीकृत एल्गोरिदम विलोपन।
आयोग की कार्यप्रणाली सामूहिक निर्णय अथवा बहुमत मतदान (CEC + 2 ECs)। आयुक्तों की असहमति की अनदेखी कर एकतरफा सर्कुलर।
डेटाबेस ऑडिट विकेंद्रीकृत पारदर्शी लॉग, EROs के लिए सुलभ। केंद्रीकृत ब्लैक-बॉक्स डेटाबेस, ऑडिट का अभाव।
5 सुधारात्मक नीतिगत सिफारिशें

1. स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट

भारत निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता विलोपन एवं ईआरओनेट केंद्रीकरण के तहत हटाए गए सभी नामों का स्वतंत्र न्यायिक व तकनीकी ऑडिट कराना।

2. वैधानिक प्रक्रिया का पालन

संसदीय अधिसूचना के बिना मतदाता पंजीकरण फॉर्मों (फॉर्म 6, 7, 8) में किसी भी प्रकार के अनधिकृत फेरबदल पर पूर्ण रोक लगाना।

3. EROs की स्वायत्तता की बहाली

ईआरओनेट पर केंद्रीय ओवरराइड नियंत्रण हटाकर स्थानीय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के अर्ध-न्यायिक अधिकारों की रक्षा करना।

अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार की पवित्रता बनाए रखने हेतु भारत निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता विलोपन एवं ईआरओनेट केंद्रीकरण की कमियों को दूर करना अनिवार्य है।

अभ्यास प्रारंभिक प्रश्न 1
भारत में चुनावी मशीनरी और मतदाता सूची तैयार करने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की नियुक्ति लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार के परामर्श से भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जाती है।
  2. मुख्य चुनाव आयुक्त के पास अन्य चुनाव आयुक्तों के बहुमत के निर्णय को रद्द करने का पूर्ण वीटो अधिकार होता है।
  3. मतदाता पंजीकरण फॉर्म (जैसे फॉर्म 6) के प्रारूप से संबंधित नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्वाचन आयोग के परामर्श से बनाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3

व्याख्या: कथन 1 सही है (RPA 1950 की धारा 13B)। कथन 2 गलत है क्योंकि CEC और ECs के पास समान मतदान अधिकार होते हैं और मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत से होता है (टी.एन. शेषन केस 1995)। कथन 3 सही है (RPA 1950 की धारा 28 केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति देती है)।

UPSC CSE Prelims 2012 (आधिकारिक प्रश्न)
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
  2. मुख्य चुनाव आयुक्त की सेवा शर्तों में उनकी नियुक्ति के पश्चात कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  3. किसी अन्य चुनाव आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

ये तीनों कथन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु दिए गए प्रत्यक्ष सुरक्षा उपाय हैं।

UPSC CSE Mains 2020 — GS पेपर II (आधिकारिक प्रश्न)

“भारत निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली से संबंधित हालिया विवादों के आलोक में, इसकी संस्थागत स्वायत्तता को मजबूत करने के उपाय सुझाइए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“भारत निर्वाचन आयोग का संवैधानिक ढांचा सामूहिकता और चुनावी कानूनों के सख्त पालन पर आधारित है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवादों के आलोक में, केंद्रीकृत प्रशासनिक हस्तक्षेप और मतदाता वंचना के खतरों का विश्लेषण कीजिए।”
उत्तर संरचना फ्रेमवर्क
  • प्रस्तावना: अनुच्छेद 324 के तहत ECI की भूमिका तथा अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की संवैधानिक गारंटी।
  • संस्थागत चुनौतियां: भारत निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता विलोपन एवं ईआरओनेट केंद्रीकरण पर आंतरिक असहमति, फॉर्म 6 में अनधिकृत परिवर्तन, और ERO के वैधानिक अधिकारों का हनन (RPA 1950 धारा 13B)।
  • लोकतांत्रिक प्रभाव: सॉफ्टवेयर-आधारित मनमाना विलोपन, ट्रिब्यूनल में अपीलों का अंबार और चुनावों से पूर्व मतदाताओं का मताधिकार छिनना।
  • सुधार: आयोग में मतदान रिकॉर्ड का संस्थागतकरण, ईआरओनेट का तृतीय-पक्ष एल्गोरिदम ऑडिट, ERO की जवाबदेही की रक्षा और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता।
भारत निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 RPA 1950 ईआरओनेट GS पेपर II
GS पेपर III विदेश व्यापार नीति एवं MSME प्रतिस्पर्धात्मकता GS पेपर II: द्विपक्षीय समझौते

