The Hindu Editorial Today in Hindi 9 September 2026
UPSC CSE 2026 & State PCS | द हिंदू संपादकीय विश्लेषण (9 सितंबर 2026)
GS पेपर II शासन एवं जनजातीय अधिकार संवैधानिक विकेंद्रीकरण

खतरनाक वापसी: भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन को कमजोर करने के प्रयासों का परीक्षण

प्रारंभिक: FRA 2006, PESA 1996 & नियमगिरि फैसला मुख्य परीक्षा: जनजातीय भूमि अधिकार बनाम वृहद परियोजनाएं State PCS: 5वीं अनुसूची शासन प्रणाली
1 संदर्भ: संसदीय समिति की विवादास्पद सिफारिश

सर्वसम्मत सहमति के स्थान पर 70%-75% बहुमत का प्रस्ताव

  • प्रमुख सिफारिश: सार्वजनिक उपक्रमों पर संसदीय समिति (COPU) ने हाल ही में सुझाव दिया कि बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सभी प्रभावित ग्राम सभाओं की सहमति के बजाय केवल 70%-75% ग्राम सभाओं की सहमति पर्याप्त होनी चाहिए।
  • लोकतांत्रिक भावना पर आघात: यह प्रस्ताव ग्राम सभाओं को मौलिक अधिकारों की संरक्षक संवैधानिक संस्थाओं से घटाकर केवल कॉर्पोरेट वार्ताकार पक्षकारों में बदलने का जोखिम पैदा करता है।
  • कृत्रिम सहमति का निर्माण: 70% की सीमा का लाभ उठाकर परियोजना डेवलपर्स सीधे जलमग्न होने वाले गांवों को दरकिनार कर बाहरी गांवों से NOC प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

तीस्ता-IV जलविद्युत परियोजना का मामला

सिक्किम में रुकी हुई मेगा हाइड्रो परियोजनाओं को गति देने के लिए जनजातीय सहमति प्रावधानों को शिथिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

मंत्रालयी अधिकार क्षेत्र का शून्य

जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा अपनी प्राथमिक नोडल शक्ति का प्रयोग न करने से पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) को नियम ढीले करने की छूट मिल रही है।

2 कानूनी व संवैधानिक ढांचा: FRA 2006 का मूल उद्देश्य

ऐतिहासिक अन्यायों का परिहार: नियमगिरि फैसला और पेसा (PESA) अधिनियम

  • FRA 2006 का मूल अधिदेश: वनवासी अनुसूचित जनजातियों (FDST) और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFD) के साथ हुए "ऐतिहासिक अन्यायों" को समाप्त करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया था।
  • नियमगिरि ऐतिहासिक फैसला (2013): ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन बनाम MoEF मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन भूमि के विपथन और धार्मिक/सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतिम निर्णय ग्राम सभा का ही होगा।
  • वन संरक्षण नियम 2022 का टकराव: केंद्र सरकार द्वारा सैद्धांतिक वन मंजूरी (Stage-II) के बाद ग्राम सभा सहमति लेने की व्यवस्था ने भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन में गंभीर विसंगतियां पैदा कर दी हैं।
प्रशासनिक आयाम संवैधानिक अधिदेश (FRA 2006 / PESA 1996) प्रस्तावित संशोधन (COPU दृष्टिकोण)
सहमति की अनिवार्यता प्रभावित सभी ग्राम सभाओं की पूर्व एवं स्वतंत्र सहमति (FPIC) परियोजना क्षेत्र की 70%-75% ग्राम सभाओं का बहुमत पर्याप्त
ग्राम सभा की भूमिका अधिकारों के निर्धारण व सांस्कृतिक अस्तित्व की सर्वोच्च वैधानिक संस्था मात्र सलाहकारी संस्था और कॉर्पोरेट हितधारक
नोडल एजेंसी जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) एकमात्र वैधानिक नोडल एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय और राज्य नौकरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप
मंजूरी का क्रम वन भूमि हस्तांतरण से पहले सभी अधिकारों का पूर्ण निपटान सैद्धांतिक मंजूरी पहले, ग्राम सभा सहमति मात्र एक औपचारिकता
3 नीतिगत प्राथमिकताएं: जमीनी लोकतंत्र का संरक्षण

