The Hindu Editorial Today in Hindi 2 September 2026
UPSC सिविल सेवा & State PCS | The Hindu संपादकीय विश्लेषण (2 September 2026)
GS Paper II अंतर्राष्ट्रीय संबंध वैश्विक सुरक्षा व भू-राजनीति

दांव मत खेलिए: रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष के बढ़ते खतरे और कूटनीतिक समाधान

Prelims: नाटो अनुच्छेद 5 व ग्रे ज़ोन युद्ध Mains: यूरोपीय सुरक्षा ढांचा व कूटनीति State PCS: अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष
1 ग्रे ज़ोन हमले: ड्रोन घुसपैठ, तोड़फोड़ और जासूसी

गुप्त रणनीतियां और नाटो का संकल्प

  • संघर्ष का विस्तार: जर्मन हवाई अड्डे के पास विस्फोटक ड्रोन मिलना, रोमानिया के ऊपर ड्रोन गिराया जाना और पोलैंड में रूसी प्रोजेक्टाइल का गिरना स्पष्ट करता है कि रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है।
  • अप्रत्यक्ष युद्ध पद्धतियां: यूरोपीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, रूस तोड़फोड़ के लिए विदेशी एजेंटों की भर्ती कर रहा है और डिजिटल जासूसी व साइबर हमलों के जरिए यूरोपीय बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है।
  • खुफिया चेतावनी: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यूक्रेन के गहरे हमलों के दबाव में रूस नाटो सीमावर्ती देशों में सीमित सैन्य घुसपैठ या बड़े साइबर हमले कर सकता है। सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को का दौरा कर नाटो पर हमले के विरुद्ध चेतावनी दी।
  • कड़े तेवर: मॉस्को ने चेतावनी दी है कि यदि यूक्रेन ब्रिटिश हथियारों का उपयोग करता है तो यूक्रेन के अंदर और बाहर स्थित ब्रिटिश सैन्य ठिकाने वैध लक्ष्य बन सकते हैं, साथ ही कीव में सत्ता परिवर्तन की धमकी दी गई है।
>20% क्षेत्र
रूसी नियंत्रण में यूक्रेनी भूमि
20% क्षमता
यूक्रेनी हमलों से ठप रूसी रिफाइनरी
अनुच्छेद 5
नाटो सामूहिक रक्षा सीमा
2 मोर्चे पर गतिरोध और यूक्रेन का रणनीतिक हवाई मोर्चा

जमीनी बढ़त में गिरावट

रूस के पास यूक्रेन के 20% से अधिक क्षेत्र का नियंत्रण होने के बावजूद, भारी तोपखाने और ग्लाइड-बम हमलों के बाद भी उसकी नई जमीनी बढ़त की गति धीमी पड़ गई है और युद्ध में गतिरोध आ गया है।

यूक्रेन के गहरे रणनीतिक हमले

यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोनों से रूस के ऊर्जा क्षेत्र, तेल रिफाइनरियों और सैन्य आपूर्ति नेटवर्क पर हमले किए हैं, जिससे रूस की 20% रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है और उसे गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

3 परमाणु जोखिम और कूटनीति की अनिवार्यता

1. वैश्विक भटकाव का लाभ

घरेलू दबाव में रूस, फारस की खाड़ी में अमेरिकी व्यस्तता का फायदा उठाकर मोर्चे के गतिरोध को तोड़ने के लिए संघर्ष को बढ़ा सकता है।

2. परमाणु युद्ध का जोखिम

रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष में अनियंत्रित तनाव दो परमाणु-सशस्त्र पक्षों के बीच विनाशकारी पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है।

3. कूटनीतिक मध्यमार्ग

युद्ध को बढ़ाने के बजाय, रूस को यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ गंभीर कूटनीतिक बातचीत कर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे लंबे यूरोपीय युद्ध को समाप्त करना चाहिए।

रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष को टालने के लिए तत्काल कूटनीतिक समाधान आवश्यक है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q1. अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) और ग्रे ज़ोन युद्ध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. 'ग्रे ज़ोन युद्ध' पारंपरिक शांति और प्रत्यक्ष युद्ध के बीच की प्रतिस्पर्धी राज्य गतिविधियों को संदर्भित करता है।
2. नाटो संधि का अनुच्छेद 5 सामूहिक रक्षा के सिद्धांत को स्थापित करता है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है।
3. यूरोप में हुए साइबर हमलों के जवाब में नाटो के अनुच्छेद 5 को अब तक कई बार लागू किया जा चुका है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि नाटो के अनुच्छेद 5 को इतिहास में केवल एक बार — 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के बाद लागू किया गया था। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2023 (वास्तविक PYQ)
Q. समाचारों में अक्सर उल्लिखित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

1. डोनबास (Donbas) — सीरिया
2. ज़ापोरिज्जिया (Zaporizhzhia) — यूक्रेन
3. खेरसॉन (Kherson) — यूक्रेन
4. टाइग्रे (Tigray) — इथियोपिया

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
A) केवल एक युग्म    B) केवल दो युग्म    C) केवल तीन युग्म    D) सभी चार युग्म
  • A) केवल एक युग्म
  • B) केवल दो युग्म
  • C) केवल तीन युग्म (2, 3, 4)
  • D) सभी चार युग्म
सही उत्तर: C — केवल तीन युग्म

डोनबास पूर्वी यूक्रेन में स्थित है (सीरिया में नहीं)। ज़ापोरिज्जिया और खेरसॉन यूक्रेन में हैं, तथा टाइग्रे इथियोपिया में स्थित है।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper II (वास्तविक PYQ)

“रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गहरे प्रभाव पड़े हैं। इस भू-राजनीतिक संकट से निपटने में भारत की विदेश नीति की विवेचना कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“ग्रे ज़ोन रणनीतियां और हाइब्रिड युद्ध आधुनिक संघर्षों में पारंपरिक प्रतिरोध की सीमाओं की परीक्षा ले रहे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: रूस यूक्रेन युद्ध विस्तार और नाटो ग्रे ज़ोन संघर्ष में पारंपरिक युद्ध सीमा से नीचे रहने वाली गुप्त सैन्य व साइबर गतिविधियों को परिभाषित करना।
  • ग्रे ज़ोन के मुख्य रूप: हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ, ऊर्जा पाइपलाइनों और इंटरनेट केबलों की तोड़फोड़, साइबर जासूसी और छद्म एजेंटों की भर्ती।
  • सामरिक चुनौतियां: हमले के कर्ता की प्रत्यक्ष पहचान में कठिनाई तथा अनपेक्षित रूप से परमाणु टकराव भड़कने का निरंतर जोखिम।
  • आगे का मार्ग: राष्ट्रीय साइबर व ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा बढ़ाना, संकट संचार चैनलों को सक्रिय रखना और शांतिपूर्ण कूटनीतिक समाधान पर बल देना।
ग्रे ज़ोन युद्ध नाटो अनुच्छेद 5 हाइब्रिड तोड़फोड़ परमाणु प्रतिरोध
GS Paper III अर्थव्यवस्था व औद्योगिक नीति पर्यावरण व चक्रीय अर्थव्यवस्था

हर ई-कचरा निर्णय के पीछे की दो बैलेंस शीट: भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज की रणनीतिक सुरक्षा

Prelims: विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) Mains: जीवन-चक्र लागत व महत्वपूर्ण खनिज State PCS: ई-कचरा प्रबंधन नियम
1 शहरी खनन: ई-कचरे को रणनीतिक संसाधन भंडार में बदलना

