The Hindu Editorial Today in Hindi 8 September 2026
UPSC CSE 2026 एवं राज्य लोक सेवा आयोग | द हिंदू संपादकीय विश्लेषण (8 सितंबर 2026)
GS Paper II शासन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सांविधिक नियमन एवं कानूनी खामियां

क्या निकोटीन पाउच कानून के दायरे से बाहर हैं? भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य की पड़ताल

Prelims: कोटपा 2003, पेका 2019 एवं डीजीएफटी आईटीसी-एचएस 2404 Mains: गैर-दहनशील निकोटीन उत्पाद एवं स्वास्थ्य नीति State PCS: स्वास्थ्य नियमन एवं खाद्य सुरक्षा कानून
1 संदर्भ: तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच का बढ़ता प्रसार

आईसीएमआर (ICMR) अध्ययन ने शहरी युवाओं में तेजी से बढ़ते उपयोग पर जताई चिंता

  • आईसीएमआर-एनआईसीपीआर का अध्ययन: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के एक नए अध्ययन के अनुसार, निकोटीन पाउच (जैसे ज़िन, लिफ्ट) क्विक-कॉमर्स डिलीवरी ऐप्स, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और हुक्का लाउंज के जरिए भारतीय शहरों में तेजी से पहुंच रहे हैं।
  • उत्पाद की संरचना: ये छोटे, चाय-की-थैली जैसे पाउच होते हैं जिनमें फार्मास्युटिकल निकोटीन, फ्लेवर और पौधे के रेशे होते हैं। इन्हें होंठ और मसूड़े के बीच रखा जाता है, जिससे निकोटीन सीधे रक्तप्रवाह में अवशोषित होता है।
  • कानूनी शून्यता: चूंकि इनमें तंबाकू का पत्ता नहीं होता और न ही यह धुआं या भाप छोड़ते हैं, इसलिए भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य मौजूदा कानूनों की गिरफ्त से बाहर बना हुआ है।

गंभीर स्वास्थ्य जोखिम

तीव्र रासायनिक लत, किशोरों के मस्तिष्क विकास पर दुष्प्रभाव, मुंह के छाले (घाव), और हृदय संबंधी विकारों का खतरा।

भ्रामक लाइफस्टाइल मार्केटिंग

"तंबाकू-मुक्त, धुआं-मुक्त, थूक-रहित" बताकर इसे सुरक्षित विकल्प के रूप में युवाओं में विज्ञापित किया जा रहा है।

2 कानूनी विश्लेषण: मौजूदा भारतीय कानून क्यों लाचार हैं?

चार प्रमुख विधिक ढांचों में मौजूद सीमाएं

  • कोटपा (COTPA) 2003 की सीमा: सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 केवल तंबाकू के पत्तों से बने उत्पादों पर लागू होता है; तंबाकू-रहित सिंथेटिक निकोटीन इसके दायरे में नहीं आता।
  • पेका (PECA) 2019 की सीमा: इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 केवल एरोसोल/भाप उत्पन्न करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रतिबंध लगाता है। गैर-इलेक्ट्रॉनिक ओरल पाउच इसके तहत नहीं आते।
  • औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940: निकोटीन स्वयं एक अनुसूचित दवा नहीं है; केवल निकोटीन गम्स/लोजेंजेस (<2mg) को अनुसूची-के (Schedule K) के तहत तंबाकू मुक्ति हेतु छूट है। पाउच किसी चिकित्सीय लाभ का दावा नहीं करते।
  • खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (FSSA 2006): भोजन की व्यापक परिभाषा में चबाने वाले पदार्थ शामिल हैं (सुपारी/गुटखा की तरह), किंतु सिंथेटिक निकोटीन पाउच पर इसके प्रावधान लागू करने में विधिक अस्पष्टता है।
कानून / संस्था नियामक दायरा निकोटीन पाउच पर स्थिति प्रवर्तन में बाधा
कोटपा (COTPA) 2003 तंबाकू विज्ञापन, चेतावनी और बिक्री नियंत्रण लागू नहीं केवल तंबाकू के पत्ते वाले उत्पादों तक सीमित
पेका (PECA) 2019 ई-सिगरेट, वेप्स और एंड्स (ENDS) पर प्रतिबंध लागू नहीं केवल भाप बनाने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तक सीमित
औषधि अधिनियम 1940 चिकित्सीय उत्पाद और निकोटीन थेरेपी (NRT) अस्पष्ट पाउच किसी तंबाकू मुक्ति का दावा नहीं करते
सीमा शुल्क / डीजीएफटी आईटीसी-एचएस कोड 2404 91 30 (प्रतिबंधित) लाइसेंस अनिवार्य तस्करी और ड्यूटी-फ्री एयरपोर्ट दुकानों से बिक्री
3 आगे की राह: आवश्यक नीतिगत कदम