1. MoTA की प्राथमिकता

वन मंजूरी और अधिकारों के निपटान से जुड़े सभी नियमों में जनजातीय कार्य मंत्रालय के नोडल अधिकार को पुनः स्थापित करना।

2. पूर्व सहमति अनिवार्य

व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार (CFR) पट्टे पूर्ण रूप से मिलने के बाद ही प्रथम चरण की वन मंजूरी प्रदान की जाए।

3. फर्जी प्रस्तावों पर रोक

ग्राम सभा के फर्जी और नौकरशाही द्वारा तैयार प्रस्तावों को रोकने के लिए न्यायिक और स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य हो।

4. 5वीं अनुसूची की सुरक्षा

संवैधानिक प्रावधानों और भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखना।

ऊर्जा संक्रमण और अवसंरचना विकास के नाम पर भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ 1)
प्रश्न 1. अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों की प्रकृति और सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने का वैधानिक अधिकार ग्राम सभा के पास है।
2. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) FRA 2006 के क्रियान्वयन के लिए नामित नोडल मंत्रालय है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 के ऐतिहासिक नियमगिरि फैसले में कहा कि खनन के लिए वन भूमि का विपथन करने से पहले ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 1 और 3
  • C) केवल 2 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), न कि पर्यावरण मंत्रालय, वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।

🏆 UPSC CSE Prelims 2018 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. 'क्रिटिकल वाइल्डलाइफ हैबिटेट' (Critical Wildlife Habitat) की परिभाषा वन अधिकार अधिनियम, 2006 में शामिल है।
2. भारत में पहली बार बैगा (Baiga) जनजाति को पर्यावास अधिकार (Habitat Rights) दिए गए हैं।
3. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आधिकारिक रूप से भारत के किसी भी हिस्से में PVTG के लिए पर्यावास अधिकार तय करता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 और 2    B) केवल 2 और 3    C) केवल 3    D) 1, 2 और 3
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि PVTG के पर्यावास अधिकारों का निर्धारण जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के दिशा-निर्देशों के तहत होता है।

UPSC CSE Mains 2021 — GS पेपर II (PYQ)

“वन अधिकार अधिनियम, 2006 की परिकल्पना वनवासी समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्यायों को दूर करने के लिए की गई थी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में संस्थागत और प्रशासनिक चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के नाम पर वन अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम सभा सहमति की अनिवार्यता को शिथिल करना जमीनी संवैधानिक लोकतंत्र से समझौता है। भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।”
मुख्य संरचनात्मक बिंदु
  • प्रस्तावना: FRA 2006 एवं PESA 1996 के तहत ग्राम सभा के वैधानिक अधिदेश को स्पष्ट करते हुए भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन के महत्व का उल्लेख करें।
  • 70% बहुमत की छूट के दुष्परिणाम: सीधे विस्थापित होने वाले गांवों को दरकिनार करना; स्वतंत्र पूर्व सहमति (FPIC) के सिद्धांत का उल्लंघन; नियमगिरि फैसले की अवहेलना।
  • संस्थागत चुनौतियां: MoTA और MoEFCC के बीच समन्वय का अभाव; वन संरक्षण नियम 2022 के कारण उपजी कानूनी खामियां।
  • आगे की राह: ग्राम सभा के वीटो अधिकार को अक्षुण्ण रखना; परियोजना मंजूरी से पहले सामुदायिक वन अधिकारों (CFR) का पूर्ण निपटान; पारदर्शी न्यायिक निगरानी।
FRA 2006 ग्राम सभा वीटो नियमगिरि फैसला 5वीं अनुसूची
GS पेपर II शासन एवं मौलिक अधिकार डेटा गोपनीयता एवं सांख्यिकीय शुद्धता

जनगणना प्रश्नों पर चिंताएं: सार्वजनिक नीति निर्माण और 2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं का विश्लेषण

प्रारंभिक: जनगणना अधिनियम 1948, RGI & पुट्टास्वामी फैसला मुख्य परीक्षा: सांख्यिकीय उद्देश्य बनाम व्यक्तिगत निगरानी State PCS: जनसांख्यिकी और लोक नीति
1 संदर्भ: 40 प्रश्नों वाली जनगणना अनुसूची