द्वितीयक कच्चे माल की अप्रयुक्त क्षमता

  • शहरी खदान: आईटी उपकरणों (सर्वर, कंप्यूटर, स्टोरेज सिस्टम) के नवीनीकरण से भारी मात्रा में ई-कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें तांबा, एल्युमीनियम, सोना, चांदी, पैलेडियम और महत्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • मूल संकल्पना: जमीन में गहराई तक खनन करने के बजाय, भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • मूल दुविधा: उच्च तकनीक पुनर्चक्रण में सुरक्षित डेटा नष्ट करना, विषाक्त पदार्थों का प्रबंधन और पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला शामिल होती है, जिससे प्रारंभिक लागत बढ़ जाती है।
  • त्रुटिपूर्ण खरीद नीति: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र केवल 'न्यूनतम प्रत्यक्ष लागत' (Lowest Visible Price) के आधार पर निर्णय लेते हैं, जिससे अनौपचारिक और प्रदूषणकारी कबाड़ क्षेत्र को बढ़ावा मिलता है।
निर्णय का आयाम बैलेंस शीट 1: तत्काल वित्तीय लाभ बैलेंस शीट 2: दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ
प्राथमिक ध्यान तत्काल खरीद मूल्य, कबाड़ पुनर्विक्रय मूल्य, अल्पकालिक बजट बचत संसाधन सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन
लेखांकन अवधि बिल के भुगतान के साथ ही तुरंत समाप्त हो जाती है अनिश्चित काल तक खुली रहकर राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को आकार देती है
अप्रत्यक्ष देनदारियां डेटा चोरी और कीमती खनिजों के नुकसान की अनदेखी करती है प्रदूषण स्वास्थ्य लागत बनता है; गैर-पुनर्चक्रित धातुएं आयात निर्भरता बढ़ाती हैं
नीतिगत दृष्टिकोण न्यूनतम लागत (L1) बोली प्रणाली जीवन-चक्र लागत, मूल्य-आधारित खरीद व पारदर्शी EPR क्रेडिट प्रणाली
2 सौर ऊर्जा से सीख और EPR बाजार सुधार

सौर ऊर्जा विस्तार का उदाहरण

15 वर्ष पूर्व सौर ऊर्जा को कोयले की तुलना में अत्यंत महंगा माना गया था। लेकिन शुरुआती रणनीतिक निवेशों ने विनिर्माण क्षमता और तकनीक को इतना समृद्ध किया कि आज सौर ऊर्जा सबसे सस्ती बिजली बन गई है। शहरी खनन के लिए भी ऐसी ही दूरदर्शी नीति की आवश्यकता है।

EPR प्रणाली में सुधार

विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत केवल सबसे सस्ते कागजी प्रमाणपत्र खरीदने के बजाय उच्च खनिज निष्कर्षण दक्षता और पारदर्शी रीसाइक्लिंग करने वाली कंपनियों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए।

3 सार्वजनिक और कॉर्पोरेट नीति के लिए 4-सूत्रीय रणनीतिक बदलाव

1. मूल्य-आधारित खरीद

सरकारी निविदाओं में भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज हेतु L1 के बजाय जीवन-चक्र लागत (Life-Cycle Costing) को अनिवार्य बनाना।

2. सुरक्षित नवीनीकरण को प्राथमिकता

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नष्ट करने से पहले क्रिप्टोग्राफिक डेटा डिलीट कर उनके पुनः उपयोग (Refurbishment) को बढ़ावा देना।

3. उन्नत निष्कर्षण तकनीक

दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और महत्वपूर्ण खनिजों को 95%+ क्षमता से निकालने वाली हाइड्रोमेटालर्जिकल तकनीकों को प्रोत्साहन देना।

4. पर्यावरणीय लागत का समावेशन

अवैज्ञानिक कचरा निपटान से भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण उपचार पर होने वाले भारी खर्चों की पहचान करना।

भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज पर लिया गया सही निर्णय कचरे को राष्ट्रीय संपत्ति में बदल सकता है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q2. भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. 'शहरी खनन' (Urban Mining) इलेक्ट्रॉनिक और औद्योगिक कचरे से द्वितीयक कच्चे माल और महत्वपूर्ण धातुओं के निष्कर्षण को संदर्भित करता है।
2. भारत के ई-कचरा प्रबंधन नियमों के तहत, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) उत्पादकों के लिए संग्रह और पुनर्चक्रण दायित्व अनिवार्य बनाता है।
3. इलेक्ट्रॉनिक कचरे में केवल लोहा और एल्युमीनियम जैसी सामान्य धातुएं होती हैं, और इसमें सोना या पैलेडियम जैसे कीमती खनिज बिल्कुल नहीं होते।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि कंप्यूटर सर्किट बोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक कचरे में प्राकृतिक अयस्कों की तुलना में कहीं अधिक सांद्रता में सोना, चांदी, पैलेडियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व पाए जाते हैं। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2019 (वास्तविक PYQ)
Q. भारत में, 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (Extended Producer Responsibility - EPR) को निम्नलिखित में से किसके एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पेश किया गया था?

A) जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 1998
B) पुनर्चक्रित प्लास्टिक (निर्माण और उपयोग) नियम, 1999
C) ई-अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2011
D) खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2011
  • A) जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट नियम, 1998
  • B) प्लास्टिक नियम, 1999
  • C) ई-अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2011
  • D) खाद्य सुरक्षा विनियम, 2011
सही उत्तर: C — ई-अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2011

भारत में ई-कचरा (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2011 के तहत निर्माताओं के लिए अपने उत्पादों के जीवन-चक्र समाप्ति पर उचित संग्रह हेतु EPR को औपचारिक रूप से लागू किया गया था।

UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper III (वास्तविक PYQ)

“भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व को समझाइए। लचीली खनिज आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए किन नीतिगत उपायों की आवश्यकता है?” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“न्यूनतम अग्रिम लागत पर आधारित खरीद प्रक्रिया रणनीतिक संसाधन लचीलेपन और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को अनदेखा करती है। भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज के आलोक में विवेचना कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: तत्काल वित्तीय बैलेंस शीट और दीर्घकालिक रणनीतिक बैलेंस शीट के अंतर को भारत में ई-कचरा शहरी खनन और महत्वपूर्ण खनिज के संदर्भ में समझाना।
  • शहरी खनन का आर्थिक महत्व: इलेक्ट्रॉनिक कचरे से लिथियम, कोबाल्ट, तांबा और सोना निकालकर आयात निर्भरता और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना।
  • मौजूदा खरीद प्रणाली की कमियां: L1 बोली प्रणाली से प्रदूषणकारी अनौपचारिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलना तथा डेटा सुरक्षा और पर्यावरण उपचार की उपेक्षा होना।
  • नीतिगत सुधार: जीवन-चक्र लागत को सरकारी खरीद में अनिवार्य करना, EPR को निष्कर्षण दक्षता से जोड़ना और उन्नत पुनर्चक्रण संयंत्रों को PLI योजना के तहत प्रोत्साहन देना।
शहरी खनन महत्वपूर्ण खनिज जीवन-चक्र लागत चक्रीय अर्थव्यवस्था
GS Paper II भारतीय संविधान व सामाजिक न्याय न्यायिक न्यायशास्त्र

अस्पृश्यता और ‘शुद्धता’ की अवधारणा: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र का संवैधानिक विश्लेषण

Prelims: अनुच्छेद 17 व नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम Mains: सुकन्या शांता वाद व सामाजिक समानता State PCS: SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम
1 हल्द्वानी घटना और अनुच्छेद 17 का विधिक दायरा

घटना की पृष्ठभूमि और संवैधानिक जनादेश

  • घटना की पृष्ठभूमि: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किया गया 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र के दायरे पर गंभीर संवैधानिक विमर्श खड़ा करता है।
  • अनुच्छेद 17 का जनादेश: संविधान किसी भी रूप में "अस्पृश्यता" का उन्मूलन करता है और इसके आचरण को दंडनीय अपराध घोषित करता है। यह मौलिक अधिकार गैर-सरकारी निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी सीधे लागू होता है।
  • अपरिभाषित रहने का कारण: संविधान निर्माताओं ने 'अस्पृश्यता' को जानबूझकर संकीर्ण रूप से परिभाषित नहीं किया ताकि बदलती सामाजिक जटिलताओं के साथ इसका विधिक दायरा विस्तारित हो सके।
  • कानूनी ढांचा: अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 (1976 में संशोधित नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम) की धारा 7(1)(d) के तहत अस्पृश्यता के आधार पर किसी भी प्रकार का अपमान करना दंडनीय है।
अनुच्छेद 17
किसी भी रूप में अस्पृश्यता का अंत
क्षैतिज अधिकार
निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू
धारा 7(1)(d)
अपमान करने पर विधिक दंड
2 ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय: सुकन्या शांता और श्रीनाथजी मंदिर वाद