1. धारा 11 सीमा शुल्क प्रतिबंध

सीमा शुल्क अधिनियम 1962 की धारा 11 के तहत सभी गैर-चिकित्सीय निकोटीन पाउच के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

2. एफएसएसएआई निषेधाज्ञा

FSSA 2006 की धारा 30(2)(a) का उपयोग कर ओरल निकोटीन उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाई जाए।

3. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर कार्रवाई

आईटी नियम 2021 के तहत क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स से अवैध निकोटीन उत्पादों को तत्काल हटवाया जाए।

4. कोटपा में व्यापक संशोधन

कोटपा अधिनियम में संशोधन कर सभी सिंथेटिक और निष्कर्षण आधारित निकोटीन उत्पादों को शामिल कर भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुदृढ़ किया जाए।

समय रहते भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कठोर कदम उठाना युवाओं को एक नई लत से बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC Standard)
Q1. भारत में तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के नियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 केवल तंबाकू के पत्तों से बने उत्पादों पर लागू होता है।
2. इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (निषेध) अधिनियम (PECA), 2019 के तहत गैर-इलेक्ट्रॉनिक ओरल निकोटीन पाउच पर स्वतः प्रतिबंध लागू होता है।
3. डीजीएफटी (DGFT) की आयात नीति के तहत बिना तंबाकू वाले ओरल निकोटीन उत्पादों को 'प्रतिबंधित' (Restricted) सूची में रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 1 और 3
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

कथन 1 सही है (कोटपा केवल तंबाकू उत्पादों पर लागू होता है)। कथन 2 गलत है क्योंकि पेका 2019 केवल एरोसोल उत्पन्न करने वाले इलेक्ट्रॉनिक वेपिंग उपकरणों पर लागू होता है। कथन 3 सही है (आईटीसी-एचएस 2404 91 30 के तहत यह प्रतिबंधित श्रेणी में है)।

🏆 UPSC CSE Prelims 2020 (Actual PYQ)
Q. 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (निषेध) अधिनियम, 2019' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

1. यह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन को प्रतिबंधित करता है।
2. यह ई-सिगरेट के व्यक्तिगत उपभोग और उपयोग को 3 वर्ष तक के कारावास से दंडित करता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A) केवल 1    B) केवल 2    C) 1 और 2 दोनों    D) न तो 1 और न ही 2
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2
  • C) 1 और 2 दोनों
  • D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: A — केवल 1

पेका 2019 वाणिज्यिक निर्माण, आयात, बिक्री और विज्ञापन को प्रतिबंधित करता है (धारा 4)। व्यक्तिगत उपभोग पर सीधे जेल की सजा का प्रावधान नहीं है; दंड वितरकों और भंडारणकर्ताओं पर लक्षित है।

UPSC CSE Mains 2021 — GS Paper II (Actual PYQ)