सरकार द्वारा अधिसूचित 2027 जनगणना प्रश्नावली पर उठा विवाद

  • नया बदलाव: केंद्र सरकार ने आगामी 2027 की जनगणना के जनसंख्या गणना चरण के लिए 40 प्रश्नों की अधिसूचना जारी की है, जिसमें अभूतपूर्व रूप से व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज मांगे गए हैं।
  • व्यक्तिगत पहचान विवरण: प्रश्नों में आधार, वोटर आईडी, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खातों की संख्या, कोविड टीकाकरण स्थल और माता-पिता के जन्मस्थान जैसी संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं।
  • मूल बहस: वृहद सांख्यिकीय आंकड़ों से हटकर व्यक्तिगत ट्रैकिंग की ओर बढ़ना 2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं को जन्म देता है।

उत्तरदाता की थकान व गलतियां

40 प्रश्नों वाली लंबी प्रश्नावली से उत्तरदाताओं में झिझक, थकान और असहयोग की भावना पैदा होगी, जिससे डेटा की शुद्धता प्रभावित होगी।

NPR/NRC लिंकेज का भय

माता-पिता के जन्मस्थान और पहचान दस्तावेजों के प्रश्न नागरिकता रजिस्टर (NPR/NRC) से जोड़े जाने का सामाजिक संशय पैदा करते हैं।

2 वैधानिक उद्देश्य बनाम व्यक्तिगत निगरानी

संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा और जनगणना अधिनियम 1948 का सुरक्षा कवच

  • संयुक्त राष्ट्र की जनगणना परिभाषा: जनगणना का उद्देश्य नीति निर्माण के लिए समग्र सामाजिक-आर्थिक सांख्यिकी एकत्र करना है, न कि व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग या डेटाबेस बनाना।
  • धारा 15 के तहत पूर्ण गोपनीयता: जनगणना अधिनियम, 1948 व्यक्तिगत जानकारियों को अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रयोग करने या पुलिस/प्रशासनिक जांच के लिए साझा करने पर पूर्ण रोक लगाता है।
  • पुट्टास्वामी आनुपातिकता परीक्षण: अनिवार्य पहचान संख्याएं एकत्र करना सुप्रीम कोर्ट के निजता फैसले में दिए गए 'उद्देश्य-सीमा' (Purpose Limitation) सिद्धांत का उल्लंघन है, जो 2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं का केंद्र बिंदु है।
तुलनात्मक मानक पारंपरिक जनगणना (1881–2011) अधिसूचित 2027 जनगणना प्रश्नावली
प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक नीति हेतु समग्र जनसांख्यिकीय व आर्थिक आंकड़े सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ व्यक्तिगत पहचान दस्तावेजों का एकीकरण
व्यक्तिगत पहचानकर्ता नाम, आयु, लिंग, संबंध (कोई दस्तावेज संख्या नहीं) आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खाते
गोपनीयता मॉडल 1948 अधिनियम के तहत पूर्ण सांख्यिकीय अनामिकता अन्य डेटाबेस के साथ इंटर-ऑपरेबिलिटी और निगरानी का जोखिम
जनविश्वास निगरानी के भय के बिना सार्वभौमिक सहभागिता नागरिकता सत्यापन (NPR/NRC) को लेकर सामाजिक संशय
3 सांख्यिकीय विश्वसनीयता की रक्षा हेतु रोडमैप

1. अनावश्यक पहचान हटाना

उद्देश्य-सीमा के तहत प्रश्नावली से आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज नंबरों को तत्काल हटाया जाए।

2. कानूनी सुरक्षा दीवार

स्पष्ट किया जाए कि जनगणना डेटा को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) या कानून प्रवर्तन के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

3. जन-जागरूकता अभियान

जनगणना अधिनियम 1948 की गोपनीयता धाराओं को लेकर देशव्यापी पारदर्शी संचार अभियान चलाया जाए।

4. डेटा की गुणवत्ता

2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं का समाधान कर समग्र और सटीक आंकड़े सुनिश्चित किए जाएं।

राष्ट्रीय नीति निर्माण के आधार को मजबूत रखने के लिए 2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं को दूर करना आवश्यक है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ 2)
प्रश्न 2. भारत में जनगणना के संचालन के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. दशकीय जनगणना सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा आयोजित की जाती है।
2. जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिक द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय होती है और इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता।
3. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में 'जनगणना' संघ सूची (Union List) का विषय है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: B — केवल 2 और 3

कथन 2 और 3 सही हैं (संघ सूची प्रविष्टि 69; धारा 15 गोपनीयता)। कथन 1 गलत है क्योंकि जनगणना आयुक्त कार्यालय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्य करता है, MoSPI के नहीं।

🏆 UPSC CSE Prelims 2018 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के अभिन्न अंग के रूप में संरक्षित है?