रणनीतिक व्यापार: भारत-न्यूजीलैंड FTA, MSME निर्यात विविधीकरण एवं संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण

प्रारंभिक: टैरिफ लाइन, शुल्क मुक्त पहुंच, डेयरी संरक्षण मुख्य: छोटे व्यापार समझौते बनाम मेगा पैक्ट, टैरिफ सुरक्षा राज्य PSC: निर्यात अर्थव्यवस्था
1 संदर्भ एवं विदेश व्यापार रणनीति

मेगा समझौतों के पूरक के रूप में व्यावहारिक द्विपक्षीय सौदे

20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शुल्क मुक्त बाजार पहुंच एवं डेयरी संरक्षण वैश्विक संरक्षणवाद और उच्च टैरिफ के दौर में छोटी व विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक व्यापार समझौतों की भारतीय नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

2 मुख्य आयाम: बाजार पहुंच बनाम घरेलू संवेदनशीलता
100%
भारतीय वस्तुओं हेतु शुल्क-मुक्त पहुंच
30%
आरक्षित आयात लाइनें (डेयरी शामिल)
$2.2 Bn
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य

श्रम व पूंजी प्रधान निर्यातों को बढ़ावा

भारत को न्यूजीलैंड में 100% वस्तुओं पर शून्य-शुल्क पहुंच मिली है। प्रमुख लाभार्थी क्षेत्रों में वस्त्र उद्योग (14% निर्यात), रत्न व आभूषण (5%), तथा फार्मास्यूटिकल्स, परमाणु रिएक्टर पार्ट्स, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और इस्पात (33%) शामिल हैं।

डेयरी व कृषि क्षेत्र की मजबूत सुरक्षा

न्यूजीलैंड विश्व का सबसे बड़ा डेयरी निर्यातक होने के बावजूद भारत ने अपने डेयरी क्षेत्र को समझौते से पूरी तरह बाहर रखकर 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षित रखी। कुल मिलाकर लगभग 30% आयात लाइनों पर शुल्क छूट नहीं दी गई।

3 आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चालक
  • वैश्विक टैरिफ जोखिम से बचाव: कुछ पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा 100% टैरिफ लगाने की चेतावनियों के बीच यह समझौता भारतीय निर्यातकों को सुरक्षित वैकल्पिक बाजार प्रदान करता है।
  • MSME आजीविका सुरक्षा: न्यूजीलैंड को होने वाले भारतीय विनिर्माण निर्यात का लगभग आधा हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) द्वारा तैयार किया जाता है, जिन्हें भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शुल्क मुक्त बाजार पहुंच एवं डेयरी संरक्षण से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
  • सेवाएं व कुशल श्रम गतिशीलता: STEM स्नातकों हेतु अध्ययनोपरांत कार्य वीजा, तथा पारंपरिक पेशेवरों (योग प्रशिक्षक, शेफ, IT विशेषज्ञ) हेतु वीजा नियमों में छूट प्राप्त की गई है।
  • हिंद-प्रशांत आर्थिक साझेदारी: ऑस्ट्रेलिया-भारत ECTA के बाद यह समझौता ओशिनिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक आर्थिक उपस्थिति को मजबूती प्रदान करता है।
4 समझौते के तहत क्षेत्रीय व्यापार मैट्रिक्स
क्षेत्र भारतीय रियायत / बाजार पहुंच स्थिति रणनीतिक व आजीविका तर्क
वस्त्र एवं परिधान तत्काल शून्य-शुल्क टैरिफ उन्मूलन। बांग्लादेश व वियतनाम से मिलने वाली शुल्क-मुक्त प्रतिस्पर्धा का मुकाबला।
डेयरी एवं संवेदनशील कृषि शून्य छूट (पूर्णतः समझौते से बाहर)। घरेलू सहकारी डेयरी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा।
फार्मा एवं इंजीनियरिंग 100% शुल्क-मुक्त प्रवेश; त्वरित नियामक मंजूरी। उच्च-मूल्य जेनेरिक दवाओं और मशीनरी निर्यात का विस्तार।
सेवाएं एवं वीजा पेशेवरों व STEM स्नातकों हेतु विशेष कोटा। पश्चिमी देशों में वीजा प्रतिबंधों के दौर में कानूनी गतिशीलता सुनिश्चित करना।
5 रणनीतिक नीतिगत सिफारिशें