“कल्याणकारी राज्य के नैतिक दायित्व के अतिरिक्त, प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचा सतत आर्थिक विकास की आवश्यक पूर्व-शर्त है। भारत में उभरते स्वास्थ्य खतरों के नियमन की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“नवीन गैर-दहनशील निकोटीन उत्पाद औषधि नियमों, खाद्य सुरक्षा कानूनों और तंबाकू नियंत्रण विधानों के बीच कानूनी शून्यता का लाभ उठाते हैं। भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संदर्भ में एक बहुआयामी संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।”
मुख्य बिंदु संरचना
  • प्रस्तावना: निकोटीन पाउच को परिभाषित करें और आईसीएमआर की चेतावनी का उल्लेख करते हुए भारत में निकोटीन पाउच का विनियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य में कानूनी अंतर स्पष्ट करें।
  • विधिक कमियां: तंबाकू के पत्ते का अभाव (COTPA की विफलता); हीटिंग डिवाइस की अनुपस्थिति (PECA की विफलता); गैर-चिकित्सीय स्वरूप (Schedule K अस्पष्टता); क्विक-कॉमर्स डिलीवरी खामियां।
  • स्वास्थ्य प्रभाव: निकोटीन की लत, किशोरों के मानसिक विकास पर प्रभाव, हृदय संबंधी जोखिम, और अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य) का उल्लंघन।
  • आगे की राह: सीमा शुल्क धारा 11 के तहत आयात प्रतिबंध; एफएसएसएआई के तहत बिक्री रोक; ई-कॉमर्स पर प्रतिबंध; कोटपा का सर्वसमावेशी संशोधन।
कोटपा 2003 पेका 2019 आईटीसी-एचएस 2404 अनुच्छेद 47
GS Paper III विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अंतरिक्ष तकनीक एवं स्वदेशीकरण

ग्राउंड कंट्रोल: निजीकरण के दौर में भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश का संतुलन

Prelims: इन-स्पेस (IN-SPACe), एनएसआईएल (NSIL) एवं ईओएस-05 प्रक्षेपण Mains: साराभाई का विकासात्मक विजन बनाम अंतरिक्ष वाणिज्यिकीकरण State PCS: भारतीय अंतरिक्ष मिशन एवं प्रक्षेपण यान
1 तकनीकी सफलता के बीच संस्थागत चिंताएं

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के दिन कर्मचारी संघों ने चेयरमैन को सौंपा पत्र

  • घटनाक्रम: जीएसएलवी द्वारा जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट ईओएस-05 (EOS-05) के सफल प्रक्षेपण के दिन इसरो के 9 कर्मचारी संघों ने अध्यक्ष को संयुक्त पत्र भेजकर भविष्य की योजनाओं पर स्पष्टता मांगी।
  • मुख्य चिंताएं: कर्मचारियों ने भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश के तहत नियमित विनिर्माण कार्यों की आउटसोर्सिंग, वैज्ञानिक भर्तियों पर रोक और नौकरियों के संभावित नुकसान पर सवाल उठाए।
  • नीतिगत बदलाव: भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत इसरो को नियमित वाणिज्यिक उपग्रह निर्माण और रॉकेट प्रक्षेपण से हटाकर गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण और आरएंडडी पर केंद्रित करने की योजना है।
₹13,705 करोड़
इसरो का वार्षिक बजट (~$1.6B)
$24.4 बिलियन
नासा का वार्षिक बजट (इसरो से 16 गुना)
10% (2030 तक)
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का लक्ष्य
2 साराभाई का विकासात्मक दर्शन बनाम वाणिज्यिक होड़

सार्वजनिक सेवा के मूल सिद्धांतों की रक्षा

  • डॉ. विक्रम साराभाई का विजन: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम महाशक्तियों की होड़ के लिए नहीं, बल्कि मानव समाज के विकास (मौसम पूर्वानुमान, कृषि हेतु रिमोट सेंसिंग, टेली-एजुकेशन, आपदा प्रबंधन) के लिए स्थापित किया गया था।
  • निजी स्टार्टअप्स की प्रकृति: पारंपरिक औद्योगिक सहयोगियों (L&T, गोदरेज, वालचंदनगर) के विपरीत कई नए स्टार्टअप्स विदेशी उद्यम पूंजी (VC) पर निर्भर हैं और केवल डेटा सेवाओं तक सीमित हैं।
  • रणनीतिक निर्भरता का जोखिम: घरेलू गहन-प्रौद्योगिकी क्षमता विकसित किए बिना सार्वजनिक आरएंडडी को समेटना भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश को कमजोर कर सकता है।
संस्था अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत भूमिका कार्यबल संरचना रणनीतिक दृष्टिकोण
इसरो (ISRO) उन्नत आरएंडडी, ग्रहीय अन्वेषण और राष्ट्रीय सुरक्षा सार्वजनिक वैज्ञानिक संवर्ग (~16,000 कर्मी) विकासात्मक अनुप्रयोग + महत्वाकांक्षी मूनशॉट
इन-स्पेस (IN-SPACe) गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) हेतु एकल-खिड़की प्राधिकरण प्रोत्साहन व नियामक इंटरफेस निजी क्षेत्र को बढ़ावा और इसरो अवसंरचना साझा करना
एनएसआईएल (NSIL) पीएसएलवी/एसएसएलवी और उपग्रहों का वाणिज्यिकीकरण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) वाणिज्यिक प्रक्षेपण और उद्योग को तकनीक हस्तांतरण
नासा (NASA - USA) वैज्ञानिक खोज, आर्टेमिस लूनर मिशन और वैमानिकी 36k से घटकर 14k सिविल सेवक वाणिज्यिक ठेकेदारों (SpaceX/Boeing) पर भारी निर्भरता
3 आगे की राह: सार्वजनिक जनादेश और निजीकरण में संतुलन