सुकन्या शांता बनाम भारत संघ (2024)

जेल मैनुअल में जातिगत भेदभाव को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पृश्यता 'शुद्धता और प्रदूषण' की अवधारणा से जुड़ी है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा: "किसी भी व्यक्ति के अस्तित्व, स्पर्श या उपस्थिति से कोई कलंक नहीं जोड़ा जा सकता।"

सूर्य नारायण चौधरी वाद (1988)

राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में प्रवेश से पहले दलित श्रद्धालुओं पर 'शुद्धिकरण' की शर्त को असंवैधानिक और अनुच्छेद 14, 15 व 17 का उल्लंघन मानते हुए पूरी तरह समाप्त कर दिया था।

3 विधिक सीमाएं और साक्ष्य की अनिवार्यता

1. शुद्धता-प्रदूषण परीक्षण

अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र के तहत अपराध सिद्ध करने हेतु अनुष्ठान और जातिगत प्रदूषण की धारणा के बीच संबंध का साक्ष्य होना चाहिए।

2. SC/ST अधिनियम का अंतर

SC/ST अधिनियम की धारा 3(1)(r) के लिए सार्वजनिक दृष्टिगोचर स्थान (Public View) में जानबूझकर अपमान करने का साक्ष्य अनिवार्य है (*हितेश वर्मा (2020)* & *गुंजन कुमारी (2026)*)।

3. प्रतीकात्मक भेदभाव पर रोक

अनुच्छेद 17 न केवल भौतिक प्रवेश पर रोक बल्कि प्रतीकात्मक शुद्धिकरण अनुष्ठानों और कलंक लगाने वाली प्रथाओं को भी प्रतिबंधित करता है।

4. संवैधानिक नैतिकता

डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सामाजिक लोकतंत्र के सपने को साकार करने हेतु सार्वजनिक जीवन में जातिगत पूर्वाग्रहों को समाप्त करना आवश्यक है।

सच्ची सामाजिक समानता स्थापित करने हेतु अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र की विधिक भावना को कड़ाई से लागू करना अनिवार्य है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
Q3. भारतीय संविधान में अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. 'अस्पृश्यता' शब्द को भारत के संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
2. अनुच्छेद 17 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार राज्य और निजी व्यक्तियों दोनों के विरुद्ध उपलब्ध है।
3. सुकन्या शांता बनाम भारत संघ (2024) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जातिगत शुद्धता और प्रदूषण की धारणा अनुच्छेद 17 का उल्लंघन करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3

कथन 1 गलत है क्योंकि 'अस्पृश्यता' शब्द को संविधान या नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 में परिभाषित नहीं किया गया है। कथन 2 और 3 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (वास्तविक PYQ)
Q. कोई कानून जो कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकरण को कानून के लागू होने के मामले में अनियंत्रित और विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद का उल्लंघन करता है?

A) अनुच्छेद 14
B) अनुच्छेद 28
C) अनुच्छेद 32
D) अनुच्छेद 44
  • A) अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता)
  • B) अनुच्छेद 28
  • C) अनुच्छेद 32
  • D) अनुच्छेद 44
सही उत्तर: A — अनुच्छेद 14

कार्यपालिका को दी गई अनियंत्रित व मनमानी शक्ति समानता के सिद्धांत और गैर-मनमानेपन (Non-arbitrariness) का उल्लंघन करती है, जो अनुच्छेद 14 का मूल सार है।

UPSC CSE Mains 2020 — GS Paper II (वास्तविक PYQ)