1. गैर-टैरिफ बाधाओं का समाधान

स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) मानकों में पारस्परिक मान्यता समझौते (MRAs) तैयार करना ताकि भारतीय निर्यात गैर-टैरिफ बाधाओं में न उलझें।

2. MSME निर्यात सुगमता

भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शुल्क मुक्त बाजार पहुंच एवं डेयरी संरक्षण के तहत छोटे निर्यातकों को मूल देश के नियम (Rules of Origin) प्रमाणन में सहायता देना।

3. आगामी वार्ताओं हेतु आदर्श मॉडल

इस हाइब्रिड मॉडल (100% निर्यात शून्य शुल्क + कृषि संवेदनशीलता संरक्षण) को ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ चल रही वार्ताओं में लागू करना।

भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शुल्क मुक्त बाजार पहुंच एवं डेयरी संरक्षण का सफल कार्यान्वयन भारत की विदेश व्यापार नीति की रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

अभ्यास प्रारंभिक प्रश्न 2
भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) से बाहर रहने का निर्णय मुख्य रूप से घरेलू डेयरी क्षेत्र, कृषि आजीविका और व्यापार घाटे की चिंताओं के कारण लिया था।
  2. एक मुक्त व्यापार समझौते के तहत, सदस्य देशों के लिए अपने व्यापार किए जाने वाले 100% कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ समाप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।
  3. व्यापार समझौतों में 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) प्रावधान तीसरे देशों के उत्पादों को अनुचित टैरिफ लाभ लेने से रोकने हेतु बनाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3

व्याख्या: कथन 1 सही है (RCEP से हटने का मुख्य कारण डेयरी व व्यापार घाटा था)। कथन 2 गलत है क्योंकि देश संवेदनशील उत्पादों हेतु नकारात्मक/आरक्षित सूची (Negative List) रखते हैं। कथन 3 सही है (Rules of Origin तीसरे देशों के उत्पादों की अवैध री-रूटिंग रोकते हैं)।

UPSC CSE Prelims 2020 (आधिकारिक प्रश्न)
समाचारों में अक्सर दिखने वाला पद 'क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी' (RCEP) देशों के किस समूह के संदर्भ में प्रयुक्त होता है?
  • A. G20
  • B. आसियान (ASEAN)
  • C. SCO
  • D. सार्क (SAARC)
सही उत्तर: B — आसियान (ASEAN)

RCEP आसियान के 10 सदस्य देशों और उसके 5 प्रमुख FTA साझेदार देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया) के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है।

UPSC CSE Mains 2023 — GS पेपर III (आधिकारिक प्रश्न)