1. पारदर्शी मानव संसाधन नीति

वैज्ञानिकों के करियर विकास और सार्वजनिक आरएंडडी प्रतिभा को बनाए रखने के लिए 10-वर्षीय कार्यबल योजना बने।

2. लोक-कल्याणकारी डेटा की सुरक्षा

आपदा प्रबंधन, मौसम और कृषि संबंधी डेटा को सस्ती एवं सार्वजनिक संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखा जाए।

3. गहन-तकनीक (Deep-Tech) निर्माण

निजी क्षेत्र को केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित न रखकर स्वदेशी हार्डवेयर निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

4. दोहरा रणनीतिक संरेखण

यह सुनिश्चित हो कि भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश गगनयान के साथ-साथ जमीनी सामाजिक जरूरतों को भी पूरा करे।

भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश का सामंजस्यपूर्ण क्रियान्वयन भारत की तकनीकी संप्रभुता के लिए अनिवार्य है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC Standard)
Q2. 'भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023' के तहत स्थापित संस्थागत ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इन-स्पेस (IN-SPACe) अंतरिक्ष विभाग के तहत गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करने वाली एकल-खिड़की स्वायत्त एजेंसी है।
2. न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) को वाणिज्यिक आधार पर प्रक्षेपण यानों और उपग्रहों के वाणिज्यिकीकरण का दायित्व सौंपा गया है।
3. इस नीति के तहत, इसरो भविष्य में केवल वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण करेगा और गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान को बंद कर देगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि इसरो नियमित वाणिज्यिक कार्यों से हटकर उन्नत अनुसंधान, आरएंडडी और ग्रहीय अन्वेषण (चंद्रमा, मंगल) पर ध्यान केंद्रित करेगा।

🏆 UPSC CSE Prelims 2019 (Actual PYQ)
Q. भारत के उपग्रह प्रक्षेपण यानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. पीएसएलवी (PSLV) ऐसे उपग्रहों को प्रक्षेपित करते हैं जो पृथ्वी के संसाधनों के मॉनिटरिंग में उपयोगी हैं, जबकि जीएसएलवी (GSLV) मुख्य रूप से संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण हेतु डिजाइन किए गए हैं।
2. पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित उपग्रह आकाश में हमेशा एक ही स्थिति में स्थिर दिखाई देते हैं।
3. जीएसएलवी एमके III (GSLV Mk III) एक चार-चरणीय प्रक्षेपण यान है जिसमें पहले और तीसरे चरण में ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1    B) केवल 2 और 3    C) केवल 1 और 2    D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 2
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1

कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि भूस्थिर उपग्रह (GSLV द्वारा प्रक्षेपित) स्थिर दिखाई देते हैं, न कि ध्रुवीय उपग्रह। कथन 3 गलत है क्योंकि GSLV Mk III (LVM3) तीन-चरणीय यान है (ठोस S200, तरल L110, क्रायोजेनिक C25)।

UPSC CSE Mains 2023 — GS Paper III (Actual PYQ)

