📰 द हिंदू संपादकीय विश्लेषण — ओमान CEPA, NFHS-6 की कमियां और ग्रेट निकोबार में पारदर्शिता

भारत-ओमान व्यापार मार्ग  |  स्वास्थ्य सर्वेक्षण पद्धति पर बहस  |  रणनीतिक बनाम पर्यावरणीय लागत

📅 UPSC उच्च-उपज अध्ययन नोट्स | GS-2 · GS-3 तैयार | प्रारंभिक + मुख्य परीक्षा केंद्रित
द हिंदू | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार + CEPA + भारत-ओमान संबंध

🤝 ओमान CEPA — भारत के निर्यात के लिए एक नया मार्ग

लेखक: अनंत गोयनका (अध्यक्ष, फिक्की — भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ) | संदर्भ: भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) 1 जून, 2026 को लागू हुआ — जिससे ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिली, जो मूल्य के हिसाब से भारत के 99.38% निर्यात को कवर करती है।

📋 पाठ्यक्रम: GS-2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते जिनमें भारत शामिल है और/या जो भारत के हितों को प्रभावित करते हैं GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था — संसाधनों का जुटाव, विकास; बुनियादी ढांचा; भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के प्रभाव
🎯 चर्चा में क्यों? भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) 1 जून, 2026 को लागू हुआ। समझौते से पहले, सबसे अधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) व्यवस्था के तहत केवल 15.33% भारतीय निर्यात ही ओमान में शून्य शुल्क पर प्रवेश करता था। CEPA अब ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जो मूल्य के हिसाब से भारत के 99.38% निर्यात को कवर करता है — यह विभिन्न क्षेत्रों में तत्काल प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देता है।

⚡ मुख्य तर्क

भारत-ओमान CEPA केवल एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते से कहीं अधिक है — यह खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और पूर्वी अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार है। ओमान के बंदरगाह (सोहर, दुकम, सलालाह) खाड़ी, हिंद महासागर और पूर्वी अफ्रीका के चौराहे पर स्थित हैं। CEPA वस्त्र, रसायन, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और सेवाओं को बढ़ावा देता है — और भारतीय विशेषज्ञों के लिए पेशेवर गतिशीलता के मार्ग खोलता है। अब असली परीक्षा कार्यान्वयन और उपयोग में है: यदि भारतीय व्यवसाय इस समझौते का सक्रिय रूप से लाभ उठाते हैं, तो यह भारत के निर्यात पदचिह्न का विस्तार कर सकता है और देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और सेवा केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा में मदद कर सकता है।

📊 व्यापार के आंकड़े — भारत-ओमान आर्थिक संबंध

$8.94 Bn → $11.18 Bn
FY2023–24 से FY2025–26 तक द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि
15.33% → 98.08%
शून्य शुल्क पर टैरिफ लाइनें: CEPA से पहले बनाम CEPA के बाद
$863 मिलियन
2024 में द्विपक्षीय सेवा व्यापार — भारत का ~$447 मिलियन का अधिशेष

