The Hindu Editorial Today in Hindi 10 September 2026
UPSC CSE 2026, UPPSC & BPSC | The Hindu संपादकीय विश्लेषण (10 सितंबर 2026)
GS पेपर III विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी AI नैतिकता एवं बौद्धिक संपदा

Did OpenAI solve Navier-Stokes problem? भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता तथा अनुसंधान के भविष्य का विश्लेषण

प्रारंभिक: नेवियर-स्टोक्स समीकरण एवं मिलेनियम प्राइज प्रॉब्लम मुख्य: वैज्ञानिक शोध में AI बनाम अकादमिक श्रेय व डेटा नैतिकता राज्य PCS: उभरती प्रौद्योगिकियां एवं बौद्धिक संपदा अधिकार
1 संदर्भ: मिलेनियम प्राइज और OpenAI का दावा

10,000 AI एजेंट्स का दावा और अकादमिक जगत में टकराव

  • मूल घटना: OpenAI ने दावा किया कि 10,000 AI एजेंटों के एक समूह (Swarm) ने 88 घंटे निरंतर काम करके गणित की 7 मिलेनियम प्राइज समस्याओं में से एक—'नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व एवं सुचारूता (Existence & Smoothness) समस्या' को हल करने की दिशा में एक अभूतपूर्व दृष्टिकोण तैयार किया है।
  • अकादमिक चोरी (Scooping) का आरोप: प्रसिद्ध गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमैस्टर ने आरोप लगाया कि OpenAI का सिस्टम ठीक उसी गणितीय ढांचे पर पहुंचा जिस पर वे और लेवेंट अल्पोगे सक्रिय रूप से शोध कर रहे थे, जिसमें फोर्सिंग फंक्शन के साथ परिमित-समय ब्लो-अप (Finite-time blow-up) का उपयोग शामिल था।
  • डेटा गोपनीयता और नैतिक संकट: इस घटना ने भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता को केंद्र में ला दिया है, जिससे यह सवाल उठा है कि क्या GitHub Copilot/Codex जैसे टूल्स में शोधकर्ताओं द्वारा डाले गए निजी अनप्रकाशित डेटा का इस्तेमाल बिना सहमति के AI को प्रशिक्षित करने में किया गया।

नेवियर-स्टोक्स समीकरण क्या हैं?

200 वर्ष पूर्व न्यूटन के द्वितीय नियम (\(F=ma\)) के आधार पर विकसित ये समीकरण तरल पदार्थों (द्रव और गैस) के प्रवाह को निरंतर माध्यम (Continuum) मानकर समझाते हैं। सवाल यह है कि क्या 3D में इसके सुचारू समाधान हमेशा मौजूद रहते हैं।

कॉर्पोरेट AI बनाम खुला विज्ञान

बड़ी टेक कंपनियों का विशाल कंप्यूटिंग संसाधनों (Compute Power) पर एकाधिकार बनाम विश्वविद्यालयों की पारदर्शी पीयर-रिव्यू प्रणाली के बीच खुला टकराव शुरू हो गया है।

