The Hindu Editorial Today in Hindi 21 September 2026
UPSC CSE & State PSC | द हिंदू संपादकीय दैनिक विश्लेषण (21 सितंबर 2026)
GS Paper II शासन व्यवस्था एवं नागरिक समाज एनजीओ नियमन एवं एफसीआरए

भारत में गैर-सरकारी संगठन वित्तपोषण के नए दोराहे पर: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन

Prelims: FCRA 1976/2010/2020/2026, MHA पंजीकरण, CSR धारा 135 Mains: नागरिक समाज स्वायत्तता, राज्य निगरानी, घरेलू परोपकार अंतर State PSC: गैर-लाभकारी शासन एवं सामाजिक विकास
1 प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 के प्रमुख प्रावधान

परोपकार विशेषज्ञ पुष्पा सुंदर (Pushpa Sundar) द्वारा आधिकारिक विश्लेषण

  • परिसंपत्ति निहित करने का आदेश: प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के तहत, यदि किसी एनजीओ का एफसीआरए प्रमाणपत्र रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अंशदान से अर्जित सभी परिसंपत्तियां सरकारी नामित प्राधिकरण (Designated Authority) में निहित हो जाएंगी।
  • स्थायी जब्तीकरण: यदि निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण बहाल नहीं होता है, तो संपत्तियां स्थायी रूप से सरकार में निहित हो जाएंगी या उन्हें बेचकर राशि भारत की संचित निधि (CFI) में जमा कर दी जाएगी।
  • अपील तंत्र: विधेयक में संशोधन के लिए वैधानिक मार्ग और जिला न्यायाधीश के समक्ष अपील का प्रावधान किया गया है।
  • पंजीकृत आधार में भारी गिरावट: 2015 से अब तक 22,496 गैर-सरकारी संगठनों के एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं, जिससे सितंबर 2026 तक केवल 14,466 सक्रिय संस्थाएं ही शेष बची हैं।
14,466
सक्रिय एफसीआरए एनजीओ (सितंबर 2026)
₹1.43 L Cr
निजी परोपकार (वित्त वर्ष 25)
₹22,563 Cr
सीएसआर व्यय (वित्त वर्ष 25)
2 विदेशी सहायता में गिरावट बनाम घरेलू परोपकारी परिदृश्य
वित्तपोषण स्रोत वर्तमान स्थिति एवं पैमाना संरचनात्मक सीमाएं एवं क्षेत्रीय प्रभाव
विदेशी अंशदान (FCRA) घरेलू आर्थिक संकट और भारत के उभरती वैश्विक शक्ति बनने की धारणा के कारण वैश्विक दानदाताओं की वापसी। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के तहत जमीनी स्तर की नवाचारी विकास परियोजनाओं के लचीले वित्तपोषण का नुकसान।
अति-धनाढ्य व्यक्ति (UHNWIs) भारत 229 अरबपतियों के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर; निजी परोपकार FY25 में ₹1.43 लाख करोड़ पहुंचा। दानदाताओं का ध्यान उच्च शिक्षा और जलवायु तकनीक की ओर अधिक है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण की उपेक्षा हो रही है।
कॉर्पोरेट सीएसआर (कंपनी अधिनियम 2013) FY25 में सीएसआर खर्च 17.5% बढ़कर ₹22,563 करोड़ हो गया (क्रिसिल रिपोर्ट)। कंपनियां दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग के बजाय अल्पकालिक प्रचार-उन्मुख परियोजनाओं को प्राथमिकता देती हैं।
3 वित्तपोषण अंतर को पाटना: आगे की राह

₹18 लाख करोड़ का संभावित घाटा

बेन एंड कंपनी के अनुसार 2030 तक भारत के सामाजिक क्षेत्र में ₹18 लाख करोड़ ($210B) का फंडिंग अंतर आ सकता है, जिसके लिए विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन में सहयोगात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।

स्वदेशी दान का पुनर्गठन

घरेलू परोपकार को अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशनों की तरह पेशेवर लचीलापन अपनाना चाहिए और लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने हेतु गैर-शर्त बहुवर्षीय अनुदान देना चाहिए।