“भारतीय विनिर्माण क्षेत्र पर, विशेष रूप से MSMEs के संदर्भ में, व्यापार समझौतों के प्रभाव का परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“वैश्विक संरक्षणवाद और टैरिफ अस्थिरता के दौर में, छोटी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाए बिना आवश्यक निर्यात विविधीकरण प्रदान करते हैं। भारतीय व्यापार नीति के संदर्भ में चर्चा कीजिए।”
उत्तर संरचना फ्रेमवर्क
  • प्रस्तावना: बहुपक्षीय संधियों की जटिलताओं के बीच भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शुल्क मुक्त बाजार पहुंच एवं डेयरी संरक्षण जैसे लक्षित द्विपक्षीय समझौतों की प्रासंगिकता।
  • निर्यात विविधीकरण एवं MSME लाभ: वस्त्र, रत्न, फार्मा और मशीनरी हेतु 100% शुल्क-मुक्त पहुंच, जो पश्चिमी बाजारों के टैरिफ जोखिम से सुरक्षा देती है।
  • रणनीतिक संवेदनशीलता का संरक्षण: डेयरी व कृषि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखना (8 करोड़ ग्रामीण परिवारों व दुग्ध सहकारी समितियों की सुरक्षा)।
  • आगे की राह: रूल्स ऑफ ओरिजिन का सुदृढ़ीकरण, STEM पेशेवरों हेतु वीजा रियायतें और आगामी FTAs हेतु नीतिगत सबक।
मुक्त व्यापार समझौता MSME निर्यात डेयरी संरक्षण रूल्स ऑफ ओरिजिन GS पेपर III
GS पेपर II ब्रिक्स एवं बहुपक्षीय समूह रणनीतिक स्वायत्तता एवं वैश्विक शासन

व्यावहारिक बहुपक्षवाद: दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, सर्वसम्मति एवं भारत की रणनीतिक स्वायत्तता

प्रारंभिक: 18वां ब्रिक्स सम्मेलन, दिल्ली घोषणापत्र मुख्य: बहुध्रुवीयता बनाम एकपक्षवाद, भारत की गुटनिरपेक्षता राज्य PSC: अंतरराष्ट्रीय संबंध
1 संदर्भ एवं वैश्विक वातावरण

बहुपक्षीय विखंडन के दौर में आम सहमति का निर्माण

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने ब्रिक्स 18वां नई दिल्ली शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद दिल्ली घोषणापत्र एवं रणनीतिक स्वायत्तता की प्रासंगिकता को पुनः स्थापित किया है। पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक शक्तियों के तनाव के बीच भारत ने ईरान, रूस, चीन और यूएई सहित 11 सदस्य देशों के नेताओं की मेजबानी कर सर्वसम्मत दिल्ली घोषणापत्र जारी कराया।

2 मुख्य आयाम: बहुध्रुवीय संक्रमण एवं द्विपक्षीय सेतु
11 राष्ट्र
दिल्ली घोषणापत्र पर पूर्ण सहमति
सितंबर 2026
नई दिल्ली में 18वां शिखर सम्मेलन
> 45%
वैश्विक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व

द्विपक्षीय तनाव प्रबंधन का मंच

ब्रिक्स ने जटिल द्विपक्षीय संबंधों को संभालने का अवसर दिया: क्षेत्रीय तनाव के बीच यूएई और ईरान के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक कराई, तथा सीमा विवाद के बावजूद भारत और चीन को सतत बहुपक्षीय संवाद और प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व का मंच प्रदान किया।

एकपक्षवाद के विरुद्ध एकजुटता

आंतरिक भिन्नताओं के बावजूद सभी 11 सदस्य इस बुनियादी बिंदु पर सहमत हुए कि किसी भी महाशक्ति द्वारा वित्तीय प्रतिबंधों, एकतरफा टैरिफ और व्यापार रुकावटों का मनमाना उपयोग वैश्विक स्थिरता के लिए हानिकारक है।

