सर्वसम्मत सहमति के स्थान पर 70%-75% बहुमत का प्रस्ताव
- प्रमुख सिफारिश: सार्वजनिक उपक्रमों पर संसदीय समिति (COPU) ने हाल ही में सुझाव दिया कि बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सभी प्रभावित ग्राम सभाओं की सहमति के बजाय केवल 70%-75% ग्राम सभाओं की सहमति पर्याप्त होनी चाहिए।
- लोकतांत्रिक भावना पर आघात: यह प्रस्ताव ग्राम सभाओं को मौलिक अधिकारों की संरक्षक संवैधानिक संस्थाओं से घटाकर केवल कॉर्पोरेट वार्ताकार पक्षकारों में बदलने का जोखिम पैदा करता है।
- कृत्रिम सहमति का निर्माण: 70% की सीमा का लाभ उठाकर परियोजना डेवलपर्स सीधे जलमग्न होने वाले गांवों को दरकिनार कर बाहरी गांवों से NOC प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
तीस्ता-IV जलविद्युत परियोजना का मामला
सिक्किम में रुकी हुई मेगा हाइड्रो परियोजनाओं को गति देने के लिए जनजातीय सहमति प्रावधानों को शिथिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
मंत्रालयी अधिकार क्षेत्र का शून्य
जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा अपनी प्राथमिक नोडल शक्ति का प्रयोग न करने से पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) को नियम ढीले करने की छूट मिल रही है।
ऐतिहासिक अन्यायों का परिहार: नियमगिरि फैसला और पेसा (PESA) अधिनियम
- FRA 2006 का मूल अधिदेश: वनवासी अनुसूचित जनजातियों (FDST) और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFD) के साथ हुए "ऐतिहासिक अन्यायों" को समाप्त करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया था।
- नियमगिरि ऐतिहासिक फैसला (2013): ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन बनाम MoEF मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वन भूमि के विपथन और धार्मिक/सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतिम निर्णय ग्राम सभा का ही होगा।
- वन संरक्षण नियम 2022 का टकराव: केंद्र सरकार द्वारा सैद्धांतिक वन मंजूरी (Stage-II) के बाद ग्राम सभा सहमति लेने की व्यवस्था ने भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन में गंभीर विसंगतियां पैदा कर दी हैं।
| प्रशासनिक आयाम | संवैधानिक अधिदेश (FRA 2006 / PESA 1996) | प्रस्तावित संशोधन (COPU दृष्टिकोण) |
|---|---|---|
| सहमति की अनिवार्यता | प्रभावित सभी ग्राम सभाओं की पूर्व एवं स्वतंत्र सहमति (FPIC) | परियोजना क्षेत्र की 70%-75% ग्राम सभाओं का बहुमत पर्याप्त |
| ग्राम सभा की भूमिका | अधिकारों के निर्धारण व सांस्कृतिक अस्तित्व की सर्वोच्च वैधानिक संस्था | मात्र सलाहकारी संस्था और कॉर्पोरेट हितधारक |
| नोडल एजेंसी | जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) एकमात्र वैधानिक नोडल एजेंसी | पर्यावरण मंत्रालय और राज्य नौकरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप |
| मंजूरी का क्रम | वन भूमि हस्तांतरण से पहले सभी अधिकारों का पूर्ण निपटान | सैद्धांतिक मंजूरी पहले, ग्राम सभा सहमति मात्र एक औपचारिकता |
1. MoTA की प्राथमिकता
वन मंजूरी और अधिकारों के निपटान से जुड़े सभी नियमों में जनजातीय कार्य मंत्रालय के नोडल अधिकार को पुनः स्थापित करना।
2. पूर्व सहमति अनिवार्य
व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार (CFR) पट्टे पूर्ण रूप से मिलने के बाद ही प्रथम चरण की वन मंजूरी प्रदान की जाए।
3. फर्जी प्रस्तावों पर रोक
ग्राम सभा के फर्जी और नौकरशाही द्वारा तैयार प्रस्तावों को रोकने के लिए न्यायिक और स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य हो।
4. 5वीं अनुसूची की सुरक्षा
संवैधानिक प्रावधानों और भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखना।
ऊर्जा संक्रमण और अवसंरचना विकास के नाम पर भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
1. व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों की प्रकृति और सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने का वैधानिक अधिकार ग्राम सभा के पास है।
2. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) FRA 2006 के क्रियान्वयन के लिए नामित नोडल मंत्रालय है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 के ऐतिहासिक नियमगिरि फैसले में कहा कि खनन के लिए वन भूमि का विपथन करने से पहले ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: B — केवल 1 और 3
कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), न कि पर्यावरण मंत्रालय, वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।
1. 'क्रिटिकल वाइल्डलाइफ हैबिटेट' (Critical Wildlife Habitat) की परिभाषा वन अधिकार अधिनियम, 2006 में शामिल है।
2. भारत में पहली बार बैगा (Baiga) जनजाति को पर्यावास अधिकार (Habitat Rights) दिए गए हैं।
3. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आधिकारिक रूप से भारत के किसी भी हिस्से में PVTG के लिए पर्यावास अधिकार तय करता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 3 D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि PVTG के पर्यावास अधिकारों का निर्धारण जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के दिशा-निर्देशों के तहत होता है।
UPSC CSE Mains 2021 — GS पेपर II (PYQ)
मॉडल उत्तर रूपरेखा (15 अंक | 250 शब्द)
मुख्य संरचनात्मक बिंदु
- प्रस्तावना: FRA 2006 एवं PESA 1996 के तहत ग्राम सभा के वैधानिक अधिदेश को स्पष्ट करते हुए भारत में ग्राम सभा की सहमति और वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन के महत्व का उल्लेख करें।
- 70% बहुमत की छूट के दुष्परिणाम: सीधे विस्थापित होने वाले गांवों को दरकिनार करना; स्वतंत्र पूर्व सहमति (FPIC) के सिद्धांत का उल्लंघन; नियमगिरि फैसले की अवहेलना।
- संस्थागत चुनौतियां: MoTA और MoEFCC के बीच समन्वय का अभाव; वन संरक्षण नियम 2022 के कारण उपजी कानूनी खामियां।
- आगे की राह: ग्राम सभा के वीटो अधिकार को अक्षुण्ण रखना; परियोजना मंजूरी से पहले सामुदायिक वन अधिकारों (CFR) का पूर्ण निपटान; पारदर्शी न्यायिक निगरानी।