भारतीय लोकतंत्र के लिए एक जीवंत और स्वायत्त नागरिक समाज अपरिहार्य है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के संतुलित क्रियान्वयन की मांग करता है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्र. 1. भारत में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) और गैर-लाभकारी शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. गृह मंत्रालय (MHA) एफसीआरए पंजीकरण और नवीनीकरण का प्रबंधन करने वाला नोडल मंत्रालय है।
2. एफसीआरए संशोधनों के तहत, गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी धन अन्य पंजीकृत एनजीओ को हस्तांतरित (Sub-grant) करने की पूर्ण मनाही है।
3. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत भारतीय कंपनियों द्वारा दिया गया सीएसआर फंड कानूनी रूप से एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान माना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि भारतीय पंजीकृत कंपनियों द्वारा घरेलू सीएसआर योगदान को घरेलू गैर-लाभकारी दान माना जाता है और यह एफसीआरए के दायरे में नहीं आता (जब तक कि वह विदेशी स्वामित्व वाली संस्था न हो)। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2021 (आधिकारिक प्रश्न)
प्र. भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत निर्दिष्ट निवल मूल्य, टर्नओवर या लाभ वाली कंपनियों के लिए अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य है।
2. भारत में सीएसआर नियम कंपनियों को आगामी वित्तीय वर्षों में अतिरिक्त सीएसआर खर्च को आगे ले जाने (Set-off) की अनुमति देते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2
  • C) 1 और 2 दोनों
  • D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों

दोनों कथन सही हैं। कंपनी (संशोधन) अधिनियम अनिवार्य 2% से अधिक किए गए सीएसआर खर्च को अगले तीन वित्तीय वर्षों तक समायोजित करने की अनुमति देता है।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper II (आधिकारिक प्रश्न)

“क्या नागरिक समाज और गैर-सरकारी संगठन समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करने के लिए सार्वजनिक सेवा वितरण का एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं? उनके सामने आने वाली चुनौतियों की चर्चा कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि एफसीआरए के तहत विधायी कड़े प्रावधान नागरिक समाज की स्वायत्तता को कैसे प्रभावित करते हैं और भारत के विकास घाटे को पाटने में घरेलू परोपकार की क्षमता का मूल्यांकन कीजिए।”
मुख्य उत्तर संरचना (Answer Framework)
  • प्रस्तावना: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 एवं गैर-सरकारी संगठन परोपकार नियमन के संदर्भ में सक्रिय लाइसेंस की संख्या 14,466 तक घटने का उल्लेख करें।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम नागरिक स्वायत्तता: अनियंत्रित विदेशी प्रभाव को रोकने के सरकारी तर्क बनाम जमीनी स्तर के ग्रामीण स्वास्थ्य, शिक्षा व मानवाधिकार समूहों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विश्लेषण।
  • घरेलू परोपकार का परिदृश्य: UHNWI दान (₹1.43L Cr) और CSR (₹22,563 Cr) की वृद्धि, किंतु उच्च शिक्षा के प्रति झुकाव और जमीनी स्तर के कल्याण की उपेक्षा।
  • आगे की राह: पारदर्शी विनियामक प्रक्रिया, संपत्ति अधिग्रहण के लिए न्यायिक सुरक्षा उपाय और दीर्घकालिक सामाजिक बंदोबस्ती अनुदान को प्रोत्साहन।
FCRA 2026 Civil Society CSR Section 135 Philanthropy Gap
GS Paper II & III द्विपक्षीय व्यापार एवं संधियां बौद्धिक संपदा अधिकार

भारत-यूरोपीय संघ एफटीए में कॉपीराइट पर दांव: भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता बौद्धिक संपदा अध्याय एवं डिजिटल कॉपीराइट लचीलापन

Prelims: WCT 1996, TRIPS, कॉपीराइट अधिनियम 1957 (धारा 52, 65A), Safe Harbour Mains: TRIPS-Plus मानक, डिजिटल संप्रभुता, डीयू फोटोकॉपी केस State PSC: व्यापार समझौते एवं साइबर कानून
1 आईपी अध्याय के मसौदे में संरचनात्मक विषमता