🏭 भारत के लिए क्षेत्र-वार लाभ

👕 वस्त्र और परिधान
  • भारत पहले से ही ओमान के बुने हुए परिधानों के आयात में 43% हिस्सेदारी और 31% निट वाले परिधानों के आयात पर नियंत्रण रखता है।
  • मौजूदा 5% टैरिफ को हटाने से चीन (दूसरे प्रमुख आपूर्तिकर्ता) के मुकाबले भारतीय निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।
  • शुल्क-मुक्त पहुंच भारत के मौजूदा बाजार प्रभुत्व को और बढ़ाएगी।
🧪 रसायन
  • भारत पहले से ही ओमान के अकार्बनिक रसायनों के आयात का लगभग 39% आपूर्ति करता है — जो इसे प्रमुख खिलाड़ियों में से एक बनाता है।
  • शुल्क-मुक्त पहुंच इसे और बढ़ाएगी।
⚙️ इंजीनियरिंग सामान
  • ओमान प्रति वर्ष $3.7 बिलियन से अधिक मूल्य की यांत्रिक मशीनरी और $3.3 बिलियन मूल्य के ऑटोमोटिव का आयात करता है।
  • भारत की बाजार हिस्सेदारी क्रमशः केवल 5% और 2% है — भारी अप्रयुक्त क्षमता।
  • CEPA के तहत तरजीही बाजार पहुंच भारतीय निर्यात को काफी विस्तार करने और ओमान के बुनियादी ढांचे, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति गहरी करने में मदद कर सकती है।
💊 फार्मास्यूटिकल्स
  • ओमान के फार्मास्यूटिकल बाजार में भारत की लगभग 10% बाजार हिस्सेदारी है।
  • मूल्य टैरिफ में कमी में नहीं, बल्कि नियामक सुविधा में है: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय नियामकों द्वारा अनुमोदित उत्पादों को फास्ट-ट्रैक अनुमोदन का लाभ मिलेगा, जिससे अनुपालन लागत कम होगी।
  • खाद्य उत्पादों (मांस, अंडे, शहद, मक्खन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ) के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी।
  • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: डेयरी, अनाज, खाद्य तेल और कई कृषि वस्तुओं को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है।

🔧 व्यापार सुविधा — प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना

  • मूल प्रमाणपत्र (Certificates of Origin): ओमान भारत के निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को स्वीकार करेगा — जिससे दोहरे परीक्षण और निरीक्षण समाप्त होंगे।
  • जैविक और हलाल मान्यता: भारत की NPOP (जैविक) और हलाल प्रमाणन प्रणालियों को मान्यता दी गई है — जिससे खाद्य निर्यातकों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।
  • SPS और TBT प्रावधान: समर्पित स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS) और व्यापार में तकनीकी बाधाएं (TBT) प्रावधान नियामक पारदर्शिता बढ़ाएंगे और सीमा शुल्क निकासी को सुव्यवस्थित करेंगे।
  • जल्दी खराब होने वाले सामान के लिए फास्ट-ट्रैक प्रोसेसिंग: समय-संवेदनशील कृषि निर्यात के लिए लागत कम करेगी और दक्षता में सुधार करेगी।

🌐 सेवाएं और पेशेवर गतिशीलता

  • 2024 में द्विपक्षीय सेवा व्यापार $863 मिलियन था — भारत को लगभग $447 मिलियन का अधिशेष प्राप्त हुआ।
  • ओमान के वैश्विक सेवा आयात में भारत की हिस्सेदारी 5% से थोड़ी अधिक है — जो पर्याप्त अप्रयुक्त क्षमता को दर्शाता है।
  • बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं: ओमान ने लेखांकन, इंजीनियरिंग, आईटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और परामर्श में पेशेवरों को कवर करते हुए बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं की हैं।
  • ओमान इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी के कोटे को भी बढ़ाता है — जिससे भारतीय पेशेवरों की गतिशीलता सुगम होगी।
  • आयुष और पारंपरिक चिकित्सा: प्रावधान खाड़ी में भारतीय स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के लिए अवसर पैदा करते हैं।

