The Hindu Editorial Today in Hindi 17 September 2026
UPSC सिविल सेवा & State PCS | The Hindu संपादकीय विश्लेषण (17 September 2026)
GS Paper III पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी जैव विविधता व वन्यजीव संरक्षण

घास के मैदानों का स्वास्थ्य संकेतक: भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी

Prelims: Porcula salvania, मानस NP, IUCN रेड लिस्ट Mains: वन्यजीव संरक्षण एवं घास के मैदान पारिस्थितिकी State PCS: पूर्वोत्तर जैव विविधता व वन नीतियां
1 पारिस्थितिक स्थिति और अंब्रेला प्रजाति (Umbrella Species) का महत्व

संपादकीय के मुख्य निष्कर्ष व प्रजाति प्रोफ़ाइल

  • एकमात्र जीवित प्रजाति: पिग्मी हॉग (Porcula salvania) Porcula वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति तथा विश्व का सबसे छोटा और दुर्लभ जंगली सुअर (Suid) है।
  • बाढ़ के मैदानों का स्वास्थ्य संकेतक: यह प्रजाति अपने भोजन, छिपने और प्रजनन के लिए सघन एवं ऊंचे जलोढ़ घास के मैदानों पर पूरी तरह निर्भर है; पिग्मी हॉग की आबादी का संकट सीधे तौर पर नदीय मैदानों के क्षरण को दर्शाता है।
  • अंब्रेला संरक्षण लाभ: भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के तहत किए जाने वाले प्रयासों से बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican), हिस्पिड खरगोश (Hispid Hare), हॉग डियर और एक सींग वाले गैंडे जैसी सह-अस्तित्व वाली संकटग्रस्त प्रजातियों को स्वतः संरक्षण मिलता है।
  • कैप्टिव ब्रीडिंग की सफलता: 1995 में शुरू किए गए कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम (दुरेल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट, असम वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा) ने पिछले 3 दशकों में सीमित संस्थापक स्टॉक से आबादी को 32 गुना बढ़ा दिया है।
32 गुना
कैप्टिव ब्रीडिंग वृद्धि (1995-2026)
~250 जंगली
प्राकृतिक आवास आबादी (2025)
300 (2040)
जंगली पुनर्बहाली का लक्ष्य
2 पारिस्थितिक खतरे व आनुवंशिक विविधता की चुनौतियां

आवास विखंडन व अतिक्रमण

कृषि विस्तार, चाय बागानों, बाढ़ नियंत्रण तटबंधों, आक्रामक खरपतवारों और शुष्क मौसम में अवैज्ञानिक तरीके से घास जलाने की प्रथा ने इनके सूक्ष्म-पर्यावास को भारी नुकसान पहुंचाया है।

संक्रामक रोग व इनब्रीडिंग

एक छोटे संस्थापक समूह से प्रजनन के कारण भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी में वंशावली ट्रैकिंग और स्वाइन रोगों से सुरक्षा हेतु सख्त बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक है।

3 संरक्षित घास के मैदानों का रणनीतिक रोडमैप

1. पानबारी गढ़

मानस राष्ट्रीय उद्यान के पानबारी घास के मैदान में अंतिम प्राकृतिक रूप से जीवित आबादी का पूर्ण संरक्षण।

2. नए पुनर्वास क्षेत्र

ओरंग राष्ट्रीय उद्यान, सोनाई रूपाई अभयारण्य, रूपाही और कंचनबारी में पिग्मी हॉग की व्यवहार्य आबादी का विस्तार।

3. वैज्ञानिक पर्यावास प्रबंधन

घास के मैदानों में वृक्षों और झाड़ियों के अतिक्रमण को रोकने के लिए भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के तहत नियंत्रित अग्नि प्रबंधन लागू करना।

4. 2040 का दृष्टिकोण

जंगली आबादी को 300 से अधिक पहुंचाना और असम के दुआर क्षेत्र में निरंतर पारिस्थितिक गलियारों (Corridors) का पुनर्निर्माण करना।