प्रो. जाकिर थॉमस एवं प्रो. बिस्वजीत धर द्वारा विशेषज्ञ विश्लेषण

  • राष्ट्रीय उपचार से WCT को बाहर रखना: मसौदा आईपी अध्याय तकनीकी सुरक्षा उपायों (TPM) और अधिकार प्रबंधन सूचना पर कड़े नियम लागू करता है, किंतु विपो कॉपीराइट संधि (WCT) को राष्ट्रीय उपचार खंड (अनुच्छेद 10.8) से जानबूझकर बाहर रखता है।
  • डिजिटल अपवादों की क्षति: WCT को राष्ट्रीय उपचार से बाहर रखने से भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता बौद्धिक संपदा अध्याय एवं डिजिटल कॉपीराइट लचीलापन ढांचे के तहत विदेशी अधिकार धारक डिजिटल फेयर डीलिंग और शैक्षिक अपवादों को चुनौती दे सकते हैं।
  • TRIPS-Plus का अतिक्रमण: मसौदा यूरोपीय संघ के संकीर्ण "त्रि-स्तरीय परीक्षण" (अनुच्छेद 10.21) को अपनाता है, जो भारतीय कॉपीराइट अधिनियम 1957 की धारा 52 के तहत स्थापित सार्वजनिक हित अपवादों को खतरे में डालता है।
  • अनुसंधान पर प्रतिकूल प्रभाव: धारा 65A के तहत वैध उद्देश्यों (सुरक्षा परीक्षण, रिवर्स इंजीनियरिंग, शैक्षणिक संग्रह) के लिए डिजिटल लॉक को बायपास करने की अनुमति है; यूरोपीय शर्तें शोधकर्ताओं को अपराधी बना सकती हैं।
Sec 52
निष्पक्ष व्यवहार (Fair Dealing)
Sec 65A
TPM अपवाद सुरक्षा
Rule 75
ISP सुरक्षित बंदरगाह (Safe Harbour)
2 कक्षाओं, पुस्तकालयों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के लिए खतरा

शैक्षणिक और सार्वजनिक संग्रह संकट में

डीयू फोटोकॉपी मामले जैसे ऐतिहासिक भारतीय फैसलों को दरकिनार करते हुए, विदेशी प्रकाशक फेयर-यूज बायपास अधिकारों के बिना शैक्षिक सामग्री को डीआरएम पेवॉल के पीछे बंद कर सकते हैं।

मध्यवर्ती सुरक्षित बंदरगाह का हनन

"अस्थायी प्रतियों" (Temporary Reproductions) पर अनियंत्रित अधिकार देने से सामान्य डेटा ट्रांसमिशन के दौरान भारतीय आईएसपी और क्लाउड सेवाओं पर कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे हो सकते हैं।

3 वार्ता रणनीति: भारत के डिजिटल ज्ञान भंडार की रक्षा

1. WCT को राष्ट्रीय उपचार में शामिल करें

सार्वजनिक हित अपवादों की रक्षा के लिए WCT अनुच्छेद 10 के लचीलेपन को समान रूप से लागू करना।

2. धारा 65A का संरक्षण

बिना आपराधिक दायित्व के सुरक्षा ऑडिट और रिवर्स इंजीनियरिंग की छूट को बनाए रखना।

3. क्षणिक कैशिंग की सुरक्षा

डिजिटल मध्यवर्तियों और आईएसपी के लिए धारा 52(1)(b) वैधानिक सुरक्षित बंदरगाह को सुरक्षित रखना।

4. TRIPS-Plus का विरोध

भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता बौद्धिक संपदा अध्याय एवं डिजिटल कॉपीराइट लचीलापन के तहत संसद की संप्रभु नीति निर्माण शक्ति की रक्षा करना।

भारत के डिजिटल उत्थान के लिए ज्ञान तक खुली पहुंच आवश्यक है, जिससे व्यापारिक समझौते भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता बौद्धिक संपदा अध्याय एवं डिजिटल कॉपीराइट लचीलापन से समझौता न करें।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्र. 2. विपो कॉपीराइट संधि (WCT) और भारतीय कॉपीराइट कानून के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. WCT बर्न कन्वेंशन के तहत एक विशेष समझौता है जो डिजिटल वातावरण में लेखकों के कार्यों और अधिकारों के संरक्षण से संबंधित है।
2. भारत 2018 में WCT और विपो प्रदर्शन व फोनोग्राम संधि (WPPT) में शामिल हुआ।
3. भारतीय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 52 शैक्षिक अनुसंधान के लिए कॉपीराइट सामग्री के किसी भी अनधिकृत पुनरुत्पादन को गैर-जमानती आपराधिक अपराध बनाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 3 गलत है क्योंकि धारा 52 विशेष रूप से 'फेयर डीलिंग' (Fair Dealing) अपवादों को रेखांकित करती है जो निजी अध्ययन, अनुसंधान, आलोचना और शिक्षण के उद्देश्य से सामग्री के उपयोग की रक्षा करती है। कथन 1 और 2 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2019 (आधिकारिक प्रश्न)
प्र. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारतीय पेटेंट अधिनियम के अनुसार, बीज बनाने की जैविक प्रक्रिया का भारत में पेटेंट नहीं कराया जा सकता है।
2. भारत में कोई बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) नहीं है।
3. पौधों की किस्में भारत में पेटेंट कराने के लिए पात्र नहीं हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A) केवल 1 और 3
B) केवल 2 और 3
C) केवल 1 और 2
D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1 और 3
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 2
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