A) अनुच्छेद 14    B) अनुच्छेद 19    C) अनुच्छेद 21    D) अनुच्छेद 29
  • A) अनुच्छेद 14
  • B) अनुच्छेद 19
  • C) अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)
  • D) अनुच्छेद 29
सही उत्तर: C — अनुच्छेद 21

के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।

UPSC CSE Mains 2020 — GS पेपर II (PYQ)

“डिजिटल शासन का विकास राज्य की निगरानी, प्रशासनिक सुविधा और व्यक्तिगत गोपनीयता के बीच एक नाजुक संतुलन की मांग करता है। हालिया डेटा संग्रह प्रथाओं के प्रकाश में परीक्षण कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“जनगणना लोकतांत्रिक योजना निर्माण के लिए एक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, न कि व्यक्तिगत निगरानी का साधन। 2027 की प्रश्नावली के आलोक में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं और संस्थागत सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन कीजिए।”
मुख्य संरचनात्मक बिंदु
  • प्रस्तावना: 1948 के अधिनियम के तहत जनगणना के मूल सांख्यिकीय उद्देश्य को रेखांकित करते हुए 2027 जनगणना प्रश्नावली और भारत में डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएं का परिचय दें।
  • गोपनीयता व पद्धतिगत विसंगतियां: व्यक्तिगत दस्तावेजों (आधार, बैंक खाते) का संग्रह पुट्टास्वामी फैसले के 'उद्देश्य सीमा' सिद्धांत का उल्लंघन करता है; उत्तरदाताओं की हिचकिचाहट से आंकड़ों की विकृति।
  • नीतिगत प्रभाव: परिसीमन, वित्त आयोग आवंटन और कल्याणकारी योजनाओं के लक्षित वितरण पर गलत आंकड़ों का दुष्प्रभाव।
  • आगे की राह: व्यक्तिगत दस्तावेजों को जनगणना से पृथक करना; मजबूत कानूनी डेटा सुरक्षा दीवार का निर्माण करना।
जनगणना अधिनियम 1948 पुट्टास्वामी फैसला डेटा गोपनीयता अनुच्छेद 21
GS पेपर II अंतर्राष्ट्रीय संबंध द्विपक्षीय सुरक्षा एवं हिंद-प्रशांत

रक्षा सहयोग के नए आयाम: भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा का परिचालन एवं रणनीतिक विस्तार

प्रारंभिक: UNICORN मास्ट, वीर गार्जियन & 2+2 वार्ता मुख्य परीक्षा: हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना & रक्षा सह-उत्पादन State PCS: रणनीतिक साझेदारी और रक्षा तकनीक
1 संदर्भ: जापानी रक्षा मंत्री की ऐतिहासिक भारत यात्रा

कूटनीतिक संवाद से धरातलीय रक्षा क्षमताओं और उत्पादन की ओर

  • महत्वपूर्ण यात्रा: जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान और आईएनएस चेन्नई का दौरा किया तथा नई दिल्ली में द्विपक्षीय उच्चस्तरीय वार्ता की।
  • रणनीतिक छलांग: पिछले एक दशक की 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठकों और ACSA लॉजिस्टिक्स समझौते से आगे बढ़कर साझेदारी अब प्रत्यक्ष औद्योगिक सह-विकास में तब्दील हो रही है।
  • भू-रणनीतिक महत्व: भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा जापान की पूर्वी चीन सागर प्राथमिकताओं को हिंद महासागर में भारत के नेतृत्व से जोड़ता है।

UNICORN एंटीना प्रणाली

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और जापान द्वारा सह-विकसित स्टील्थ रडार एंटीना मास्ट—भारत को जापान का पहला प्रमुख रक्षा उपकरण हस्तांतरण।