3 भारत हेतु रणनीतिक सबक एवं बहु-संरेखण नीति
  • युद्ध का अग्रिम मोर्चा बनने से इनकार: यूक्रेन और पश्चिम एशिया के सबक दर्शाते हैं कि महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता में मोहरा बनने वाले देशों को भारी आर्थिक व क्षेत्रीय नुकसान उठाना पड़ता है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता की सुरक्षा: ब्रिक्स 18वां नई दिल्ली शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद दिल्ली घोषणापत्र एवं रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से भारत पश्चिमी विरोधी खेमे में शामिल हुए बिना और अमेरिका से तकनीकी संबंध बनाए रखते हुए ग्लोबल साउथ की आवाज बना हुआ है।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों का लोकतांत्रिक शासन: AI नियमन, बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) में सुधार और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान पर सामूहिक सहमति।
  • असमान सैन्य गुटों की अस्वीकृति: भारत किसी महाशक्ति का अधीनस्थ सहयोगी बनने के बजाय Quad, BRICS, SCO और G20 में स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है।
4 संस्थागत तुलना: ब्रिक्स बनाम G7
संस्थागत विशेषता ग्रुप ऑफ सेवन (G7) ब्रिक्स+ (11 सदस्यीय मॉडल)
वर्चस्व संरचना अमेरिकी प्रभुत्व और पश्चिमी गठबंधन पर आधारित। बहु-केन्द्रित; कोई एकल प्रभुत्व नहीं; सर्वसम्मति से निर्णय।
वैश्विक प्रतिनिधित्व उच्च आय वाली विकसित अर्थव्यवस्थाएं (~10% जनसंख्या)। प्रमुख उभरते बाजार व ग्लोबल साउथ (>45% जनसंख्या)।
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण ब्रेटन वुड्स वित्तीय व्यवस्था के यथास्थिति का पोषण। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार व बहुध्रुवीयता।
भारत का रणनीतिक महत्व आमंत्रित साझेदार; प्रौद्योगिकी व संतुलन हेतु। संस्थापक स्तंभ; ग्लोबल साउथ की स्वायत्तता का नेतृत्वकर्ता।
5 रणनीतिक नीतिगत सिफारिशें

1. वित्तीय अवसंरचना का विविधीकरण

वैश्विक व्यापार नियमों को तोड़े बिना स्थानीय मुद्रा क्लियरिंग और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) को मजबूत करना।

2. भारत-चीन सीमा प्रबंधन

ब्रिक्स 18वां नई दिल्ली शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद दिल्ली घोषणापत्र एवं रणनीतिक स्वायत्तता मंच का उपयोग सीमा वि-सैनिकरण और बहुपक्षीय आर्थिक संवाद को पृथक रखने में करना।

3. ग्लोबल साउथ का नेतृत्व

जलवायु वित्त और AI नैतिकता पर 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' शिखर सम्मेलनों के निष्कर्षों को ब्रिक्स टास्कफोर्स में संस्थागत बनाना।

ब्रिक्स 18वां नई दिल्ली शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद दिल्ली घोषणापत्र एवं रणनीतिक स्वायत्तता सिद्ध करता है कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था ही भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों के अनुकूल है।

अभ्यास प्रारंभिक प्रश्न 3
ब्रिक्स (BRICS) समूह और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना 2014 के फोर्टालेजा घोषणापत्र (Fortaleza Declaration) द्वारा की गई थी।
  2. IMF और विश्व बैंक के विपरीत, NDB के संस्थापक सदस्यों के पास समान मतदान अधिकार हैं और किसी भी सदस्य के पास वीटो शक्ति नहीं है।
  3. न्यू डेवलपमेंट बैंक की सदस्यता केवल औपचारिक ब्रिक्स सदस्य देशों तक ही सीमित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1 और 3
  • D. 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं (NDB 2014 फोर्टालेजा शिखर सम्मेलन में बना था, जिसमें संस्थापक सदस्यों की 20% समान हिस्सेदारी है)। कथन 3 गलत है क्योंकि NDB की सदस्यता गैर-ब्रिक्स UN सदस्य देशों हेतु भी खुली है (जैसे बांग्लादेश, यूएई, मिस्र और उरुग्वे इसके सदस्य हैं)।

UPSC CSE Prelims 2016 (आधिकारिक प्रश्न)
'फोर्टालेजा घोषणा' (Fortaleza Declaration) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. यह ब्राजील में आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित किया गया था।
  2. इसके परिणामस्वरूप न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) की स्थापना हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों

2014 में ब्राजील के फोर्टालेजा में आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में न्यू डेवलपमेंट बैंक (मुख्यालय शंघाई) तथा $100 बिलियन की आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था की स्थापना हुई थी।

UPSC CSE Mains 2022 — GS पेपर II (आधिकारिक प्रश्न)