2 नैतिक, कानूनी एवं वैज्ञानिक निहितार्थ

अकादमिक श्रेय, डेटा गोपनीयता और गणितीय सत्यापन की चुनौतियां

  • डेटा का मूल स्रोत (Data Provenance): यदि वाणिज्यिक AI मॉडल क्लाउड वर्कस्पेस में शोधकर्ताओं के अप्रकाशित ड्राफ्ट को अवशोषित करते हैं, तो यह वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग के मूल विश्वास को नष्ट कर देगा।
  • गणितीय सटीकता बनाम AI मतिभ्रम (Hallucination): AI मॉडल संभावित परिकल्पनाएं उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन त्रुटिहीन औपचारिक प्रमाण (Rigorous Proofs) स्थापित करने के लिए मानव गणितज्ञों द्वारा गहन पीयर-वेरिफिकेशन अपरिहार्य है।
  • लेखकत्व (Authorship) का पुनर्निर्धारण: क्या AI को सह-लेखक माना जाए या केवल एक शोध उपकरण—यह विमर्श भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता के तहत नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
तुलनात्मक आयाम पारंपरिक अकादमिक गणित कॉर्पोरेट AI एजेंट स्वार्म (OpenAI दृष्टिकोण)
शोध पद्धति व्यक्तिगत/सहयोगात्मक मानव अंतर्ज्ञान, औपचारिक प्रमेय व्युत्पत्ति 10,000 समानांतर AI एजेंट जो विशाल संयोजी संभावनाओं (Combinatorial Space) को खोजते हैं
श्रेय एवं बौद्धिक संपदा खोज की प्राथमिकता, arXiv प्रीप्रिंट टाइमस्टैम्प, पीयर-रिव्यू अस्पष्ट प्रशिक्षण डेटा वंश (Data Lineage) के साथ मालिकाना एल्गोरिथम आउटपुट
पारदर्शिता पत्रिकाओं में सार्वजनिक रूप से प्रकाशित पूर्णतः पुनरुत्पादक चरण बंद कॉर्पोरेट बुनियादी ढांचे के भीतर ब्लैक-बॉक्स एजेंट प्रक्षेपवक्र
सत्यापन मानक विशेषज्ञ गणितीय समुदाय द्वारा चरण-दर-चरण गहन जांच स्वचालित कोड जांच और उसके बाद सीमित मानव समीक्षा
3 विज्ञान में जिम्मेदार AI के लिए नीतिगत रोडमैप

1. डेटा गोपनीयता संरक्षण

सख्त कानूनी नियम बनाए जाएं ताकि शोधकर्ताओं के निजी कोडबेस व शोध ड्राफ्ट का मॉडल प्रशिक्षण में अनधिकृत उपयोग न हो।

2. स्पष्ट श्रेय मानदंड

AI-सहायता प्राप्त गणितीय खोजों में प्राथमिकता और श्रेय निर्धारित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अकादमिक नियम तय हों।

3. सॉवरेन सुपरकंप्यूटिंग

सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड उपलब्ध कराया जाए ताकि निजी कंपनियों का एकाधिकार न रहे।

4. नैतिक शासन ढांचा

मूलभूत अनुसंधान की सुरक्षा के लिए भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता पर पारदर्शी दिशानिर्देश लागू किए जाएं।

भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता का समाधान इसलिए आवश्यक है क्योंकि AI अब केवल सहायक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रतिमानों का संचालक बन रहा है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice)
प्रश्न 1. नेवियर-स्टोक्स समीकरणों (Navier-Stokes Equations) और गणितीय भौतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. नेवियर-स्टोक्स समीकरण श्यान (viscous) तरल पदार्थों के प्रवाह का वर्णन करने के लिए न्यूटन के गति के दूसरे नियम को लागू करते हैं।
2. नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व और सुचारूता (Smoothness) समस्या क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट द्वारा नामित सात मिलेनियम प्राइज समस्याओं में से एक है।
3. ये समीकरण तरल पदार्थ को एक सतत माध्यम (Continuum) मानने के बजाय अलग-अलग उप-परमाणु कणों की गति को ट्रैक करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि नेवियर-स्टोक्स समीकरण तरल पदार्थों को असतत अणुओं के बजाय एक सतत माध्यम (Continuum) मानकर गतिशीलता का अध्ययन करते हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) निम्नलिखित में से क्या प्रभावी रूप से कर सकती है?

1. औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत कम करना
2. सार्थक लघु कथाएँ और गीत बनाना
3. रोगों का निदान (Disease diagnosis)
4. टेक्स्ट-टू-स्पीच रूपांतरण
5. विद्युत ऊर्जा का वायरलेस संचरण

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1, 2, 3 और 5    B) केवल 1, 2, 3 और 4    C) केवल 2, 4 और 5    D) 1, 2, 3, 4 और 5
  • A) केवल 1, 2, 3 और 5
  • B) केवल 1, 2, 3 और 4
  • C) केवल 2, 4 और 5
  • D) 1, 2, 3, 4 और 5
सही उत्तर: B — केवल 1, 2, 3 और 4

कथन 1, 2, 3 और 4 AI के स्थापित अनुप्रयोग हैं। कथन 5 गलत है क्योंकि विद्युत ऊर्जा का वायरलेस संचरण विद्युत चुंबकीय प्रेरण/भौतिकी सिद्धांतों द्वारा होता है, AI एल्गोरिदम द्वारा नहीं।

UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2023 — GS पेपर III (वास्तविक PYQ)