दीर्घकालिक विकासवादी स्वास्थ्य केवल कृत्रिम बीमा आबादी पर निर्भर नहीं रह सकता; भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी को प्राकृतिक जलोढ़ पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली से जोड़ना होगा।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q1. पिग्मी हॉग (Porcula salvania) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. यह Porcula वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति है और भारतीय उपमहाद्वीप के ऊंचे जलोढ़ घास के मैदानों के लिए स्थानिक (Endemic) है।
2. भारत में, इसकी अंतिम प्राकृतिक रूप से जीवित निरंतर जंगली आबादी मानस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है।
3. इसे IUCN रेड लिस्ट में 'संवेदनशील' (Vulnerable) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची II में रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि पिग्मी हॉग IUCN रेड लिस्ट में 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त / संकटग्रस्त' (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण) के अंतर्गत संरक्षित है। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2012 (वास्तविक PYQ)
Q. असम में स्थित मानस राष्ट्रीय उद्यान की निम्नलिखित में से कौन-सी अनूठी विशेषताएं हैं?

1. यह एक यूनेस्को प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल है।
2. यह संकटग्रस्त पिग्मी हॉग और गोल्डन लंगूर का प्राकृतिक आवास है।
3. यह भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क के साथ निरंतर सीमा साझा करता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1 और 2    B) केवल 2 और 3    C) केवल 1 और 3    D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

मानस राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व, टाइगर रिजर्व और हाथी रिजर्व है जो भूटान के साथ सीमा साझा करता है और पिग्मी हॉग, हिस्पिड हेयर और गोल्डन लंगूर का प्रमुख आवास है।

UPSC CSE Mains 2020 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)

“भारत में जैव विविधता किस प्रकार भिन्न है? संकटापन्न वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में इन-सिटू (In-situ) और एक्स-सिटू (Ex-situ) संरक्षण पद्धतियों की क्या भूमिका है?” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“भारत में वन पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में घास के मैदानों को बहुत कम संरक्षण प्राथमिकता प्राप्त है। पिग्मी हॉग की बहाली के आलोक में जलोढ़ घास के मैदानों के संरक्षण की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: नदीय घास के मैदानों के ध्वजवाहक (Flagship) के रूप में भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के महत्व को स्पष्ट करना।
  • पारिस्थितिक चुनौतियां: अवैज्ञानिक अग्नि चक्र, अत्यधिक मवेशी चराई, बांधों से जल-प्रवाह में बदलाव, आक्रामक वनस्पति (उदा. Mikania micrantha) और घास के मैदानों को 'बंजर भूमि' मानने की प्रशासनिक नीति।
  • पारिस्थितिक मूल्य: बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और अंब्रेला प्रजातियों (बंगाल फ्लोरिकन, एक सींग वाला गैंडा) को आवास सुरक्षा।
  • आगे की राह: राष्ट्रीय घास का मैदान नीति का गठन, बफर गलियारों का वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानीय समुदायों का पारिस्थितिक पुनरुद्धार में समावेशन।
पिग्मी हॉग मानस राष्ट्रीय उद्यान जलोढ़ घास मैदान एक्स-सिटू ब्रीडिंग
GS Paper II भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन राजकोषीय संघवाद व संवैधानिक कानून

राज्यों के प्रति असंतुलन: एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद

Prelims: राज्य सूची प्रविष्टि 49 व 50, MADA 2024 निर्णय Mains: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध व खनिज नीति State PCS: ओडिशा, झारखंड, छग के खनिज राजस्व
1 धारा 9D का विवाद व केंद्र-राज्य टकराव

