संपादकीय के मुख्य निष्कर्ष व प्रजाति प्रोफ़ाइल
- एकमात्र जीवित प्रजाति: पिग्मी हॉग (Porcula salvania) Porcula वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति तथा विश्व का सबसे छोटा और दुर्लभ जंगली सुअर (Suid) है।
- बाढ़ के मैदानों का स्वास्थ्य संकेतक: यह प्रजाति अपने भोजन, छिपने और प्रजनन के लिए सघन एवं ऊंचे जलोढ़ घास के मैदानों पर पूरी तरह निर्भर है; पिग्मी हॉग की आबादी का संकट सीधे तौर पर नदीय मैदानों के क्षरण को दर्शाता है।
- अंब्रेला संरक्षण लाभ: भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के तहत किए जाने वाले प्रयासों से बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican), हिस्पिड खरगोश (Hispid Hare), हॉग डियर और एक सींग वाले गैंडे जैसी सह-अस्तित्व वाली संकटग्रस्त प्रजातियों को स्वतः संरक्षण मिलता है।
- कैप्टिव ब्रीडिंग की सफलता: 1995 में शुरू किए गए कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम (दुरेल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट, असम वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा) ने पिछले 3 दशकों में सीमित संस्थापक स्टॉक से आबादी को 32 गुना बढ़ा दिया है।
आवास विखंडन व अतिक्रमण
कृषि विस्तार, चाय बागानों, बाढ़ नियंत्रण तटबंधों, आक्रामक खरपतवारों और शुष्क मौसम में अवैज्ञानिक तरीके से घास जलाने की प्रथा ने इनके सूक्ष्म-पर्यावास को भारी नुकसान पहुंचाया है।
संक्रामक रोग व इनब्रीडिंग
एक छोटे संस्थापक समूह से प्रजनन के कारण भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी में वंशावली ट्रैकिंग और स्वाइन रोगों से सुरक्षा हेतु सख्त बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक है।
1. पानबारी गढ़
मानस राष्ट्रीय उद्यान के पानबारी घास के मैदान में अंतिम प्राकृतिक रूप से जीवित आबादी का पूर्ण संरक्षण।
2. नए पुनर्वास क्षेत्र
ओरंग राष्ट्रीय उद्यान, सोनाई रूपाई अभयारण्य, रूपाही और कंचनबारी में पिग्मी हॉग की व्यवहार्य आबादी का विस्तार।
3. वैज्ञानिक पर्यावास प्रबंधन
घास के मैदानों में वृक्षों और झाड़ियों के अतिक्रमण को रोकने के लिए भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के तहत नियंत्रित अग्नि प्रबंधन लागू करना।
4. 2040 का दृष्टिकोण
जंगली आबादी को 300 से अधिक पहुंचाना और असम के दुआर क्षेत्र में निरंतर पारिस्थितिक गलियारों (Corridors) का पुनर्निर्माण करना।
दीर्घकालिक विकासवादी स्वास्थ्य केवल कृत्रिम बीमा आबादी पर निर्भर नहीं रह सकता; भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी को प्राकृतिक जलोढ़ पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली से जोड़ना होगा।
1. यह Porcula वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति है और भारतीय उपमहाद्वीप के ऊंचे जलोढ़ घास के मैदानों के लिए स्थानिक (Endemic) है।
2. भारत में, इसकी अंतिम प्राकृतिक रूप से जीवित निरंतर जंगली आबादी मानस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है।
3. इसे IUCN रेड लिस्ट में 'संवेदनशील' (Vulnerable) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची II में रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि पिग्मी हॉग IUCN रेड लिस्ट में 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त / संकटग्रस्त' (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण) के अंतर्गत संरक्षित है। कथन 1 और 2 सही हैं।
1. यह एक यूनेस्को प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल है।
2. यह संकटग्रस्त पिग्मी हॉग और गोल्डन लंगूर का प्राकृतिक आवास है।
3. यह भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क के साथ निरंतर सीमा साझा करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 1 और 3 D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
मानस राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व, टाइगर रिजर्व और हाथी रिजर्व है जो भूटान के साथ सीमा साझा करता है और पिग्मी हॉग, हिस्पिड हेयर और गोल्डन लंगूर का प्रमुख आवास है।
UPSC CSE Mains 2020 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)
Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)
मुख्य उत्तर बिंदु
- प्रस्तावना: नदीय घास के मैदानों के ध्वजवाहक (Flagship) के रूप में भारत में पिग्मी हॉग संरक्षण कार्यक्रम और घास के मैदान पारिस्थितिकी के महत्व को स्पष्ट करना।
- पारिस्थितिक चुनौतियां: अवैज्ञानिक अग्नि चक्र, अत्यधिक मवेशी चराई, बांधों से जल-प्रवाह में बदलाव, आक्रामक वनस्पति (उदा. Mikania micrantha) और घास के मैदानों को 'बंजर भूमि' मानने की प्रशासनिक नीति।
- पारिस्थितिक मूल्य: बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और अंब्रेला प्रजातियों (बंगाल फ्लोरिकन, एक सींग वाला गैंडा) को आवास सुरक्षा।
- आगे की राह: राष्ट्रीय घास का मैदान नीति का गठन, बफर गलियारों का वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानीय समुदायों का पारिस्थितिक पुनरुद्धार में समावेशन।