“भारत के तीसरे चंद्रमा मिशन का मुख्य कार्य क्या है? स्वदेशी रूप से विकसित सॉफ्ट-लैंडिंग तकनीक के क्या वैज्ञानिक लाभ हो सकते हैं? चर्चा कीजिए।” (10 अंक | 150 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“अंतरिक्ष एजेंसियों का एकाधिकारवादी सरकारी विनिर्माता से अन्वेषक और वाणिज्यिक सुगमकर्ता में रूपांतरण रणनीतिक अवसर और संस्थागत दुविधा दोनों प्रस्तुत करता है। भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश के आलोक में विश्लेषण कीजिए।”
मुख्य बिंदु संरचना
  • प्रस्तावना: साराभाई के लोक-कल्याणकारी विजन और अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत उदारीकरण का तुलनात्मक परिचय और भारतीय अंतरिक्ष नीति और इसरो का विकासात्मक जनादेश की प्रासंगिकता।
  • रणनीतिक अवसर: $540B की वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भागीदारी; इन-स्पेस के जरिए निजी निवेश; इसरो का गगनयान, चंद्रयान-4 और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) पर ध्यान।
  • संस्थागत चुनौतियां: भर्तियों पर रोक से उपजी चिंता; जमीनी सामाजिक प्राथमिकताओं (कृषि, मौसम) की उपेक्षा का खतरा; विदेशी पूंजी-आधारित स्टार्टअप्स की अस्थिरता।
  • आगे की राह: 10-वर्षीय कार्यबल संक्रमण योजना; सामाजिक उपग्रह डेटा का सार्वभौमीकरण; गहन-तकनीक हार्डवेयर विनिर्माण को प्रोत्साहन।
अंतरिक्ष नीति 2023 IN-SPACe NSIL साराभाई विजन
GS Paper II अंतरराष्ट्रीय संबंध बहुपक्षीय समूह एवं ग्लोबल साउथ

ब्रिक्स को पुनः एकजुट करने का भारत का अवसर: 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति का रणनीतिक मूल्यांकन

Prelims: ब्रिक्स-11 विस्तार, एनडीबी (NDB) एवं सीआरए Mains: गैर-पश्चिमी बनाम पश्चिम-विरोधी मंच एवं बहुपक्षीय सुधार State PCS: अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन
1 संदर्भ: नई दिल्ली सम्मेलन और चीन की चुनौती

11-सदस्यीय विस्तारित ब्रिक्स समूह को दिशा देने की चुनौती

  • ऐतिहासिक अवसर: 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला 18वां ब्रिक्स सम्मेलन विस्तारित 11 सदस्यों (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई, इंडोनेशिया + 10 भागीदार देश) के साथ भारत की पहली अध्यक्षता है।
  • राजदूत टी.एस. तिरुमूर्ति का विश्लेषण: संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजदूत के अनुसार, जहां ब्रिक्स की स्थापना वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए हुई थी, वहीं चीन इसे 'पश्चिम-विरोधी' मंच बनाने का प्रयास कर रहा है।
  • सामरिक संतुलन: 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति की सफलता सर्वसम्मति के सिद्धांत की रक्षा और सार्क (SAARC) जैसी द्विपक्षीय कलह से बचने पर टिकी है।

समानांतर चीनी संरचनाएं

चीन वैश्विक संस्थाओं में सुधार के बजाय समानांतर तंत्र (mBridge, डिजिटल सिल्क रोड, शंघाई AI संगठन) खड़ा कर रहा है।

द्विपक्षीय तनाव

पश्चिम एशिया के नए सदस्यों के आपसी मतभेद ब्रिक्स की सर्वसम्मति आधारित कार्यप्रणाली को चुनौती दे रहे हैं।

2 कूटनीतिक सिद्धांत: 'गैर-पश्चिमी' बनाम 'पश्चिम-विरोधी'