“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिए। AI वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में किस प्रकार मदद कर सकता है और इसके प्रसार से जुड़ी नैतिक चुनौतियाँ क्या हैं?” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“मौलिक विज्ञान में स्वायत्त AI एजेंट प्रणालियों की तैनाती ने उपकरण-आधारित अनुसंधान, डेटा नैतिकता और बौद्धिक संपदा के बीच की सीमाओं को धुंधला कर दिया है। भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता के संदर्भ में चर्चा कीजिए।”
प्रमुख संरचित बिंदु
  • प्रस्तावना: सहायक AI से स्वायत्त मल्टी-एजेंट सिस्टम की ओर बदलाव को रेखांकित करते हुए भारत में OpenAI नेवियर स्टोक्स AI विवाद और वैज्ञानिक नैतिकता का संदर्भ दें।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान में क्रांतिकारी क्षमता: विशाल डेटासेट का त्वरित विश्लेषण, जटिल गणितीय परिकल्पना निर्माण, औषधि खोज (Drug Discovery) और जटिल तरल गतिकी मॉडलिंग।
  • नैतिक एवं संस्थागत चुनौतियां: निजी क्लाउड वर्कस्पेस से डेटा स्क्रैपिंग का जोखिम, खुले अकादमिक शोध की अनधिकृत नकल, ब्लैक-बॉक्स एल्गोरिदम के कारण सत्यापन में कठिनाई और कंप्यूटिंग शक्ति का कॉर्पोरेट एकाधिकार।
  • आगे की राह: AI-सहायता प्राप्त खोजों के लिए अंतरराष्ट्रीय IP दिशानिर्देश तैयार करना, भारत में संप्रभु 'राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग अवसंरचना' का विस्तार और सख्त डेटा गोपनीयता कानून।
नेवियर-स्टोक्स मिलेनियम प्राइज AI नैतिकता वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा
GS पेपर II एवं III अंतरराष्ट्रीय संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं डी-डॉलरकरण

Trade between BRICS countries shows marked increase: भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली तथा ग्लोबल साउथ की वित्तीय स्वायत्तता

प्रारंभिक: 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, अंकटाड रिपोर्ट व BRICS Pay मुख्य: डी-डॉलरकरण बनाम पश्चिमी वित्तीय आधिपत्य व स्थानीय मुद्रा निपटान राज्य PCS: अंतरराष्ट्रीय व्यापार व बहुपक्षीय संस्थाएं
1 संदर्भ: नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

अंतः-समूह व्यापार में उछाल और गैर-डॉलर निपटान की दिशा

  • ऐतिहासिक आयोजन: भारत 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, जहां सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर राष्ट्रीय मुद्राओं में सीमा पार भुगतान तंत्र को अंतिम रूप दे रहे हैं।
  • व्यापार विस्तार के आंकड़े: संयुक्त UNCTAD-IMF रिपोर्ट के अनुसार, 10 सदस्यीय ब्रिक्स समूह का आपसी व्यापार तेजी से बढ़ा है और 2025 में वैश्विक व्यापारिक निर्यात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 25% तक पहुंच गई है।
  • डॉलर मध्यस्थता से मुक्ति: आपसी व्यापार में इस भारी वृद्धि ने भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली की आवश्यकता को अपरिहार्य बना दिया है ताकि महंगी डॉलर आधारित कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग से बचा जा सके।

आयात निर्भरता में बदलाव

चीन को छोड़कर, सभी ब्रिक्स सदस्य अपने कुल आयात का 30% से अधिक हिस्सा समूह के भीतर से प्राप्त करते हैं; ईरान अपने आयात का 65% और इथियोपिया 45% ब्रिक्स से करता है।

निर्यात विविधीकरण

पिछले एक दशक में रूस, भारत, यूएई, ब्राजील और चीन ने ब्रिक्स साझेदारों को अपने निर्यात को दो से चार गुना बढ़ा दिया है, जिससे दक्षिण-दक्षिण व्यापार मजबूत हुआ है।

2 डॉलर का चक्कर बनाम ब्रिक्स समर्पित भुगतान रेल

कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग प्रणाली और प्रतिबंधों का जोखिम