अशोक कुमार पांडा और अनिरुद्ध पुरुषोथम का कानूनी विश्लेषण

  • धारा 9D का मुख्य प्रावधान: खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 की धारा 9D राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर केंद्र की पूर्व-स्वीकृति के बिना नए कर/उपकर लगाने से रोकती है।
  • केंद्र सरकार का तर्क: संघ का दावा है कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद निवेशकों के लिए पूर्वानुमेय कर ढांचा (Predictable Tax Environment) बनाएगा और अत्यधिक राज्य कराधान को रोकेगा।
  • राज्यों पर नकारात्मक बाह्यताएं (Negative Externalities): खनिज-समृद्ध राज्य (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक) खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरणीय क्षति और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की भारी टूट-फूट का वहन करते हैं।
  • राजकोषीय स्वास्थ्य पर प्रभाव: नीति आयोग का राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक दर्शाता है कि खनिज राजस्व इन राज्यों के गैर-कर राजस्व (Non-tax revenue) की रीढ़ है।
2 संवैधानिक द्वंद्व: प्रविष्टि 49 व 50 बनाम 9-जजों का ऐतिहासिक निर्णय
संवैधानिक आयाम राज्य सूची (सूची II) का अधिदेश MMDR 2026 धारा 9D का प्रभाव
प्रविष्टि 50 (खनिज अधिकार) संसद द्वारा खनिज विकास पर बनाए गए कानूनों के अधीन राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति। राज्यों को स्वतंत्र खनिज उपकर ढांचे लागू करने से प्रतिबंधित करती है।
प्रविष्टि 49 (भूमि व भवन) भूमि और भवनों पर कर लगाने का राज्यों का अनन्य और पूर्ण विधायी अधिकार। खनिज-युक्त भूमि पर भी केंद्रीय नियंत्रण लागू कर प्रविष्टि 49 का अतिक्रमण करती है।
2024 MADA निर्णय (SC) 9-जजों की संविधान पीठ ने माना कि रॉयल्टी कर नहीं है और राज्यों को खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के प्रभाव को निष्प्रभावी करने का जोखिम उत्पन्न करता है।
3 संघीय संतुलन व असमान संसाधन बोझ

राजकोषीय स्वायत्तता के बिना दायित्व

खनन राज्यों को सामाजिक पुनर्वसन और पर्यावरणीय लागत उठानी पड़ती है। एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद के तहत कराधान सीमित करने से राज्यों में ढांचागत राजकोषीय घाटा बढ़ेगा।

पूर्वानुमेयता बनाम संघीय संप्रभुता

यद्यपि निवेश के लिए एकरूपता आवश्यक है, लेकिन एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद को राज्य विधानसभाओं के संवैधानिक अधिकारों की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q2. भारत में खनिजों पर विधायी एवं कराधान शक्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. राज्य सूची की प्रविष्टि 50 के अंतर्गत, राज्य विधानमंडल को संसद द्वारा खनिज विकास पर बनाए गए कानूनों के अधीन खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति प्राप्त है।
2. सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MADA) मामले में निर्णय दिया कि MMDR अधिनियम के तहत देय रॉयल्टी एक प्रकार का 'कर' है।
3. राज्य सूची की प्रविष्टि 49 राज्य विधानमंडलों को खनिज-युक्त भूमि सहित सभी भूमि और भवनों पर कर लगाने का पूर्ण अधिकार देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 1 और 3
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

कथन 2 गलत है क्योंकि 2024 में 9-जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि रॉयल्टी खनिजों के निष्कर्षण के लिए एक सांविधिक भुगतान/प्रतिफल है, यह 'कर' (Tax) नहीं है। कथन 1 और 3 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2016 (वास्तविक PYQ)
Q. भारत में जिला खनिज प्रतिष्ठान (District Mineral Foundation - DMF) का/के क्या उद्देश्य है/हैं?