“संवैधानिक नैतिकता कोई स्वाभाविक भावना नहीं है। इसे विकसित करना पड़ता है। हमें यह महसूस करना होगा कि हमारे लोगों को अभी इसे सीखना बाकी है। भारत में निरंतर सामाजिक पूर्वाग्रहों के संदर्भ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के इस कथन की विवेचना कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“अनुच्छेद 17 केवल भौतिक बहिष्कार का निषेध नहीं है, बल्कि शुद्धता और प्रदूषण की श्रेणीबद्ध विचारधारा को समाप्त करने वाली एक सकारात्मक संवैधानिक गारंटी है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र के आलोक में विश्लेषण कीजिए।”
मुख्य उत्तर बिंदु
  • प्रस्तावना: अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन और शुद्धता-प्रदूषण न्यायशास्त्र के विकास को भौतिक अलगाव से प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक कलंक के उन्मूलन तक रेखांकित करना।
  • शुद्धता-प्रदूषण सिद्धांत का अंत: जातिगत पदानुक्रम को बनाए रखने वाले अनुष्ठानों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कि किसी भी व्यक्ति की उपस्थिति अपवित्र नहीं हो सकती (*सुकन्या शांता (2024)*)।
  • क्षैतिज अनुप्रयोग: अनुच्छेद 17 का राज्य के साथ-साथ निजी व्यक्तियों और सामाजिक प्रथाओं के विरुद्ध भी लागू होना (*नाथद्वारा मंदिर मामला*)।
  • आगे का मार्ग: सख्त विधिक प्रवर्तन के साथ-साथ संस्थागत सामाजिक सुधारों के जरिए वास्तविक सामाजिक समानता हासिल करना।
अनुच्छेद 17 शुद्धता व प्रदूषण सुकन्या शांता वाद क्षैतिज मौलिक अधिकार

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (2 September 2026 FAQs)

1. रूस-नाटो टकराव के संदर्भ में 'ग्रे ज़ोन युद्ध' (Gray Zone Warfare) क्या है?
ग्रे ज़ोन युद्ध पारंपरिक शांति और प्रत्यक्ष युद्ध के बीच की ऐसी गुप्त शत्रुतापूर्ण गतिविधियां हैं (जैसे ड्रोन घुसपैठ, साइबर हमले और बुनियादी ढांचे की तोड़फोड़), जो नाटो के अनुच्छेद 5 सामूहिक रक्षा के दायरे से नीचे रहती हैं।
2. इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रबंधन में 'शहरी खनन' (Urban Mining) की क्या भूमिका है?
शहरी खनन से तात्पर्य जमीन से नए अयस्क निकालने के बजाय बेकार पड़े कंप्यूटरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से तांबा, सोना, चांदी, पैलेडियम और महत्वपूर्ण खनिजों को पुनः प्राप्त करना है।
3. ई-कचरा निर्णयों में 'दो बैलेंस शीट' (Two Balance Sheets) की अवधारणा क्या है?
पहली तत्काल वित्तीय बैलेंस शीट है (खरीद मूल्य, कबाड़ पुनर्विक्रय मूल्य); दूसरी दीर्घकालिक रणनीतिक बैलेंस शीट है (संसाधन सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और घरेलू विनिर्माण क्षमता)।
4. संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत 'शुद्धता और प्रदूषण' पर सर्वोच्च न्यायालय का क्या दृष्टिकोण है?
सुकन्या शांता (2024) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्पृश्यता जातिगत शुद्धता-प्रदूषण की धारणा पर आधारित है, और किसी भी व्यक्ति के अस्तित्व, स्पर्श या उपस्थिति से कोई सामाजिक कलंक नहीं जोड़ा जा सकता।
5. सूर्य नारायण चौधरी (1988) राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले का क्या महत्व है?
उच्च न्यायालय ने नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में प्रवेश से पहले दलित श्रद्धालुओं पर 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान की शर्त को असंवैधानिक और अनुच्छेद 14, 15 व 17 का सीधा उल्लंघन घोषित किया था।
प्रस्तुति: Todays Current Affairs | UPSC सिविल सेवा एवं State PCS संपादकीय विश्लेषण (2 September 2026)
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