सभी कथन सही हैं। धारा 3(j) बीजों और जैविक प्रक्रियाओं को पेटेंट से बाहर रखती है (पादप किस्म संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत संरक्षित), और वर्ष 2021 में IPAB को समाप्त कर इसके अधिकार उच्च न्यायालयों को सौंप दिए गए थे।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper III (आधिकारिक प्रश्न)

“वैश्वीकृत दुनिया में, बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) ने अत्यधिक महत्व प्राप्त कर लिया है। चर्चा कीजिए कि भारत डिजिटल युग में सार्वजनिक हित की आवश्यकताओं के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबद्धताओं को कैसे संतुलित कर सकता है।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“भारत-ईयू एफटीए बौद्धिक संपदा अध्याय में ट्रिप्स-प्लस प्रावधानों से जुड़ी चिंताओं का परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से डिजिटल निष्पक्ष व्यवहार और तकनीकी सुरक्षा उपायों के संबंध में।”
मुख्य उत्तर संरचना (Answer Framework)
  • प्रस्तावना: भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता बौद्धिक संपदा अध्याय एवं डिजिटल कॉपीराइट लचीलापन में मुख्य विवाद और राष्ट्रीय उपचार से WCT को बाहर रखने के प्रभाव को परिभाषित करें।
  • ज्ञान तक पहुंच के लिए खतरे: यूरोपीय त्रि-स्तरीय परीक्षण और कठोर टीपीएम नियम किस प्रकार धारा 52 के निष्पक्ष व्यवहार और धारा 65A के सुरक्षा अनुसंधान अपवादों को कमजोर करते हैं।
  • मध्यवर्ती देयता चिंताएं: अस्थायी रैम प्रतियों और कॉपीराइट नियम 2013 के नियम 75 के तहत आईएसपी सुरक्षित बंदरगाह पर प्रभाव।
  • नीतिगत सिफारिशें: राष्ट्रीय उपचार में WCT को पुनः शामिल करना, डिजिटल प्रारूप परिवर्तन की स्वतंत्रता और डीयू फोटोकॉपी फैसले के शैक्षिक अपवादों का संरक्षण।
India-EU FTA WCT 1996 Section 52 Section 65A TPM TRIPS-Plus
GS Paper I & II भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन भाषाई अधिकार एवं संस्कृति

तुलु भाषा के नए आधिकारिक दर्जे का क्या अर्थ है? तुलु भाषा अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा अनुच्छेद 345 एवं आठवीं अनुसूची संवैधानिक प्रावधान

Prelims: अनुच्छेद 345, 347, आठवीं अनुसूची, द्रविड़ भाषा परिवार Mains: भाषाई संघवाद, अल्पसंख्यक संरक्षण, आठवीं अनुसूची मानदंड State PSC: कर्नाटक राजभाषा अधिनियम 1963
1 कैबिनेट निर्णय एवं प्रशासनिक दायरा

रविप्रसाद कामिला (Raviprasad Kamila) द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट

  • कैबिनेट प्रस्ताव: कर्नाटक मंत्रिमंडल ने दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों (तुलुनाडु क्षेत्र) में तुलु को अतिरिक्त आधिकारिक (प्रशासनिक) भाषा का दर्जा दिया है।
  • जमीनी स्तर पर शासन: तुलु भाषा अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा अनुच्छेद 345 एवं आठवीं अनुसूची संवैधानिक प्रावधान के तहत ग्राम पंचायतों, तालुका/जिला पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि तुलु में कार्यवाही कर सकेंगे।
  • द्विभाषी अधिसूचनाएं: इन दो जिलों में सरकारी परिपत्र और आदेश कन्नड़ के साथ तुलु में भी जारी किए जाएंगे, और नागरिक तुलु में याचिकाएं दे सकेंगे।
  • बजट आवंटन: राज्य सरकार अनुवाद, प्रशासनिक प्रशिक्षण और शब्दावली विकास के लिए सालाना ₹82 लाख जारी करेगी।
Art 345
राज्य राजभाषा शक्ति
2 जिले
दक्षिण कन्नड़ एवं उडुपी
₹82 लाख
वार्षिक राज्य आवंटन
2 अनुच्छेद 345 के तहत संवैधानिक एवं वैधानिक रोडमैप
संवैधानिक आयाम वैधानिक अनिवार्यता प्रशासनिक मिसालें
संविधान का अनुच्छेद 345 राज्य विधानमंडल को कानून द्वारा राज्य में उपयोग की जाने वाली एक या अधिक क्षेत्रीय भाषाओं को आधिकारिक कार्यों के लिए अपनाने का अधिकार देता है। केवल कैबिनेट निर्णय पर्याप्त नहीं है; कर्नाटक विधानमंडल को कर्नाटक राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 2 में संशोधन पारित करना होगा।
तेलुगु / उर्दू मिसाल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने विशिष्ट जिलों में उर्दू को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा बनाने के लिए अपने राजभाषा अधिनियमों में संशोधन किया था। के.एम. गायत्री की अध्यक्षता वाली कर्नाटक समिति ने तुलु विधायी ढांचे को तैयार करने के लिए एपी मॉडल का अध्ययन किया।
आठवीं अनुसूची की मांग तुलु भाषा अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा अनुच्छेद 345 एवं आठवीं अनुसूची संवैधानिक प्रावधान के तहत मान्यता मिलने से 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को बल मिला है। साहित्य अकादमी प्रतिनिधित्व, यूपीएससी परीक्षा माध्यम का विकल्प और केंद्रीय वित्तीय अनुदान प्राप्त होता है।
3 भाषाई विरासत एवं शैक्षणिक एकीकरण

स्वतंत्र द्रविड़ मूल

भारत की जनगणना द्वारा स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त; समृद्ध मौखिक साहित्य (पाडदना) और विशिष्ट लिपि (तिगळारी / तुलु लिपि) वाली प्राचीनतम भाषाओं में से एक।

स्कूली पाठ्यक्रम में उपस्थिति

2010-11 से कक्षा 6-10 के लिए तीसरी वैकल्पिक भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही है, जिसे डिग्री और पीजी स्तर पर पुनर्जीवित करने के लिए उच्च बजट की आवश्यकता है।

राज्य की भाषाई सद्भावना बनाए रखते हुए सांस्कृतिक आकांक्षाओं को पूरा करना तुलु भाषा अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा अनुच्छेद 345 एवं आठवीं अनुसूची संवैधानिक प्रावधान के जीवंत संघवाद को दर्शाता है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्र. 3. भारत में राजभाषा से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. अनुच्छेद 345 के तहत, किसी राज्य का विधानमंडल कानून द्वारा राज्य में उपयोग की जाने वाली किसी एक या अधिक भाषाओं या हिंदी को आधिकारिक कार्यों के लिए अपना सकता है।
2. संविधान यह अनिवार्य करता है कि राज्य विधानमंडल द्वारा किसी भाषा को राजभाषा घोषित करने से पहले उसे 8वीं अनुसूची में शामिल होना चाहिए।
3. अनुच्छेद 347 राष्ट्रपति को यह निर्देश देने की शक्ति देता है कि किसी राज्य की जनसंख्या के एक बड़े हिस्से द्वारा बोली जाने वाली भाषा को भी आधिकारिक मान्यता दी जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A) केवल 1 और 3
  • B) केवल 1 और 2
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 3

कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 345 राज्य विधानमंडलों को राज्य में प्रचलित किसी भी भाषा को अपनाने की शक्ति देता है, चाहे वह आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध हो या न हो। कथन 1 और 3 सही हैं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2015 (आधिकारिक प्रश्न)
प्र. 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में निम्नलिखित में से कौन-सी भाषाएं जोड़ी गईं?