1. खनिज संपन्न जिलों में खनिज अन्वेषण गतिविधियों को बढ़ावा देना।
2. खनन कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों के हितों की रक्षा करना।
3. बड़े पैमाने पर खनन के लिए लाइसेंस अधिकृत करना।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1 और 2    B) केवल 2    C) केवल 1 और 3    D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2

DMFs की स्थापना MMDR अधिनियम की धारा 9B के तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों और व्यक्तियों के कल्याण व हितों की सुरक्षा हेतु की गई थी।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper II (वास्तविक PYQ)

“राजकोषीय संघवाद को संरक्षित करने और केंद्र-राज्य विधायी संघर्षों को हल करने में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण है। समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“भारत में खनिज कराधान के केंद्रीकरण के संवैधानिक और राजकोषीय निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए। क्या व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) के आधार पर राज्यों की कराधान शक्तियों को सीमित करना उचित है?”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: सुप्रीम कोर्ट के 2024 के 9-जजों के निर्णय के उपरांत एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 धारा 9D और खनिज कराधान संघवाद से उत्पन्न संवैधानिक बहस को रेखांकित करना।
  • केंद्रीकरण के पक्ष में तर्क: कर मुकदमों में कमी, खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन और राष्ट्रीय स्तर पर खनिज मूल्यों में स्थिरता।
  • संघीय व संवैधानिक आपत्तियां: प्रविष्टि 49 का अतिक्रमण, पर्यावरणीय व सामाजिक लागत झेलने वाले मेजबान राज्यों को संसाधन किराए (Resource Rents) से वंचित करना तथा सहकारी संघवाद का क्षरण।
  • आगे की राह: एकतरफा प्रतिबंधों के बजाय जीएसटी परिषद की तर्ज पर 'राष्ट्रीय खनिज समन्वय परिषद' की स्थापना।
MMDR Act 2026 धारा 9D राजकोषीय संघवाद MADA निर्णय
GS Paper III भारतीय अर्थव्यवस्था एवं कृषि ऊर्जा सुरक्षा व व्यापार गतिशीलता

E20 लक्ष्य से परे के आयाम: भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा

Prelims: E20 पेट्रोल, गन्ना व मक्का फीडस्टॉक, OMCs Mains: ऊर्जा नीति, खाद्य सुरक्षा व उत्सर्जन संतुलन State PCS: कृषि-अर्थशास्त्र व ईंधन मूल्य निर्धारण
1 E20 के दावे बनाम जमीनी आर्थिक वास्तविकताएं

रोहित आजाद, शौविक चक्रवर्ती व इंद्रनील चौधरी का आर्थिक विश्लेषण

  • ईंधन संरचना: E20 पेट्रोल में 20% निर्जल इथेनॉल और 80% मोटर गैसोलीन का मिश्रण होता है, जिसे 6 फरवरी 2023 से चरणबद्ध रूप से पूरे देश में लागू किया गया।
  • नीतिगत वादे: इस नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और कच्चे तेल के आयात बिल में विदेशी मुद्रा की बचत करना था।
  • माइलेज में गिरावट: इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (कैलोरी मान) शुद्ध पेट्रोल से कम होता है। सड़क परिवहन मंत्री ने लोकसभा में 2% से 6% तक माइलेज में कमी की पुष्टि की है (2022 से पुराने वाहनों में यह गिरावट और अधिक है)।
  • उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ: भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा पर शोध दर्शाता है कि माइलेज नुकसान के कारण पिछले 3 वर्षों में भारतीय वाहन चालकों को ₹88,234 करोड़ का अतिरिक्त ईंधन खरीदना पड़ा।
₹88,234 Cr
उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त ईंधन बोझ
2% - 6%
वाहनों के माइलेज में गिरावट
+50 gCO2
पुराने वाहनों में प्रति 15km शुद्ध उत्सर्जन वृद्धि
2 कृषि, व्यापार संतुलन और खाद्य सुरक्षा के प्रभाव
कृषि जिंस (Commodity) बाजार व व्यापार पर असर समष्टिगत आर्थिक निहितार्थ
गन्ना (Sugarcane) इथेनॉल की ओर मोड़ने से घरेलू उपलब्धता घटी, जिसके कारण 2023 से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा और निर्यात कमाई $6 अरब से गिरकर $2 अरब पर आ गई। कृषि निर्यात से होने वाली मूल्यवान विदेशी मुद्रा की हानि।
मक्का (Maize) इथेनॉल फीडस्टॉक में हिस्सेदारी बढ़ने से भारत मक्के के निर्यातक से शुद्ध आयातक बन गया। पोल्ट्री, पशु आहार और घरेलू खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर मुद्रास्फीति का दबाव।
शुद्ध विदेशी मुद्रा बचत कच्चे तेल के आयात में हुई बचत काफी हद तक कृषि निर्यात में आई गिरावट से निष्प्रभावी हो गई। भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा व्यापक चालू खाता लाभ को सीमित करता है।
3 नीतिगत विकल्प: अनिवार्य सम्मिश्रण से आगे की राह