  • पारंपरिक प्रणाली की बाधा: दो उभरते देशों के बीच व्यापारिक निपटान के लिए वर्तमान में अमेरिकी मध्यस्थ बैंकों से गुजरना पड़ता है, जिससे घरेलू मुद्रा को पहले डॉलर और फिर गंतव्य मुद्रा में बदलना पड़ता है।
  • भू-राजनीतिक जोखिम: 2022 के यूक्रेन संघर्ष के बाद SWIFT के उपयोग पर प्रतिबंध और विदेशी मुद्रा भंडार की जब्ती ने एकल डॉलर प्रभुत्व प्रणाली के जोखिमों को उजागर किया।
  • संरचनात्मक परिवर्तन: भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली को लागू करने से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए प्रत्यक्ष निपटान संभव होगा।
वित्तीय मापदंड पारंपरिक डॉलर कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग प्रस्तावित ब्रिक्स सीमा पार भुगतान रेल (BRICS Pay)
निपटान माध्यम अमेरिकी डॉलर / यूरो (पश्चिमी क्लियरिंग हाउस CHIPS/Fedwire के माध्यम से) राष्ट्रीय मुद्राएं (INR, RMB, रूबल, दिरहम, रियाल, रैंड)
गति एवं लेनदेन लागत T+2 दिन का समय, दोहरी मुद्रा रूपांतरण शुल्क, मध्यस्थ बैंक कमीशन लगभग वास्तविक समय (Real-time) निपटान, प्रत्यक्ष द्विपक्षीय विनिमय दर
प्रतिबंधों से संवेदनशीलता अत्यधिक संवेदनशील (OFAC द्वारा एकतरफा प्रतिबंधों के अधीन) विकेंद्रीकृत, संप्रभु और तीसरे पक्ष के प्रतिबंधों से पूरी तरह सुरक्षित
वैश्विक आर्थिक भार पारंपरिक ब्रेटन वुड्स प्रणाली और अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा समर्थित 10 ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं जो वैश्विक GDP (PPP) का 35% से अधिक प्रतिनिधित्व करती हैं
3 भारत और ग्लोबल साउथ के लिए रणनीतिक रोडमैप

1. UPI का अंतरराष्ट्रीयकरण

भारत के UPI को यूएई के Aani, रूस के Mir और क्षेत्रीय भुगतान प्रणालियों के साथ निर्बाध रूप से जोड़ना।

2. वोस्ट्रो खातों का विस्तार

तेल, उर्वरक और प्रौद्योगिकी आयात के लिए विशेष रुपया वोस्ट्रो खातों (SRVA) का सभी ब्रिक्स साझेदारों में विस्तार।

3. NDB पूंजी का उपयोग

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) द्वारा स्थानीय मुद्रा बांड जारी कर विकासशील देशों के विनिमय जोखिम को कम करना।

4. संतुलित कूटनीति

पश्चिम विरोधी रुख अपनाए बिना भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाना।

भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली को सुदृढ़ करने से वैश्विक मौद्रिक झटकों के विरुद्ध देश की वित्तीय स्वायत्तता सुरक्षित होगी।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice)
प्रश्न 2. ब्रिक्स (BRICS) समूह और इसके वित्तीय संस्थानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), जिसे 2014 में ब्रिक्स द्वारा स्थापित किया गया था, का मुख्यालय शंघाई (चीन) में स्थित है।
2. आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) सदस्य देशों को भुगतान संतुलन संकट से निपटने हेतु अल्पकालिक तरलता सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
3. जनवरी 2024 में ब्रिक्स गठबंधन का आधिकारिक विस्तार हुआ जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

तीनों कथन सही हैं। NDB का मुख्यालय शंघाई में है; CRA एक वित्तीय सुरक्षा तंत्र है; और 2024 में ब्रिक्स का ऐतिहासिक विस्तार संपन्न हुआ, जिसके बाद इंडोनेशिया भी भागीदार बना।

🏆 UPSC CSE Prelims 2016 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

A) इसकी स्थापना फोर्टालेजा में आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों द्वारा की गई थी।
B) न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।
C) बैंक में ब्रिक्स के प्रत्येक सदस्य देश का मतदान अधिकार समान है।
D) NDB की सदस्यता केवल संस्थापक ब्रिक्स देशों तक ही सख्ती से सीमित है।
  • A) इसकी स्थापना फोर्टालेजा में हुई थी
  • B) मुख्यालय शंघाई में है
  • C) संस्थापक सदस्यों के पास समान मतदान अधिकार हैं
  • D) सदस्यता केवल संस्थापक सदस्यों तक सीमित है
सही उत्तर: D — सदस्यता केवल संस्थापक सदस्यों तक सीमित है