“I2U2 (भारत, इजराइल, यूएई और संयुक्त राज्य अमेरिका) समूह वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति को किस प्रकार रूपांतरित करेगा?” (10 अंक | 150 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“मूल्यांकन कीजिए कि ब्रिक्स किस प्रकार भारत को पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों के साथ अपनी साझेदारी से समझौता किए बिना अथवा महाशक्तियों की अधीनता स्वीकार किए बिना रणनीतिक बहु-संरेखण (Multi-alignment) अपनाने में सक्षम बनाता है।”
उत्तर संरचना फ्रेमवर्क
  • प्रस्तावना: 11 सदस्यीय ब्रिक्स 18वां नई दिल्ली शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद दिल्ली घोषणापत्र एवं रणनीतिक स्वायत्तता के संदर्भ में भारत के बहु-संरेखित दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
  • रणनीतिक कार्य: द्विपक्षीय तनावों के समाधान का मंच (ईरान-यूएई, भारत-चीन), एकतरफा प्रतिबंधों के विरुद्ध सामूहिक सौदेबाजी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार।
  • पश्चिमी संबंधों के साथ संतुलन: क्वाड और अमेरिकी तकनीकी साझेदारी के साथ-साथ ब्रिक्स में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना बिना चीन-अमेरिका संघर्ष में मोहरा बने।
  • निष्कर्ष: रणनीतिक स्वायत्तता एक गतिशील विदेश नीति है जो भारत की संप्रभु निर्णय क्षमता को सुरक्षित रखती है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रणनीतिक स्वायत्तता दिल्ली घोषणापत्र बहुध्रुवीयता GS पेपर II

❓ महत्वपूर्ण संपादकीय FAQs (24 सितंबर 2026 FAQs)

1. चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में क्या मुख्य प्रक्रियात्मक खामियां उजागर हुईं?
चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज असहमति के अनुसार, बिना नियम संशोधन के फॉर्म 6 में पूर्वजों के विवरण की अवैध अनिवार्यता, ईआरओनेट के माध्यम से वैधानिक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (EROs) के अधिकारों का केंद्रीकृत अतिक्रमण, और सॉफ्टवेयर द्वारा लाखों वास्तविक मतदाताओं के मनमाने विलोपन की खामियां पाई गईं।
2. भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा कैसे की?
भारत ने अपने 100% निर्यातों (वस्त्र, रत्न, फार्मा, इंजीनियरिंग) हेतु शून्य-शुल्क पहुंच प्राप्त की, जबकि न्यूजीलैंड के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र 'डेयरी' को समझौते से पूरी तरह बाहर रखा और लगभग 30% आयात टैरिफ लाइनों को घरेलू सुरक्षा हेतु आरक्षित रखा।
3. नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भू-राजनीतिक महत्व क्या है?
11 सदस्य देशों ने दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति बनाई। इसने ईरान-यूएई और भारत-चीन जैसे द्विपक्षीय तनावों के प्रबंधन हेतु मंच दिया तथा पश्चिमी एकपक्षीय प्रतिबंधों व टैरिफ के विरुद्ध भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत किया।
4. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की वैधानिक भूमिका क्या है?
धारा 13B के तहत, ERO किसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करने, उसका सत्यापन व संशोधन करने का वैधानिक अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी है, जिसके निर्णय के विरुद्ध न्यायिक अपील की जा सकती है।
5. भारत ने व्यापार समझौतों में डेयरी क्षेत्र को खोलने से क्यों इनकार किया है?
भारत का डेयरी क्षेत्र 8 करोड़ से अधिक छोटे, सीमांत व भूमिहीन ग्रामीण परिवारों (विशेष रूप से महिलाओं) की आजीविका का आधार है। न्यूजीलैंड जैसे औद्योगिक डेयरी निर्यातकों के लिए बाजार खोलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य संप्रभुता संकट में पड़ सकती है।
प्रकाशक: Todays Current Affairs | UPSC एवं राज्य PSC दैनिक संपादकीय विश्लेषण (24 सितंबर 2026)
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