अजय बिसारिया एवं हैपीमोन जैकब के प्रमुख विचार
- व्यावहारिक बहु-संरेखण (Multi-alignment): अजय बिसारिया के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता यह प्रमाणित करती है कि भारत पश्चिमी गठबंधनों को प्रभावित किए बिना गैर-पश्चिमी मंचों पर अपनी स्वतंत्र भूमिका निभा रहा है।
- पुरानी गुटनिरपेक्षता से भिन्न: हैपीमोन जैकब का तर्क है कि द्विध्रुवीय विश्व में गुटनिरपेक्षता कमजोर देशों की रक्षात्मक रणनीति थी, जबकि वर्तमान बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत स्वयं एक स्वतंत्र ध्रुव (Pole) के रूप में उभर रहा है।
- प्रतीकात्मकता बनाम यथार्थ: मोदी-शी-पुतिन की मुलाकातें वैश्विक संदेश देती हैं, लेकिन भारत के हित द्विपक्षीय यथार्थ और राष्ट्रीय सुरक्षा में गहराई से निहित हैं।
- डी-डॉलरीकरण की सीमाएं: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन करते हुए भी भारत एकल ब्रिक्स मुद्रा का विरोध करता है ताकि चीनी युआन के प्रभुत्व को रोका जा सके।
| मुद्दा / आयाम | घोषणापत्र का रुख | भारत का सामरिक दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| यूक्रेन संघर्ष | आम सहमति न बनने / रूस की संवेदनशीलता के कारण प्रत्यक्ष उल्लेख से परहेज। | बहुपक्षीय गतिरोध को टालना और द्विपक्षीय तटस्थता एवं शांति वार्ता का समर्थन। |
| पश्चिम एशिया व गाजा | नागरिक सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 के तहत प्रतिबद्धता। | इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग और अरब जगत के साथ पारंपरिक द्वि-राष्ट्र समाधान का संतुलन। |
| वित्तीय निपटान तंत्र | एकल मुद्रा के स्थान पर स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का समर्थन। | ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता के माध्यम से द्वितीयक प्रतिबंधों से बचना और युआन निर्भरता रोकना। |
G7 के विकल्प के रूप में ब्रिक्स
ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है। भारत G7 (संभावित D10) और विकासशील देशों के मध्य एक पुल के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करता है।
चयनात्मक बहुपक्षवाद
अमूर्त वैचारिक बहसों के बजाय भारत एआई मानक, अंतरिक्ष शासन और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन जैसे व्यावहारिक विषयों को प्राथमिकता देता है।
इस शिखर सम्मेलन का सार यह है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता भारत की सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ एक साथ संवाद करने की विशिष्ट क्षमता को दर्शाती है।
1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में इसके संस्थापक सदस्यों के बीच वीटो शक्ति के बिना समान मताधिकार प्रणाली लागू है।
2. आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (CRA) अल्पकालिक वैश्विक भुगतान संतुलन (BoP) दबावों के विरुद्ध तरलता सहायता प्रदान करती है।
3. ब्रिक्स सदस्य देशों ने अमेरिकी डॉलर के स्थान पर सभी आपसी व्यापार हेतु एक अनिवार्य साझा मुद्रा (Single Currency) आधिकारिक रूप से लागू कर दी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि ब्रिक्स देशों ने एकल मुद्रा जारी नहीं की है, बल्कि स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का समर्थन किया है। कथन 1 और 2 सही हैं।
A) ब्रिक्स (BRICS)
B) आसियान (ASEAN)
C) ओईसीडी (OECD)
D) विश्व व्यापार संगठन (WTO)
सही उत्तर: A — ब्रिक्स (BRICS)
2014 में ब्राजील में आयोजित फोर्टालेजा शिखर सम्मेलन में NDB और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (CRA) की स्थापना की गई थी।
UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper II (वास्तविक प्रश्न)
मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)
प्रमुख उत्तर बिंदु
- प्रस्तावना: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 नई दिल्ली घोषणापत्र एवं भारतीय विदेश नीति सामरिक स्वायत्तता भारत के गतिशील बहु-संरेखण को कैसे प्रदर्शित करती है, इसका उल्लेख।
- गुटनिरपेक्षता से अंतर: वैश्विक नियम निर्माता (Rule-maker) के रूप में भागीदारी, क्वाड, ब्रिक्स, एससीओ तथा I2U2 में एक साथ सक्रिय संतुलन।
- सामरिक चुनौतियाँ: पश्चिम-विरोधी बयानबाजी से दूरी, चीनी युआन के वर्चस्व का प्रतिकार और सीमा सुरक्षा हित।
- निष्कर्ष: G7 एवं ग्लोबल साउथ के मध्य सेतु के रूप में 'विश्व मित्र' की भूमिका को रेखांकित करना।