पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी के मुख्य संवैधानिक तर्क
- अंकगणित से परे संविधान: यद्यपि अनुच्छेद 81 जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व का निर्देश देता है, लेकिन संसद ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन लक्ष्यों की रक्षा हेतु दो बार इस अंकगणितीय नियम को निलंबित किया है।
- ऐतिहासिक फ्रीज: 42वें संशोधन (1976) ने 1971 की जनगणना के आधार पर अंतर-राज्यीय सीटों के आवंटन को फ्रीज किया था। 84वें संशोधन (2001) ने इसे 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ा दिया ताकि दक्षिणी राज्यों को नुकसान न हो।
- अनुपात का भ्रम: वर्तमान लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद में यदि सीटों को 50% बढ़ाया जाए (उदा. यूपी 80 से 120, तमिलनाडु 39 से 59), तो गणितीय अनुपात समान रहने पर भी अधिक जनसंख्या वाले राज्यों का कुल वर्चस्व बढ़ जाएगा (सीटों का अंतर 40 से बढ़कर 61 हो जाएगा)।
- महिला आरक्षण का संदर्भ: महिलाओं के लिए 1/3 संवैधानिक आरक्षण (~181 सीटें) को लागू करने के लिए सदन का विस्तार करना आवश्यक नहीं है; इसे 543 सीटों की वर्तमान संरचना में ही आसानी से समायोजित किया जा सकता है।
1976: 42वां संविधान संशोधन
परिवार नियोजन नीतियों को सफल बनाने वाले राज्यों के संरक्षण हेतु 1971 की जनगणना पर 543 सीटों को फ्रीज किया गया।
2001: 84वां और 87वां संशोधन
राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की अनुमति दी गई, लेकिन कुल 543 सीटों के फ्रीज को 2026 तक बढ़ाया गया।
2026 के बाद का मार्ग:
राज्यों की सीटों को बदले बिना 2027 की जनगणना के आधार पर केवल राज्य के भीतर आंतरिक परिसीमन करना।
वैश्विक संसदों में सदस्य सीमा
जनसंख्या वृद्धि के साथ संसद का विस्तार करना अनिवार्य लोकतांत्रिक नियम नहीं है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा 1911 से 435 सदस्यों पर स्थिर है; स्विट्जरलैंड 1963 से 200 सदस्यों पर है। इटली ने अपने चैंबर को 630 से घटाकर 400 और हंगरी ने 386 से घटाकर 199 कर दिया है।
संसदीय विमर्श का ह्रास
संसद का समय असीमित नहीं है। 800+ सांसदों वाले सदन में सांसदों को बोलने का समय, प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछने का अवसर और कार्यपालिका की जवाबदेही तय करने की क्षमता अत्यधिक घट जाएगी।
1. 543 सीटें बरकरार रखें
लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद में राज्यों के बीच संघीय विश्वास को बनाए रखने के लिए 543 सीटों की सीमा को अपरिवर्तित रखें।
2. आंतरिक पुनर्गठन
2027 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके केवल राज्य के भीतर शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों के असंतुलन को दूर करें।
3. विधानसभाओं का विस्तार
जनता तक जनप्रतिनिधियों की सुलभता बढ़ाने के लिए संसद के बजाय राज्य विधानसभाओं (Vidhan Sabhas) की सीटें बढ़ाएं।
1. संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत संसद प्रत्येक जनगणना के बाद एक परिसीमन अधिनियम पारित करती है।
2. 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने वर्ष 2026 के बाद की जाने वाली पहली जनगणना तक लोकसभा में सीटों के आवंटन को फ्रीज कर दिया।
3. भारतीय संविधान यह अनिवार्य करता है कि जनसंख्या वृद्धि होने पर लोकसभा की कुल निर्वाचित सीटों में स्वतः वृद्धि होनी चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 3 गलत है क्योंकि संसद के पास व्यापक राष्ट्रीय हित में सीटों के पुनर्समायोजन को फ्रीज करने का पूर्ण अधिकार है (जैसा कि 42वें और 84वें संशोधनों में किया गया)। कथन 1 और 2 सही हैं।
1. परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. जब परिसीमन आयोग के आदेश लोकसभा या राज्य विधानसभा के समक्ष रखे जाते हैं, तो वे उनमें कोई संशोधन नहीं कर सकते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1 B) केवल 2 C) 1 और 2 दोनों D) न तो 1, न ही 2
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
अनुच्छेद 329 के तहत परिसीमन आयोग के आदेशों को कानून का दर्जा प्राप्त होता है; इन्हें न तो अदालत में चुनौती दी जा सकती है और न ही विधायिकाओं द्वारा संशोधित किया जा सकता है।
A) 84वां संशोधन B) 86वां संशोधन C) 91वां संशोधन D) 92वां संशोधन
सही उत्तर: A — 84वां संशोधन
84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा तथा विधानसभा सीटों के आवंटन को वर्ष 2026 तक फ्रीज कर दिया था।
UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper II (वास्तविक PYQ)
Mains मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)
मुख्य उत्तर बिंदु
- प्रस्तावना: लोकसभा 543 सीटों का परिसीमन विवाद 'एक व्यक्ति, एक मत' (अनुच्छेद 81) और जनसंख्या स्थिरीकरण करने वाले राज्यों के संघीय न्याय के बीच संतुलन का परीक्षण है।
- विस्तार की विसंगतियां: 543 से अधिक सीटें बढ़ाने से उत्तरी राज्यों का पूर्ण राजनीतिक दबदबा बढ़ेगा, जिससे जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक शक्ति घटेगी।
- संसदीय दक्षता: 800 से अधिक सांसदों वाले सदन में विमर्श का समय घटेगा और संसदीय समितियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी।
- समाधान: 543 सीटों की सीमा बनाए रखें, 2027 की जनगणना पर राज्यों के भीतर आंतरिक परिसीमन करें और स्थानीय प्रतिनिधित्व हेतु विधानसभाओं का विस्तार करें।