नौसैनिक जहाजों की मरम्मत (MRO)

'मेक इन इंडिया' के तहत भारतीय शिपयार्ड्स में जापानी नौसेना के जहाजों की मरम्मत और DRDO-ATLA तकनीकी समन्वय।

2 हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा का परिचालन

समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) और संयुक्त सैन्य अभ्यास

  • एकीकृत समुद्री निगरानी: मलक्का जलडमरूमध्य से लेकर पश्चिमी हिंद महासागर और ताइवान जलडमरूमध्य तक निरंतर रडार और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान।
  • हवाई अभ्यास का विस्तार: 'वीर गार्जियन 2026' (9-22 सितंबर, 2026) में पहली बार जापानी लड़ाकू विमान भारत पहुंचे हैं, जो धर्म गार्जियन और जिमेक्स (JIMEX) के साथ जुड़ता है।
  • सकारात्मक सुरक्षा संरचना: केवल चीन-विरोधी प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और तीसरे देशों के क्षमता निर्माण में भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा का विस्तार।
सहयोग का आधारस्तंभ पूर्व संस्थागत ढांचा (2014–2023) नया परिचालन विस्तार (2024–2026)
रक्षा प्रौद्योगिकी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के सामान्य समझौता ज्ञापन (MoUs) UNICORN स्टील्थ एंटीना मास्ट (BEL-जापान) व DRDO-ATLA प्रत्यक्ष परियोजनाएं
संयुक्त युद्धाभ्यास बुनियादी नौसैनिक व थलसैनिक अभ्यास (JIMEX, Dharma Guardian) लड़ाकू विमानों से युक्त 'वीर गार्जियन 2026' और मानवरहित प्रणालियां
लॉजिस्टिक्स व MRO पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौता (ACSA) भारतीय शिपयार्ड्स में जापानी युद्धपोतों की मरम्मत और रखरखाव
समुद्री दायरा मुख्यतः बंगाल की खाड़ी और मलक्का चोकपॉइंट्स तक सीमित पश्चिमी हिंद महासागर से लेकर पूर्वी चीन सागर/ताइवान तक सतत MDA
3 भविष्य की रणनीतिक रूपरेखा

1. औद्योगिक सह-उत्पादन

जापान की उच्च स्तरीय सेंसर तकनीक को भारत के किफायती रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जोड़ना।

2. अंडरसी निगरानी

हिंद-प्रशांत में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) और समुद्र तल सेंसर निगरानी को सशक्त करना।

3. आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण

रक्षा संपत्तियों के लिए सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम और एआई तकनीकों का संयुक्त विकास करना।

4. तीसरे देशों को सहायता

आसियान और हिंद महासागरीय द्वीप राष्ट्रों को गश्ती नौकाएं व रडार उपलब्ध कराकर भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा को विस्तारित करना।

नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा एक अनिवार्य धुरी है।

✎ प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ 3)
प्रश्न 3. भारत-जापान रक्षा और रणनीतिक संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. 'वीर गार्जियन' भारतीय वायु सेना और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच आयोजित एक द्विपक्षीय हवाई युद्ध अभ्यास है।
2. UNICORN प्रणाली भारत और जापान के बीच पहली संयुक्त रक्षा उपकरण सह-विकास परियोजना है।
3. दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता के लिए भारत और जापान ने ACSA समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
  • A) केवल 1 और 2
  • B) केवल 2 और 3
  • C) केवल 1 और 3
  • D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3

तीनों कथन सही हैं। वीर गार्जियन द्विपक्षीय हवाई अभ्यास है; UNICORN एंटीना मास्ट BEL के साथ सह-विकसित है; ACSA पारस्परिक सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौता है।

🏆 UPSC CSE Prelims 2016 (वास्तविक PYQ)
प्रश्न. 'मालाबार अभ्यास' (Exercise Malabar) मूल रूप से किन देशों के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था?