🗺️ ओमान की रणनीतिक स्थिति — गेटवे का लाभ

GCC + पूर्वी अफ्रीका के लिए ओमान एक प्रवेश द्वार
  • ओमान खाड़ी, हिंद महासागर और पूर्वी अफ्रीका के चौराहे पर एक विशिष्ट स्थान पर स्थित है।
  • सोहर, दुकम और सलालाह के बंदरगाह प्रमुख रसद और औद्योगिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।
  • भारतीय व्यवसायों के लिए, ओमान न केवल एक गंतव्य बाजार के रूप में बल्कि व्यापक GCC क्षेत्र और पूर्वी अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में भी काम कर सकता है।
  • CEPA भारत की व्यापार नीति के विकास को प्रदर्शित करता है — टैरिफ वार्ता से लेकर वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, गतिशीलता और नियामक सहयोग को शामिल करने वाली व्यापक आर्थिक भागीदारी तक।
  • लाभ तमिलनाडु में वस्त्र क्लस्टर और गुजरात में रत्न और आभूषण से लेकर महाराष्ट्र और पंजाब में इंजीनियरिंग केंद्रों, और तेलंगाना में फार्मास्यूटिकल निर्माताओं से लेकर आंध्र प्रदेश और केरल में समुद्री खाद्य निर्यातकों तक विस्तारित होंगे।
🇮🇳 भारत की CEPA रणनीति — बड़ी तस्वीर ओमान CEPA, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ, यूके, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों का अनुसरण करता है। भारत सक्रिय रूप से अपने व्यापारिक साझेदारियों में विविधता ला रहा है और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ अधिक गहराई से एकीकृत हो रहा है। ओमान CEPA एक ऐसे क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करता है जो इसकी ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक हितों के लिए केंद्रीय है। अब असली परीक्षा कार्यान्वयन में है — यदि व्यवसाय सक्रिय रूप से अवसरों का लाभ उठाते हैं, तो CEPA भारत के निर्यात पदचिह्न का उल्लेखनीय विस्तार कर सकता है।

🔑 प्रमुख शब्दावली

CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) सबसे अधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) व्यवस्था टैरिफ लाइनें (98.08% शुल्क-मुक्त) प्राथमिकता क्षेत्र ऋण सादृश्य निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) SPS और TBT प्रावधान NPOP (जैविक प्रमाणन) GCC (खाड़ी सहयोग परिषद) बंदरगाह — सोहर, दुकम, सलालाह आयुष प्रावधान इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी

✏ संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • "भारत-ओमान CEPA केवल एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं है बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद और पूर्वी अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार है।" प्रमुख क्षेत्रों और भारत की व्यापक व्यापार रणनीति के संदर्भ में समालोचनात्मक जांच करें। (GS-2/GS-3, 250 शब्द)
  • भारत के निर्यात विविधीकरण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण के लिए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौतों (CEPAs) के महत्व पर चर्चा करें। (GS-3, 150 शब्द)

🎯 अभ्यास MCQs

प्रारंभिक Q1

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CEPA से पहले, सबसे अधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) व्यवस्था के तहत केवल 15.33% भारतीय निर्यात ही ओमान में शून्य शुल्क पर प्रवेश करता था।
2. CEPA के तहत, ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच की पेशकश की है, जो मूल्य के हिसाब से भारत के 99.38% निर्यात को कवर करती है।
3. डेयरी, अनाज, खाद्य तेल और कई कृषि वस्तुओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को ओमान के लिए CEPA की टैरिफ रियायतों में शामिल किया गया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

📖 व्याख्या देखें
कथन 1 सही है ✓ — CEPA से पहले, MFN व्यवस्था के तहत केवल 15.33% भारतीय निर्यात ही ओमान में शून्य शुल्क पर प्रवेश करता था। CEPA शून्य-शुल्क पहुंच का नाटकीय रूप से विस्तार करके तत्काल प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देता है।

कथन 2 सही है ✓ — CEPA के तहत, ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच की पेशकश की है, जो मूल्य के हिसाब से भारत के 99.38% निर्यात को कवर करती है — यह CEPA-पूर्व स्थिति की तुलना में एक बड़ा विस्तार है।

कथन 3 गलत है ✗ — डेयरी, अनाज, खाद्य तेल और कई कृषि वस्तुओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखा गया है — विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए कि ओमान में घरेलू उत्पादकों की रक्षा हो। संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए व्यापार समझौतों में यह एक मानक अभ्यास है।

