अस्पष्ट चंदे और लेटरहेड पार्टियों की बढ़ती संख्या
- खोजी रिपोर्ट का खुलासा: एक हालिया जांच में सामने आया कि गुजरात स्थित केवल छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग ₹1,700 करोड़ का भारी चंदा मिला—जो पांच प्रमुख राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दलों (भाजपा के ₹1,480 करोड़ को छोड़कर) के कुल चंदे से भी अधिक था।
- आयकर छूट का दुरुपयोग: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A के तहत, राजनीतिक दलों को स्वैच्छिक योगदान पर 100% कर छूट प्राप्त है, बशर्ते वे ऑडिट किए गए खाते रखें और वार्षिक रिपोर्ट जमा करें।
- गंभीर गैर-अनुपालन: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अनुसार, केवल 26% RUPPs ही चुनाव आयोग को वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सौंपते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों RUPPs का नियमन और चुनावी सुधार कितना आवश्यक है।
पंजीकरण बनाम मान्यता
RPA 1951 की धारा 29A के तहत 100 मतदाता पार्टी बना सकते हैं। मान्यता के लिए आम चुनावों में न्यूनतम वोट प्रतिशत (6% वोट + 2 विधायक/1 सांसद) जीतना आवश्यक है।
डी-पंजीकरण की कानूनी कमी
इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर (2002) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के पास दलों का पंजीकरण रद्द करने की वैधानिक शक्ति नहीं है।
मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी स्टार प्रचारक और नियामक गतिरोध
- हवाला और काले धन का माध्यम: निष्क्रिय 'लेटर-पैड' पार्टियों का उपयोग शेल कंपनियों द्वारा कमीशन लेकर बेहिसाब काले धन को सफेद चंदे में बदलने के लिए किया जाता है।
- विशेषाधिकारों का दुरुपयोग: RUPPs को कर छूट, साझा चुनाव चिन्ह और 20 स्टार प्रचारकों की पात्रता मिलती है, जिनके यात्रा खर्च को उम्मीदवार की चुनावी खर्च सीमा से बाहर रखा जाता है।
- नियामक गतिरोध: विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट ने RPA, 1951 में संशोधन कर चुनाव आयोग को निष्क्रिय दलों को डी-रजिस्टर करने का अधिकार देने की वकालत की, जो भारत में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों RUPPs का नियमन और चुनावी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है।
| नियामक आयाम | मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय / राज्य दल | पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल (RUPPs) |
|---|---|---|
| पात्रता मानदंड | कड़ा चुनावी प्रदर्शन (6% वोट शेयर + न्यूनतम सीटें) | RPA 1951 की धारा 29A के तहत केवल प्रशासनिक पंजीकरण |
| कर छूट की सुविधा | कड़े सार्वजनिक ऑडिट और अनिवार्य वार्षिक फाइलिंग के अधीन | 74% से अधिक ऑडिट गैर-अनुपालन के बावजूद धारा 13A कर छूट प्राप्त |
| स्टार प्रचारक कोटा | आम चुनावों में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक | अधिकतम 20 स्टार प्रचारक (अक्सर व्यावसायिक रूप से मुद्रीकृत) |
| आयोग द्वारा दंडात्मक कार्रवाई | मान्यता समाप्त हो सकती है (गैर-मान्यता प्राप्त दल बन जाते हैं) | 'निष्क्रिय' या असूचीबद्ध किया जा सकता है, लेकिन पंजीकरण रद्द नहीं हो सकता |
1. कर छूट हेतु वोट सीमा
धारा 13A आयकर छूट को चुनाव लड़ने और कम से कम 1% वैध मत प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त से जोड़ना।
2. वैधानिक डी-पंजीकरण शक्ति
RPA 1951 की धारा 29A में संशोधन कर चुनाव आयोग को 5+ वर्षों से निष्क्रिय दलों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देना।
3. अंतर-एजेंसी समन्वय
ECI, सीबीडीटी (CBDT) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के बीच स्वचालित डिजिटल डेटा साझाकरण स्थापित करना।
4. अनिवार्य सार्वजनिक प्रकटीकरण
भारत में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों RUPPs का नियमन और चुनावी सुधार लागू करने के लिए सभी चंदों का डिजिटल पोर्टल पर अनिवार्य प्रकाशन।
व्यापक भारत में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों RUPPs का नियमन और चुनावी सुधार लागू करने से राजनीतिक फंडिंग में शुद्धता आएगी और लोकतंत्र में जनता का विश्वास बहाल होगा।
1. राजनीतिक दलों का पंजीकरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत किया जाता है।
2. सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन नेशनल कांग्रेस बनाम इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर (2002) मामले में माना कि चुनाव आयोग के पास दलों का पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति है।
3. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A के तहत राजनीतिक दलों को स्वैच्छिक चंदे पर 100% आयकर छूट प्राप्त होती है, बशर्ते वे ऑडिटेड खाते रखें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग के पास RPA 1951 के तहत दलों का पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति नहीं है, जब तक कि पंजीकरण धोखाधड़ी से न कराया गया हो या पार्टी भंग न हो गई हो।
1. भारत निर्वाचन आयोग पांच सदस्यीय निकाय है।
2. केंद्रीय गृह मंत्रालय आम चुनाव और उपचुनाव दोनों के संचालन के लिए चुनाव कार्यक्रम तय करता है।
3. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के विभाजन/विलय से संबंधित विवादों को चुनाव आयोग सुलझाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 C) केवल 2 और 3 D) केवल 3
सही उत्तर: D — केवल 3
कथन 1 गलत है (ECI में 1 मुख्य चुनाव आयुक्त और 2 चुनाव आयुक्त = 3 सदस्य होते हैं)। कथन 2 गलत है (चुनाव कार्यक्रम ECI तय करता है, गृह मंत्रालय नहीं)। कथन 3 सही है (चुनाव चिन्ह आदेश, 1968 के तहत)।
UPSC CSE मुख्य परीक्षा 2020 — GS पेपर II (वास्तविक PYQ)
मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)
प्रमुख संरचित बिंदु
- प्रस्तावना: RPA 1951 की धारा 29A के तहत RUPPs को परिभाषित करें और गुजरात में ₹1,700 करोड़ चंदे के मामले का उल्लेख करते हुए भारत में गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों RUPPs का नियमन और चुनावी सुधार का परिचय दें।
- नियामक कमियां: डी-रजिस्ट्रेशन शक्तियों का अभाव (2002 SC फैसला); कम अनुपालन (केवल 26% ऑडिट फाइलिंग); धारा 13A कर छूट और स्टार प्रचारक नियमों का मनी लॉन्ड्रिंग हेतु दुरुपयोग।
- संस्थागत व विधि आयोग के सुझाव: RPA में संशोधन कर ECI को स्पष्ट डी-पंजीकरण शक्तियां देना; कर छूट के लिए 1% वोट की अनिवार्यता; CAG-पैनलबद्ध स्वतंत्र ऑडिटिंग।
- आगे की राह: ECI-CBDT-FIU का डिजिटल एकीकरण; फर्जी राजनीतिक दलों के गठन पर आपराधिक दंड; और पारदर्शी डिजिटल राज्य चुनावी फंडिंग की ओर कदम।