A) भारत और जापान    B) भारत और अमेरिका    C) भारत और ऑस्ट्रेलिया    D) जापान और अमेरिका
  • A) भारत और जापान
  • B) भारत और अमेरिका
  • C) भारत और ऑस्ट्रेलिया
  • D) जापान और अमेरिका
सही उत्तर: B — भारत और अमेरिका

मालाबार अभ्यास 1992 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रूप से शुरू हुआ था। 2015 में जापान इसका स्थायी सदस्य बना और 2020 में ऑस्ट्रेलिया के पुनः शामिल होने से यह क्वाड (Quad) अभ्यास बन गया।

UPSC CSE Mains 2022 — GS पेपर II (PYQ)

“हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने में 2+2 वार्ता तंत्र के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।” (15 अंक | 250 शब्द)

मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)

“भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी अब मात्र कूटनीतिक वक्तव्यों से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष रक्षा उत्पादन और परिचालन सहयोग में बदलनी चाहिए। भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में विवेचना कीजिए।”
मुख्य संरचनात्मक बिंदु
  • प्रस्तावना: भारत-जापान साझेदारी के क्रमिक विकास का उल्लेख करते हुए भारत जापान रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा की महत्ता स्पष्ट करें।
  • परिचालन व औद्योगिक उपलब्धियां: UNICORN एंटीना मास्ट परियोजना (BEL-जापान); भारतीय शिपयार्ड्स में जापानी जहाजों की मरम्मत; वीर गार्जियन युद्धाभ्यास।
  • रणनीतिक अनिवार्यताएं: समुद्री व्यापार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा; आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (SCRI); एकतरफा आधिपत्य का मुकाबला।
  • आगे की राह: DRDO-ATLA सह-विकास को बढ़ावा देना; अंडरसी डोमेन अवेयरनेस बढ़ाना; आसियान राष्ट्रों को सुरक्षा उपकरण प्रदान करना।
UNICORN मास्ट वीर गार्जियन 2026 हिंद-प्रशांत सुरक्षा समुद्री डोमेन जागरूकता

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (9 सितंबर 2026 FAQs)

1. वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत ग्राम सभा की पूर्ण सहमति को कमजोर करने का प्रस्ताव विवादास्पद क्यों है?
प्रभावित सभी ग्राम सभाओं की सर्वसम्मत सहमति के स्थान पर केवल 70%-75% बहुमत की सहमति की सिफारिश वनवासी जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करती है। इससे परियोजना डेवलपर्स मुख्य प्रभावित गांवों को छोड़कर बाहरी गांवों की सहमति से परियोजनाएं आगे बढ़ा सकते हैं।
2. 2027 की जनगणना प्रश्नावली को लेकर प्रमुख गोपनीयता और पद्धतिगत चिंताएं क्या हैं?
जनगणना 2027 में आधार, वोटर आईडी, मोबाइल नंबर और बैंक खातों जैसे 40 व्यक्तिगत पहचान विवरण मांगना जनगणना के पारंपरिक सांख्यिकीय उद्देश्य से भटकाव है, जो निगरानी की आशंका पैदा करता है और डेटा गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
3. भारत-जापान रक्षा संबंधों में UNICORN प्रणाली क्या है?
UNICORN (Unified Complex Radio Antenna) भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और जापान द्वारा सह-विकसित एक अत्याधुनिक एकीकृत संचार एंटीना मास्ट प्रणाली है, जो भारत को जापान का पहला बड़ा रक्षा उपकरण हस्तांतरण है।
4. सितंबर 2026 में भारत और जापान के बीच आयोजित होने वाला कौन सा द्विपक्षीय वायुसैनिक अभ्यास पहली बार लड़ाकू विमानों को शामिल कर रहा है?
'वीर गार्जियन 2026' (Veer Guardian 2026 - 9-22 सितंबर, 2026) अभ्यास में जापानी लड़ाकू विमान भारत में पहली बार परिचालन कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच सामरिक व हवाई अंतर-संचालनीयता को मजबूत करता है।
5. जनगणना अधिनियम, 1948 डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा कैसे करता है?
जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 व्यक्तिगत जनगणना रिकॉर्ड की पूर्ण गोपनीयता की गारंटी देती है और इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग करने या किसी अन्य प्रशासनिक एजेंसी के साथ साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है।
संकलन: Todays Current Affairs | UPSC CSE & State PCS संपादकीय विश्लेषण (9 सितंबर 2026)
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