उत्तर: (a) — केवल 1 और 2
द हिंदू | सार्वजनिक स्वास्थ्य + सर्वेक्षण पद्धति + डेटा शासन

📊 NFHS-6 में क्या खोया और क्या पाया

लेखक: अरीना अरोड़ा | संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 29 मई को NFHS-6 (2023–24) की प्रारंभिक तथ्य पत्रक जारी की गई — जिसमें लगभग 6.8 लाख परिवारों का डेटा दर्ज किया गया। इस सर्वेक्षण में NFHS-5 के 131 की तुलना में 101 संकेतक हैं — 30 संकेतकों की शुद्ध कमी — जिसमें एनीमिया, शिशु और बाल मृत्यु दर, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छता और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन जैसे प्रमुख मेट्रिक्स हटा दिए गए हैं।

📋 पाठ्यक्रम: GS-2: सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे — स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन GS-1: जनसंख्या और संबंधित मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक मुद्दे GS-2: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप; उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे
🎯 चर्चा में क्यों? केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 29 मई को NFHS-6 (2023–24) की प्रारंभिक तथ्य पत्रक जारी की गई, जिसमें मणिपुर को छोड़कर हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लगभग 6.8 लाख परिवारों का डेटा शामिल है। इस सर्वेक्षण में NFHS-5 के 131 की तुलना में 101 संकेतक हैं — 30 संकेतकों की शुद्ध कमी। हटाए गए प्रमुख संकेतकों में एनीमिया, शिशु और बाल मृत्यु दर, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छता कवरेज और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन का उपयोग शामिल है — जो भारत के स्वास्थ्य डेटा पारिस्थितिकी तंत्र की निरंतरता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

⚡ मुख्य तर्क

NFHS-6 बाल पोषण, मातृ देखभाल, संस्थागत प्रसव और महिलाओं के इंटरनेट उपयोग में वास्तविक लाभ दर्ज करता है — लेकिन इसकी प्रारंभिक तथ्य पत्रक पिछले दौर की तुलना में पतली है, जिसमें एनीमिया, मृत्यु दर, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छता और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन जैसे प्रमुख संकेतकों को हटा दिया गया है। इनमें से कई लंबे समय से चल रहे संकेतक हैं जो सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों के प्रत्यक्ष माप के रूप में कार्य करते हैं। इन्हें हटाने से शिशु मृत्यु दर, स्वच्छता कवरेज, जन्म के समय लिंगानुपात, कैंसर स्क्रीनिंग दर, या व्यापक एचआईवी ज्ञान के लिए कोई वर्तमान सर्वेक्षण-आधारित राष्ट्रीय आंकड़ा नहीं बचता है — ऐसी कमियां जिन्हें कोई अन्य एकल स्रोत उसी पैमाने पर नहीं भर सकता। NFHS को सार्वजनिक नीति और साक्ष्य-आधारित शासन को परिभाषित करने वाले प्राथमिक उपकरण के रूप में बने रहना चाहिए।

✅ NFHS-6 में क्या मिला — सकारात्मक निष्कर्ष

📈 NFHS-6 में दर्ज लाभ
  • प्रसवपूर्व देखभाल: कम से कम 4 प्रसवपूर्व जांच कराने वाली माताएं — NFHS-5 से लगभग 7 प्रतिशत अंक ऊपर।
  • संस्थागत प्रसव: वृद्धि दर्ज की गई — स्वास्थ्य सुविधाओं में अधिक प्रसव हो रहे हैं।
  • महिलाओं का इंटरनेट उपयोग: महत्वपूर्ण वृद्धि — नए डिजिटल साक्षरता और पहुंच संकेतक जोड़े गए।
  • पति द्वारा हिंसा: पति द्वारा हिंसा का अनुभव करने वाली महिलाओं की संख्या 29.3% से घटकर 22.3% हो गई।
  • 5 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चे जो स्टंटिंग का शिकार हैं: गिरावट आई — यह गिरावट 3 प्रतिशत अंक से कम थी।
  • स्वास्थ्य बीमा कवरेज: पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक वृद्धि — 33.7% से 88.2% परिवारों तक।
  • महिलाओं का इंटरनेट उपयोग: आंध्र प्रदेश में सबसे बड़ी वृद्धि — 21% से 63.6% तक।
📉 गिरावट और चिंताएं भी नोट की गईं
  • विशेष रूप से स्तनपान (6 महीने से कम): NFHS-5 से लगभग 8 प्रतिशत अंक नीचे।
  • आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग: 56.4% से घटकर 52.7% हो गया।
  • हरियाणा: छह महीने से कम आयु के शिशुओं में विशेष रूप से स्तनपान में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई — 69.5% से 41.2% तक।
  • अधिक वजन/मोटापे से ग्रसित महिलाएं: हर राज्य में हिस्सेदारी बढ़ी।