कथन D गलत है (और इसलिए सही उत्तर है)। NDB की सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों के लिए खुली है; बांग्लादेश, मिस्र, यूएई और उरुग्वे पहले ही इसमें शामिल हो चुके हैं।

UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2022 — GS पेपर II (वास्तविक PYQ)

“क्या आप मानते हैं कि ब्रिक्स पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को चुनौती देने के लिए एक प्रभावी बहुपक्षीय समूह के रूप में उभर सकता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“अंतः-ब्रिक्स व्यापार का विस्तार और सीमा पार भुगतान तंत्र की खोज ग्लोबल साउथ में डी-डॉलरकरण की ओर एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है। भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली के संदर्भ में भारत के लिए रणनीतिक निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए।”
प्रमुख संरचित बिंदु
  • प्रस्तावना: वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स की 25% हिस्सेदारी का उल्लेख करें और बताएं कि भारत में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार विस्तार और सीमा पार भुगतान प्रणाली बहुध्रुवीय वित्तीय व्यवस्था का निर्माण कर रही है।
  • आर्थिक प्रेरक तत्व: डॉलर मध्यस्थता से लेनदेन लागत में कमी, एकतरफा प्रतिबंधों से व्यापार का संरक्षण और स्थानीय मुद्राओं (रुपया, दिरहम, रूबल) की तरलता में वृद्धि।
  • चुनौतियां एवं कमियां: चीन के साथ भारी व्यापार घाटा, मुद्राओं की सीमित परिवर्तनीयता और समूह को पश्चिम विरोधी गुट बनने से बचाना।
  • भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण: व्यावहारिक द्विपक्षीय तंत्र (UPI-Aani, SRVA) को बढ़ावा देना और पश्चिमी साझेदारों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए वित्तीय संप्रभुता हासिल करना।
ब्रिक्स 2026 डी-डॉलरकरण सीमा पार भुगतान स्थानीय मुद्राएं
GS पेपर II द्विपक्षीय संबंध पश्चिम एशिया एवं ग्लोबल साउथ ढांचा

Turning economic cooperation into shared prosperity: भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग का रणनीतिक प्रभाव और साझा समृद्धि की दिशा

प्रारंभिक: भारत-यूएई CEPA, NDB वित्तपोषण व 2026 ब्रिक्स थीम मुख्य: आर्थिक पूरकता, कनेक्टिविटी और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन राज्य PCS: अंतरराष्ट्रीय संधियां एवं विदेश व्यापार
1 संदर्भ: ब्रिक्स में यूएई का रणनीतिक दृष्टिकोण

पूंजी, कनेक्टिविटी और ग्लोबल साउथ के विकास का सेतु

  • लेखक एवं दृष्टिकोण: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मामलों के राज्य मंत्री सईद बिन मुबारक अल हाजेरी ने जनवरी 2024 में ब्रिक्स में शामिल होने के बाद यूएई के दर्शन को रेखांकित किया: संवाद को ठोस, साझा आर्थिक समृद्धि में बदलना।
  • गैर-विभाजनकारी बहुपक्षवाद: यूएई ब्रिक्स को किसी पश्चिम विरोधी गुट के रूप में नहीं, बल्कि एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाले एक व्यावहारिक आर्थिक सेतु के रूप में देखता है।
  • द्विपक्षीय धुरी: भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग दक्षिण-दक्षिण आर्थिक पूरकता (Economic Complementarity) के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करता है।

CEPA व्यापार में भारी उछाल

2025 में दोनों देशों के बीच गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार 17% बढ़कर $76 बिलियन को पार कर गया, और 2032 तक इसे $200 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है।

यूएई की आर्थिक ताकत

गैर-तेल क्षेत्र यूएई की GDP का लगभग 79% उत्पन्न करते हैं, जिसे $2.9 ट्रिलियन के सॉवरेन वेल्थ फंड और 38 वैश्विक व्यापार समझौतों का समर्थन प्राप्त है।