1. बोडो (Bodo)
2. डोगरी (Dogri)
3. मैथिली (Maithili)
4. संथाली (Santhali)

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1 और 2
B) केवल 3 and 4
C) केवल 1, 2 और 3
D) 1, 2, 3 और 4
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 3 and 4
  • C) केवल 1, 2 और 3
  • D) 1, 2, 3 और 4
सही उत्तर: D — 1, 2, 3 और 4

2003 के 92वें संशोधन अधिनियम ने 8वीं अनुसूची में चार भाषाएं जोड़ीं: बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली, जिससे कुल संख्या 18 से बढ़कर 22 हो गई।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper I & II (आधिकारिक प्रश्न)

“क्या भाषाई राज्यों के गठन ने भारतीय एकता के उद्देश्य को मजबूत किया है या क्षेत्रीय संकीर्णता को जन्म दिया है? भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल ब्लूप्रिंट (15 अंक | 250 शब्द)

“क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता देने के लिए अनुच्छेद 345-347 के तहत संवैधानिक तंत्र की व्याख्या कीजिए और तुलु जैसी गैर-अनुसूचित भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग का मूल्यांकन कीजिए।”
मुख्य उत्तर संरचना (Answer Framework)
  • प्रस्तावना: कर्नाटक की जिला स्तरीय घोषणा के बाद तुलु भाषा अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा अनुच्छेद 345 एवं आठवीं अनुसूची संवैधानिक प्रावधान के संवैधानिक ढांचे को परिभाषित करें।
  • संवैधानिक तंत्र: अनुच्छेद 345 (राज्य विधायी अधिनियम) और अनुच्छेद 347 (पर्याप्त मांग पर राष्ट्रपति निर्देश) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
  • आठवीं अनुसूची का महत्व: अनुच्छेद 351 के तहत राष्ट्रीय मान्यता, विधायी विधेयकों का आधिकारिक अनुवाद, साहित्य अकादमी पुरस्कार और सिविल सेवा परीक्षा माध्यम।
  • भाषाई संघवाद: उप-क्षेत्रीय भाषाई पहचान को समायोजित करना किस प्रकार राज्य की आधिकारिक भाषाओं को नुकसान पहुंचाए बिना राष्ट्रीय एकीकरण को गहरा करता है।
Article 345 Eighth Schedule Tulu Language Linguistic Federalism

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (21 सितंबर 2026 FAQs)

1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
प्रस्तावित विधेयक के तहत यदि किसी एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अंशदान से अर्जित संपत्तियां सरकारी नामित प्राधिकरण में निहित हो जाएंगी। यदि निर्धारित समय में बहाली नहीं होती, तो संपत्तियां सरकार में निहित हो जाएंगी या उन्हें बेचकर राशि भारत की संचित निधि में जमा होगी।
2. भारत-ईयू एफटीए में विपो कॉपीराइट संधि (WCT) को राष्ट्रीय उपचार से बाहर रखना क्यों चिंताजनक है?
WCT को राष्ट्रीय उपचार खंड से बाहर रखने से भारतीय कानून की धारा 52 के तहत शिक्षा और अनुसंधान के लिए डिजिटल निष्पक्ष व्यवहार (Fair Dealing) के अपवाद कमजोर हो सकते हैं, जिससे वैज्ञानिक शोध और डिजिटल पुस्तकालयों के उपयोग पर कानूनी मुकदमेबाजी का जोखिम बढ़ जाएगा।
3. कर्नाटक सरकार ने किस संवैधानिक प्रावधान के तहत तुलु को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा बनाया है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राज्य विधानमंडल को कानून बनाकर राज्य के प्रशासनिक कार्यों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को अपनाने का अधिकार है। इसके लिए कर्नाटक राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 2 में संशोधन किया जाएगा।
4. भारतीय एनजीओ के लिए विदेशी फंडिंग बनाम घरेलू परोपकार का वर्तमान पैमाना क्या है?
सक्रिय एफसीआरए पंजीकृत एनजीओ घटकर 14,466 रह गए हैं, जबकि भारत में निजी परोपकार FY25 में ₹1.43 लाख करोड़ और कॉर्पोरेट सीएसआर ₹22,563 करोड़ तक पहुंच गया है, हालांकि 2030 तक ₹18 लाख करोड़ के सामाजिक वित्तपोषण अंतर का अनुमान है।
5. तुलु जैसी भाषाओं के संबंध में संविधान की आठवीं अनुसूची का क्या महत्व है?
आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 आधिकारिक भाषाएं सूचीबद्ध हैं जिन्हें अनुच्छेद 351 के तहत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसमें शामिल होने से भाषा को राष्ट्रीय मान्यता, साहित्य अकादमी पुरस्कार, यूपीएससी परीक्षा माध्यम का विकल्प और केंद्रीय वित्तीय अनुदान प्राप्त होता है।
Published by: Todays Current Affairs | UPSC & State PSC Editorial Analysis (21 September 2026)
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