⚠️ NFHS-6 में क्या खोया — हटाए गए संकेतक

  • 30 संकेतकों की शुद्ध कमी: NFHS-6 में 101 संकेतक बनाम NFHS-5 में 131 हैं। 30 की शुद्ध गिरावट वास्तव में 43 संकेतकों को हटाए जाने और 13 को जोड़े जाने का संयोजन है।
  • एनीमिया: हटा दिया गया — आधिकारिक स्थिति यह है कि इसे डाइट और बायोमार्कर सर्वेक्षण (दिसंबर 2022 में लॉन्च किया गया, ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद द्वारा) के माध्यम से अलग से ट्रैक किया जाएगा। हटाने का कारण: एनीमिया को कैसे मापा गया था। NFHS ने एक पोर्टेबल एनालाइजर पर पढ़े गए फिंगर-प्रिक ब्लड सैंपल का उपयोग किया — कई पोषण शोधकर्ताओं का मानना है कि इसने अन्य सर्वेक्षणों द्वारा ली गई शिरापरक रक्त (venous blood) की तुलना में एनीमिया को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। एनीमिया में वृद्धि लगभग सार्वभौमिक थी — 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बाल एनीमिया बढ़ा।
  • तीन मृत्यु दर संकेतक: नवजात, शिशु और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को भी काट दिया गया है — लेकिन इन्हें सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) द्वारा ट्रैक किया जाएगा। SRS जिला-स्तरीय डेटा या NFHS में उपलब्ध सामाजिक-आर्थिक विवरण प्रदान नहीं कर सकता है।
  • जन्म के समय लिंगानुपात: कुल जनसंख्या का लिंगानुपात और जन्म के समय लिंगानुपात — NFHS-5 में 1,000 पुरुषों पर 929 महिलाएं — अब अनुपस्थित हैं, जिससे लिंग-चयनात्मक प्रथाओं का एक मानक संकेत हट गया है।
  • लंबे समय से चल रहे कार्यक्रम संकेतक हटाए गए: जिसमें खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन (NFHS-5 में 58.6% — प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना की सफलता का प्रत्यक्ष माप), शौचालय सुविधा तक पहुंच, मृत्यु पंजीकरण, स्वच्छता कवरेज शामिल हैं।
  • कैंसर स्क्रीनिंग संकेतक: केवल NFHS-5 में पेश किए गए — सर्वाइकल, स्तन और मौखिक कैंसर को कवर करने वाले — एक ही दौर के बाद गायब हो गए।