भारत का 2026 चार-स्तंभीय विषय: लचीलापन, नवाचार, सहयोग, सततता

  • 'गैर-पश्चिमी' (Non-West) स्थिति: भारत ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी गुट के बजाय सुधारवादी बहुपक्षवाद (UNSC, IMF/World Bank कोटा सुधार) का मंच मानता है।
  • डी-डॉलरीकरण बनाम युआन वर्चस्व: भारत स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और यूपीआई-ब्रिक्स पे का समर्थन करता है, किंतु चीनी युआन-आधारित समानांतर मुद्रा का विरोध करता है।
  • सामरिक स्वायत्तता: भारत क्वाड (Quad), I2U2 और ब्रिक्स के बीच संतुलन साधते हुए 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति के जरिए बहु-संरेखण को आगे बढ़ा रहा है।
सामरिक आयाम चीन का आधिपत्यवादी दृष्टिकोण भारत का विदेश नीति विजन
वैचारिक रुख पश्चिम-विरोधी टकराववादी ध्रुवीकरण गैर-पश्चिमी, सुधारवादी बहुपक्षवाद एवं बहु-संरेखण
संस्थागत लक्ष्य ब्रेटन वुड्स को बाईपास कर समानांतर चीनी तंत्र बनाना यूएन सुरक्षा परिषद, आईएमएफ व विश्व बैंक में लोकतांत्रिक सुधार
वित्तीय रणनीति mBridge और युआन का अंतरराष्ट्रीयकरण द्विपक्षीय स्थानीय मुद्रा निपटान और ओपन डिजिटल स्टैक (UPI)
निर्णय प्रक्रिया बहुमत का दबाव (SCO मॉडल) पूर्ण सर्वसम्मति और संप्रभु समानता की रक्षा
3 नई दिल्ली 2026 हेतु रणनीतिक रोडमैप

1. सर्वसम्मति की रक्षा

यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी संयुक्त घोषणापत्र पूर्ण सर्वसम्मति के मूल नियम के आधार पर ही जारी हों।

2. मानवता प्रथम (Humanity First)

खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर केंद्रित जन-केंद्रित एजेंडे को शिखर सम्मेलन की धुरी बनाया जाए।

3. एनडीबी (NDB) का विस्तार

न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा बिना भू-राजनीतिक शर्तों के हरित अवसंरचना वित्तपोषण का दायरा बढ़ाया जाए।

4. ग्लोबल साउथ का सेतु

18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति को गैर-गुटनिरपेक्ष मध्यम शक्तियों के सशक्त मंच के रूप में स्थापित किया जाए।

18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति बहुध्रुवीय विश्व में शांति और आर्थिक स्थिरता की दिशा तय करने में निर्णायक सिद्ध होगा।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC Standard)
Q3. ब्रिक्स (BRICS) समूह और इसके वित्तीय संस्थानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना का औपचारिक प्रस्ताव 2012 के नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रखा गया था।
2. न्यू डेवलपमेंट बैंक में प्रत्येक संस्थापक सदस्य देश के पास उसके आर्थिक आकार के अनुपात में वीटो शक्ति होती है।
3. 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2026) 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता' के चार स्तंभों पर आधारित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: C — केवल 1 और 3

कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि आईएमएफ के विपरीत एनडीबी में संस्थापक सदस्यों के पास समान शेयरधारिता है और किसी के पास वीटो शक्ति नहीं है।

🏆 UPSC CSE Prelims 2016 (Actual PYQ)
Q. 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (NDB) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इसकी स्थापना एपेक (APEC) द्वारा की गई है।
2. एनडीबी का मुख्यालय शंघाई में स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A) केवल 1    B) केवल 2    C) 1 और 2 दोनों    D) न तो 1 और न ही 2
  • A) केवल 1
  • B) केवल 2
  • C) 1 और 2 दोनों
  • D) न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर: B — केवल 2

कथन 1 गलत है क्योंकि एनडीबी की स्थापना ब्रिक्स (2014 फोर्टालेजा घोषणा) द्वारा की गई थी। कथन 2 सही है (मुख्यालय शंघाई, चीन में है)।

UPSC CSE Mains 2022 — GS Paper II (Actual PYQ)

“आई2यू2 (भारत, इज़राइल, यूएई और यूएसए) समूह वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति को किस प्रकार रूपांतरित करेगा? ब्रिक्स के साथ इसके रणनीतिक अभिविन्यास की तुलना कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर संरचना (15 अंक | 250 शब्द)