2 भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता: बयानबाजी से परे ठोस परिणाम

लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर बल

  • 2026 अध्यक्षता की प्राथमिकताएं: भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स का ध्यान व्यावहारिक परिणामों पर है: आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, MSME नवाचार, सतत बुनियादी ढांचा और व्यापार सुगमता।
  • विकास वित्तपोषण का इंजन: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने $40 बिलियन से अधिक के विकास वित्तपोषण को मंजूरी दी है, जिससे हरित ऊर्जा और रसद गलियारों को समर्थन मिला है।
  • पारंपरिक व्यापार से परे: भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग कच्चे तेल से आगे बढ़कर फिनटेक (UPI-Aani), शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी गलियारों में विस्तारित हुआ है।
सहयोग का स्तंभ पारंपरिक द्विपक्षीय संबंध आधुनिक भारत-यूएई CEPA एवं ब्रिक्स ढांचा
व्यापार संरचना हाइड्रोकार्बन-प्रधान (कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद) 79% गैर-तेल फोकस: कीमती धातुएं, खाद्य गलियारा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेवाएं
वित्तीय कनेक्टिविटी पारंपरिक तीसरे पक्ष की डॉलर आधारित इनवॉइसिंग स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS), रुपया-दिरहम प्रत्यक्ष व्यापार, एकीकृत भुगतान गेटवे
निवेश ढांचा रियल एस्टेट/बांड में निष्क्रिय पोर्टफोलियो निवेश भारतीय लॉजिस्टिक्स, बंदरगाहों और नवीकरणीय ऊर्जा में यूएई संप्रभु कोष ($2.9T) का सक्रिय निवेश
रणनीतिक तालमेल केवल द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं तक सीमित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और ब्रिक्स का सह-नेतृत्व
3 स्थायी समृद्धि के लिए रणनीतिक रोडमैप

1. $200B का व्यापार लक्ष्य

2032 तक गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और टैरिफ छूटों में तेजी लाना।

2. संप्रभु पूंजी निवेश

यूएई के फंड्स (ADIA, मुबादला) को भारत के राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) और सेमीकंडक्टर निर्माण में आकर्षित करना।

3. खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा

यूएई-भारत खाद्य गलियारे (Food Corridor) को पूरी तरह क्रियान्वित करना और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को गति देना।

4. बहुपक्षीय सहयोग

भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग को पूरे ग्लोबल साउथ के विकास और स्थिरता के लिए आधारशिला बनाना।

भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग का विस्तार व्यावहारिक और विकास-उन्मुख कूटनीति के लिए एक वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice)
प्रश्न 3. भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारत-यूएई CEPA मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र के किसी देश के साथ भारत का पहला व्यापक मुक्त व्यापार समझौता था।
2. इस समझौते में एक समर्पित स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली शामिल है जो भारतीय रुपये (INR) और यूएई दिरहम (AED) में द्विपक्षीय व्यापार की अनुमति देती है।
3. समझौते के तहत, दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक $200 बिलियन का गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

तीनों कथन सही हैं। भारत-यूएई CEPA (मई 2022 में प्रभावी) MENA क्षेत्र में भारत का पहला FTA है; इसमें LCS प्रणाली चालू है; और 2032 तक $200B गैर-तेल व्यापार का लक्ष्य रखा गया है।

🏆 UPSC CSE Prelims 2017 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. भारत द्वारा किए गए 'व्यापक आर्थिक सहयोग/साझेदारी समझौतों' (CECA/CEPA) की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?

1. वे वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवाओं के व्यापार को भी कवर करते हैं।
2. उनमें आमतौर पर निवेश और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित प्रावधान होते हैं।
3. वे बिना किसी बहिष्करण सूची (Exclusion list) के सभी आयातित कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क अनिवार्य करते हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1 और 2    B) केवल 2 और 3    C) केवल 1 और 3    D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि CEPA/CECA में संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों की सुरक्षा के लिए नकारात्मक/बहिष्करण सूची (Negative List) रखी जाती है जहां शून्य शुल्क लागू नहीं होता।

UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2021 — GS पेपर II (वास्तविक PYQ)

“भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पश्चिम एशिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसके आर्थिक और रणनीतिक महत्व का परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“ब्रिक्स जैसे विस्तारित बहुपक्षीय मंचों में आर्थिक सहयोग तभी सफल होता है जब वह मजबूत द्विपक्षीय तालमेल और व्यावहारिक कनेक्टिविटी पर आधारित हो। भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग के प्रकाश में चर्चा कीजिए।”
प्रमुख संरचित बिंदु
  • प्रस्तावना: यूएई के आर्थिक विविधीकरण और भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता की प्राथमिकताओं के तालमेल को दर्शाते हुए भारत में यूएई भारत साझेदारी और ब्रिक्स आर्थिक सहयोग का परिचय दें।
  • आर्थिक एवं व्यापार गतिशीलता: गैर-तेल व्यापार में 17% वृद्धि (2025 में $76B+); 2032 तक $200B का लक्ष्य; स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS); NDB सह-वित्तपोषण।
  • कनेक्टिविटी एवं मूल्य श्रृंखलाएं: लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (बंदरगाह, विमानन, IMEC); हरित ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा पार्कों और डिजिटल बुनियादी ढांचे में यूएई का संप्रभु पूंजी निवेश।
  • आगे की राह: ब्रिक्स के भीतर गैर-विभाजनकारी मॉडल प्रस्तुत करना; वित्तीय प्रौद्योगिकियों (UPI-Aani) का सामंजस्य स्थापित करना; और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना।
भारत-यूएई CEPA ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 स्थानीय मुद्रा निपटान ग्लोबल साउथ

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (10 सितंबर 2026 FAQs)

1. गणित में नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व और सुचारूता (Smoothness) समस्या क्या है?
नेवियर-स्टोक्स समीकरण न्यूटन के दूसरे नियम के आधार पर श्यान तरल पदार्थों (जैसे पानी और वायु) की गति का वर्णन करते हैं। क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट द्वारा $1 मिलियन के पुरस्कार वाली मिलेनियम प्राइज प्रॉब्लम यह गणितीय रूप से सिद्ध करने की मांग करती है कि क्या 3D में सुचारू, भौतिक रूप से उचित समाधान हमेशा मौजूद रहते हैं या वे किसी बिंदु पर टूट (Blow-up) जाते हैं।
2. नेवियर-स्टोक्स पर OpenAI की सफलता के दावे ने अकादमिक विवाद क्यों पैदा किया?
गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमैस्टर ने आरोप लगाया कि OpenAI के आंतरिक 10,000-एजेंट AI सिस्टम ने उसी गणितीय दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया जिस पर वे और लेवेंट अल्पोगे सक्रिय रूप से शोध कर रहे थे। इसने इस बात पर गंभीर नैतिक सवाल खड़े किए कि क्या निजी शोध डेटा (Codex/क्लाउड वर्कस्पेस) का उपयोग बिना अनुमति के AI को प्रशिक्षित करने में किया गया।
3. 2025-2026 तक वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों का कितना हिस्सा है?
10 सदस्य देशों के विस्तार के बाद, ब्रिक्स देशों ने 2025 में वैश्विक व्यापारिक निर्यात का लगभग 25% हिस्सा कवर किया, जिससे डॉलर-मुक्त वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की आर्थिक आवश्यकता और मजबूत हुई है।
4. 18वें नई दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले ब्रिक्स सीमा पार भुगतान प्रणाली पर जोर क्यों दिया जा रहा है?
ब्रिक्स सीमा पार भुगतान प्रणाली लेनदेन को अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी मध्यस्थ बैंकों (Correspondent Banks) से गुजारे बिना राष्ट्रीय मुद्राओं में प्रत्यक्ष निपटान की सुविधा देती है, जिससे लागत कम होती है और एकतरफा भू-राजनीतिक प्रतिबंधों से सुरक्षा मिलती है।
5. CEPA के तहत भारत और यूएई ने गैर-तेल व्यापार का क्या लक्ष्य रखा है?
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत, 2025 में भारत-यूएई गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार 17% बढ़कर $76 बिलियन को पार कर गया, और दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक इसे $200 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
तैयार किया गया: Todays Current Affairs | UPSC CSE, UPPSC & BPSC संपादकीय विश्लेषण (10 सितंबर 2026)
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