🔬 एनीमिया विवाद — इसे क्यों हटाया गया

एनीमिया माप के आसपास तकनीकी बहस
  • NFHS विधि: एक पोर्टेबल एनालाइजर पर पढ़ा गया फिंगर-प्रिक ब्लड सैंपल — कई पोषण शोधकर्ताओं का मानना है कि यह विधि अन्य सर्वेक्षणों द्वारा ली गई शिरापरक रक्त (venous blood) की तुलना में एनीमिया को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है
  • वृद्धि चिंताजनक थी: NFHS-4 (2015–16) और NFHS-5 (2019–21) के बीच, एनीमिया में सर्वत्र वृद्धि हुई। बच्चों में, एनीमिया की व्यापकता 58.6% से बढ़कर 67.1% हो गई; 15-49 आयु वर्ग की महिलाओं में, 53.1% से 57% तक; गर्भवती महिलाओं में, 50.4% से 52.2% तक।
  • आधिकारिक स्थिति: अब इस स्थिति को राष्ट्रीय पोषण संस्थान के तहत एक समर्पित डाइट और बायोमार्कर सर्वेक्षण के माध्यम से अलग से ट्रैक किया जाएगा।
  • समस्या: डाइट और बायोमार्कर सर्वेक्षण NFHS में उपलब्ध जिला-स्तरीय डेटा और सामाजिक-आर्थिक विवरण प्रदान नहीं कर सकता है — जिससे उप-राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण डेटा अंतराल बना रहता है।

📋 NFHS-6 में जोड़े गए नए संकेतक

  • डिजिटल साक्षरता: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, स्वयं सहायता समूह की सदस्यता, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय लेनदेन पर प्रश्न।
  • हेपेटाइटिस परीक्षण: महिलाओं और पुरुषों के बीच हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के लिए परीक्षण, साथ ही हेपेटाइटिस-बी परीक्षण के लिए 4-5 वर्ष की आयु के बच्चों से ड्राइड ब्लड स्पॉट संग्रह।
  • पुनर्परिभाषित संकेतक: महिलाओं के व्यक्तिगत रूप से घर या भूमि के स्वामित्व को परिवार-स्तरीय माप बना दिया गया है। तीन-खुराक हेपेटाइटिस-बी लाइन को जन्म-खुराक माप बना दिया गया है।
  • एचआईवी परीक्षण: जैविक एचआईवी परीक्षण को नैदानिक, एन्थ्रोपोमेट्रिक और जैव रासायनिक परीक्षण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में वापस लाया गया है।
🇮🇳 NFHS-6 से राज्य-स्तरीय मुख्य बातें
  • स्वास्थ्य बीमा कवरेज: पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक वृद्धि — 33.7% से 88.2% परिवारों तक।
  • महिलाओं का इंटरनेट उपयोग: आंध्र प्रदेश में सबसे बड़ी वृद्धि — 21% से 63.6% तक।
  • स्तनपान में गिरावट: हरियाणा में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई — छह महीने से कम आयु के शिशुओं में 69.5% से 41.2% तक।
  • राज्य-स्तरीय संकेतक: स्वास्थ्य बीमा और कैंसर-स्क्रीनिंग संकेतक, जो सर्वाइकल, स्तन और मौखिक कैंसर को कवर करते हैं — केवल NFHS-5 में पेश किए गए थे — एक ही दौर के बाद गायब हो गए हैं।
  • NFHS को कमीशन करने वाला: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय — जो सर्वेक्षण आयोजित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) को नामित करता है।

🔑 प्रमुख शब्दावली

NFHS-6 (2023–24) 101 संकेतक (NFHS-5 में 131 की तुलना में) 30 संकेतकों की शुद्ध कमी एनीमिया (हटाया गया — डाइट और बायोमार्कर सर्वेक्षण) सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) जन्म के समय लिंगानुपात (हटाया गया) IIPS (अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान) डाइट और बायोमार्कर सर्वेक्षण (ICMR-NIN) PM उज्ज्वला योजना (स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन संकेतक) फिंगर-प्रिक बनाम शिरापरक रक्त (एनीमिया माप)

✏ संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • "NFHS-6 की प्रारंभिक तथ्य पत्रक, जबकि वास्तविक स्वास्थ्य लाभ दर्ज करती है, लंबे समय से चल रहे संकेतकों को हटाकर महत्वपूर्ण अंतराल छोड़ देती है — जो साक्ष्य-आधारित स
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