“विस्तारित ब्रिक्स समूह वैश्विक जीडीपी के एक-तिहाई से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है, किंतु इसके आंतरिक विरोधाभास सुधारवादी बहुपक्षवाद के मंच के रूप में इसकी प्रभावशीलता को चुनौती देते हैं। 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति के संदर्भ में भारत के रणनीतिक हितों का परीक्षण कीजिए।”
मुख्य बिंदु संरचना
  • प्रस्तावना: विस्तारित ब्रिक्स (37% GDP PPP, 45% जनसंख्या, 40% तेल) के भू-आर्थिक भार और 18वें नई दिल्ली सम्मेलन का परिचय और 18वां नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारतीय विदेश नीति की प्रासंगिकता।
  • आंतरिक विरोधाभास: चीन का पश्चिम-विरोधी ध्रुवीकरण एजेंडा; समानांतर वित्तीय व्यवस्थाएं (mBridge); पश्चिम एशियाई सदस्यों के बीच द्विपक्षीय कलह; सर्वसम्मति का क्षरण।
  • भारत के रणनीतिक हित: 'गैर-पश्चिमी' रुख की रक्षा; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद व आईएमएफ कोटा सुधार; युआन के आधिपत्य के बिना स्थानीय मुद्रा व्यापार; क्वाड और ब्रिक्स के बीच संतुलन।
  • आगे की राह: प्रधानमंत्री मोदी के "मानवता प्रथम" सिद्धांत को आगे बढ़ाना, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) साझा करना और नियम-आधारित बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देना।
ब्रिक्स-11 गैर-पश्चिमी कूटनीति न्यू डेवलपमेंट बैंक बहुपक्षीय सुधार

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (8 सितंबर 2026 FAQs)

1. निकोटीन पाउच कोटपा (COTPA) 2003 और पेका (PECA) 2019 के दायरे से बाहर क्यों हैं?
कोटपा (COTPA) 2003 केवल तंबाकू के पत्तों से बने उत्पादों पर लागू होता है, जबकि निकोटीन पाउच तंबाकू-मुक्त होते हैं। वहीं पेका (PECA) 2019 केवल एरोसोल या भाप उत्पन्न करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्रतिबंधित करता है, जिससे गैर-इलेक्ट्रॉनिक ओरल पाउच कानूनी शून्यता में आ जाते हैं।
2. भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 को लेकर इसरो के कर्मचारी संघों की मुख्य चिंताएं क्या हैं?
कर्मचारी संघों ने नियमित उपग्रह निर्माण और रॉकेट प्रक्षेपण कार्यों को निजी क्षेत्र को सौंपने (IN-SPACe के जरिए), वैज्ञानिक भर्तियों पर रोक, और संभावित नौकरियों के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
3. ब्रिक्स के संदर्भ में भारत का 'गैर-पश्चिमी' (Non-West) दृष्टिकोण 'पश्चिम-विरोधी' (Anti-West) रुख से कैसे भिन्न है?
'गैर-पश्चिमी' दृष्टिकोण सुधारवादी बहुपक्षवाद, बहु-संरेखण और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ग्लोबल साउथ के विकास पर केंद्रित है, जबकि 'पश्चिम-विरोधी' रुख चीन के नेतृत्व में भू-राजनीतिक टकराव और समानांतर आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास करता है।
4. भारतीय व्यापार वर्गीकरण के तहत निकोटीन पाउच का आयात किस श्रेणी में आता है?
डीजीएफटी के आईटीसी-एचएस कोड 2404 91 30 के तहत निकोटीन पाउच 'प्रतिबंधित' (Restricted) श्रेणी में आते हैं, जिसका अर्थ है कि इनका आयात केवल सीमा शुल्क देकर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए सरकार से विशिष्ट लाइसेंस आवश्यक है।
5. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भारत की अध्यक्षता का चार-स्तंभीय विषय क्या है?
भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय चार स्तंभों पर आधारित है: Resilience (लचीलापन), Innovation (नवाचार), Cooperation (सहयोग) और Sustainability (सततता), जो प्रधानमंत्री के 'मानवता प्रथम' विजन से प्रेरित है।
Compiled by Todays Current Affairs | UPSC CSE & State PCS Editorial Analysis (8 September 2026)
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