1. प्रति-चक्रीय ईंधन कर

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के दौरान उपभोक्ताओं को राहत देने हेतु लचीली अप्रत्यक्ष कर नीति अपनाना।

2. दोहरे ईंधन का विकल्प

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के सुझाव अनुसार पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E10 और E20 के बीच चयन का स्पष्ट विकल्प देना।

3. सार्वजनिक परिवहन में निवेश

भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा के विश्लेषण के आधार पर इलेक्ट्रिक बसों और साइकिल लेन में पूंजी निवेश बढ़ाना।

4. 2G इथेनॉल को प्राथमिकता

खाद्य फसलों (गन्ना, मक्का) के स्थान पर कृषि अवशेषों और पराली से 2G लिग्नोसेल्यूलोसिक इथेनॉल का उत्पादन तेज करना।

ऊर्जा सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच संतुलन साधने के लिए भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा के सभी बहु-क्षेत्रीय पहलुओं का समग्र मूल्यांकन आवश्यक है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q3. भारत के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. पेट्रोल में मिश्रित निर्जल इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (कैलोरी मान) मानक शुद्ध पेट्रोल से कम होता है।
2. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अधिशेष खाद्यान्न जैसे मक्का और क्षतिग्रस्त अनाजों को 1G इथेनॉल उत्पादन हेतु फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने की अनुमति है।
3. E20 पेट्रोल मिश्रण वाहन के निर्माण वर्ष (Vintage) की परवाह किए बिना सभी यात्री वाहनों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को पूरी तरह समाप्त कर देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि गैर-E20 अनुकूल पुराने वाहनों में माइलेज में भारी गिरावट आती है, जिससे समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन जलता है और प्रति किलोमीटर शुद्ध उत्सर्जन बढ़ जाता है। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (वास्तविक PYQ)
Q. भारत की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के अनुसार, जैव ईंधन के उत्पादन के लिए निम्नलिखित में से किसका उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है?

1. कसावा (Cassava)    2. क्षतिग्रस्त गेहूं के दाने    3. मूंगफली के बीज    4. कुलथी (Horse gram)    5. सड़े हुए आलू    6. चुकंदर (Sugar beet)

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1, 2, 5 और 6    B) केवल 1, 3, 4 और 5    C) केवल 2, 3, 4 और 6    D) 1, 2, 3, 4, 5 और 6
  • A) केवल 1, 2, 5 और 6
  • B) केवल 1, 3, 4 और 5
  • C) केवल 2, 3, 4 और 6
  • D) 1, 2, 3, 4, 5 और 6
सही उत्तर: A — केवल 1, 2, 5 और 6

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति गन्ने का रस, चुकंदर, मीठा ज्वार, मक्का, कसावा, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न और सड़े आलू के उपयोग की अनुमति देती है। दलहन/तिलहन जैसे कुलथी और मूंगफली अनुमत नहीं हैं।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)

“राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं और वैकल्पिक ईंधन परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में कैसे योगदान दे सकते हैं?” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) की दिशा में तेजी से बढ़ते भारत के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा, उपभोक्ता लागत और खाद्य सुरक्षा के बीच के व्यापार-ऑफ (Trade-offs) का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: EBP कार्यक्रम के लक्ष्य और भारत में E20 इथेनॉल सम्मिश्रण आर्थिक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ को स्पष्ट करना।
  • ऊर्जा बनाम खाद्य सुरक्षा: गन्ने और मक्के के उपयोग से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध, कृषि निर्यात में कमी और पशु आहार/पोल्ट्री में खाद्य मुद्रास्फीति।
  • उपभोक्ता व राजकोषीय प्रभाव: माइलेज में 2-6% की कमी से उपभोक्ताओं पर लगभग ₹88,234 करोड़ का अतिरिक्त भार तथा पुराने वाहनों में उत्सर्जन लाभ का सीमित होना।
  • आगे की राह: 2G लिग्नोसेल्यूलोसिक इथेनॉल पर जोर, पेट्रोल पंपों पर E10/E20 का दोहरा विकल्प और सार्वजनिक परिवहन का तीव्र विद्युतीकरण।
E20 पेट्रोल इथेनॉल सम्मिश्रण खाद्य बनाम ईंधन ऊर्जा सुरक्षा

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (17 September 2026 FAQs)

1. पिग्मी हॉग को जलोढ़ घास के मैदानों की सेहत का संकेतक जीव (Indicator Species) क्यों माना जाता है?
पिग्मी हॉग (Porcula salvania) अपने भोजन, घोंसले और प्रजनन के लिए पूरी तरह से सघन एवं ऊंचे जलोढ़ घास के मैदानों पर निर्भर है। घास के मैदानों के क्षरण, अनुचित आग या झाड़ियों के अतिक्रमण का सीधा असर इनकी आबादी में तीव्र गिरावट के रूप में दिखता है।
2. एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 की धारा 9D वित्तीय संघवाद को कैसे प्रभावित करती है?
धारा 9D राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले करों/उपकरों को केंद्र की पूर्व-सहमति के अधीन करती है, जिससे 2024 के सुप्रीम कोर्ट के 9-जजों के ऐतिहासिक निर्णय (MADA मामला) के प्रभाव के सीमित होने की आशंका पैदा होती है।
3. भारत की E20 पेट्रोल नीति के प्रमुख आर्थिक और खाद्य सुरक्षा संबंधी व्यापार-ऑफ (Trade-offs) क्या हैं?
गन्ने और मक्के को इथेनॉल उत्पादन में लगाने से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगे और भारत मक्के का शुद्ध आयातक बन गया, जबकि माइलेज में गिरावट से पिछले 3 वर्षों में उपभोक्ताओं पर लगभग ₹88,234 करोड़ का अतिरिक्त ईंधन खर्च पड़ा।
4. 2024 के MADA बनाम SAIL मामले में सुप्रीम कोर्ट के 9-जजों के संविधान पीठ का क्या निर्णय था?
संविधान पीठ ने माना कि रॉयल्टी कोई 'कर' नहीं है और राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों को खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने का अनन्य विधायी अधिकार प्राप्त है।
5. असम में पिग्मी हॉग के संरक्षण और पुनर्वास हेतु कौन-से संरक्षित क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण हैं?
मानस राष्ट्रीय उद्यान (पानबारी घास का मैदान), ओरंग राष्ट्रीय उद्यान, सोनाई रूपाई वन्यजीव अभयारण्य और हाल ही में पुनरुद्धार हेतु चुने गए रूपाही एवं कंचनबारी क्षेत्र।
प्रस्तुति: Todays Current Affairs | UPSC सिविल सेवा एवं State PCS संपादकीय विश्लेषण (17 September 2026)
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